faith

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अन्त:प्रकाश – भाग १ (The Inner Light – Part 1) ‘दिव्यत्व’ यह प्रकाशदायी तत्त्व है। सिर्फ बाह्य लोक में ही नहीं, बल्कि मानव के अन्दर भी यह दिव्यत्व रहता है। मानव के भीतर रहनेवाला अन्त:प्रकाश (The Inner Light) यानी विवेक यह भगवान के द्वारा मानव के अंदर प्रकाशित किया गया दिव्यत्व है, जिसके जरिये वह भगवान के साथ जुडा रह सकता है। भगवान के द्वारा जलायी गयी इस ज्योति को

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साँस और दिव्यत्व – भाग २ (Breathing And Divinity – Part 2) जो सही है उसे स्वीकार करना और जो गलत है उसे बाहर फेंकना यह क्रिया साँस प्रक्रिया में सहज रूप में होती रहती है और इसीलिए साँस को भी दिव्य माना गया है। मानव का बच्चा जन्म लेते ही रोने लगता है। दर असल वह रोता नहीं है, बल्कि साँस लेता है। मानव की मृत्यु का वर्णन करते

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भगवान किसी भी संकट से बडा है (God is Greater Than Any Problem) भगवान पर रहनेवाला विश्वास यह सबसे अहम बात है। भगवान पर का भरोसा कभी भी हिलने मत दीजिए। जितना संकट बडा उतना भगवान (God) पर का विश्वास भी बडा रखो। मानव के लिए कोई संकट बडा हो सकता है, मगर भगवान (God) किसी भी संकट से बडा ही है, इस बारे में परमपूज्य सद्गुरू श्री अनिरुद्ध बापूनें

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धारा शब्द को उलटा करने पर राधा शब्द बनता है (The Revert of Dhara Is Radha) मनुष्य के जीवन का सफर यह एक ‘धारा’ है। सृजन से लेकर विनाश तक बहनेवाली यह जीवनरूपी धारा होती है। विधायक से विघातक की दिशा में रहनेवाली गति धारा कहलाती है। विघातक शक्ति का रूपान्तरण जो विधायक शक्ति में करती है, वही राधा (Radha) है। धारा शब्द को उलटा करने पर राधा (Radha) शब्द

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सजल मूल जिन्ह सरितन्ह नाहीं … (Sajal Mool Jinha Saritanha Naahi …) गंगाजी जैसी बारह महीने बहनेवाली नदियों का मूल सजल होने के कारण वे कभी नहीं सूखतीं। इसी तरह भगवान का नाम जिस मानव की जीवन-नदी का मूल होता है, उसका जीवन कभी नहीं सूखता। वहीं, जिन्हें केवल बरसात का ही आसरा है, वे वर्षा के बीत जाने पर फिर तुरंत ही सूख जाती हैं। भगवान से विमुख होकर

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दिव्य शक्ति (Divya Shakti) कार्य की दृष्टि से शक्ति के विधायक और विघातक इस तरह दो प्रकार माने जाते हैं। मानव के जीवन में विधायक शक्ति को कार्यान्वित कर विश्व की विघातक शक्तियों को कम करने का काम दिव्यशक्ति ( Divya Shakti ) करती है। ‘जिससे पवित्रता और आनन्द उत्पन्न होता है, वही दिव्य है’ और जो इस दिव्यता को प्रदान करती है उसे देवी कहते हैं। ‘राधा’ यह इस

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विचार के विधायक और विघातक ये दो पहलू – भाग २ (Constructive And Destructive Aspects Of Thought-Part 2) हर एक विचार (Thought) की, हर एक बात की मानव के जीवन में एक भूमिका रहती है। विचार (Thought) या कोई बात ये विधायक और विघातक दो प्रकार के रहते हैं। वह विचार या बात विधायक या विघातक इनमें से किस रूप में कार्य करेगी, यह मानव अपनी कर्मस्वतन्त्रता का उपयोग किस

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‘श्रीश्वासम्’साठी करावयाची तयारी (Preparation For ShreeShwaasam) - Aniruddha Bapu Marathi Discourse 19 Mar 2015

‘श्रीश्वासम्’साठी करावयाची तयारी ( Preparation For ShreeShwaasam ) ‘श्रीश्वासम्’साठी सर्वांनी आता जोमाने तयारीला लागले पाहिजे. ‘श्रीश्वासम्’मध्ये आपला हातभार लागावा अशी इच्छा असणार्‍यांनी गुढीपाडव्यापासून प्रेमाने पुढील गोष्टी कराव्या- ‘श्रीश्वासम्’साठी कमीत कमी एक रामनामवही लिहिणे आणि ‘ॐ श्रीरामदूताय हनुमन्ताय महाप्राणाय महाबलाय नमो नम:’ या मन्त्राचा न मोजता जप करणे आणि तो झाल्यावर ‘श्रीश्वासम्’साठी असे म्हणणे. ‘श्रीश्वासम्’साठी करण्याच्या तयारीबद्द्ल सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या १९ मार्च २०१५ रोजीच्या प्रवचनात सांगितले, जे आपण या व्हिडियोत पाहू

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एकमेकांना समजून घ्या ( Try To Understand Each Other ) घरात भांडण झाले तरी भांडणार्‍या व्यक्तीने हे लक्षात ठेवले पाहिजे की जरी मतभेद असले तरी आपल्या माणसाशी झाले आहेत, त्यात कटुता येऊ देऊ नका. मुलांशी, वडिलधार्‍यांशी संवाद साधा, घरच्यांना वेळ द्या. घरातील एकमेकांना समजून घेणे आवश्यक का आहे, याबद्दल सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या ८ जानेवारी २०१५ रोजीच्या प्रवचनात सांगितले, जे आपण या व्हिडियोत पाहू शकता. ॥ हरि ॐ ॥ ॥ श्रीराम

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संस्कृती मूल्यांवर अवलंबून असते ( The Culture Depends On Values ) परदेशात गेलेल्या व्यक्तींनी आपल्या मातृभूमीशी म्हणजेच भारताशी जुळलेली आपली नाळ तुटू देता कामा नये. कुठेही राहिलो तरी आपली भारतीय संस्कृती (Culture) अवश्य जपा. संस्कृती (Culture) ही बाह्य वेश, खाद्यपदार्थ वगैरे गोष्टींवर अवलंबून नसून संस्कारांवर अवलंबून असते. संस्कृती म्हणजे मूल्यांचे पालन करणे आहे, याबद्दल सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या १९ फेब्रुवारी २०१५ रोजीच्या प्रवचनात सांगितले, जे आपण या व्हिडियोत पाहू शकता. ॥

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श्रीत्रिविक्रमके ‘त्रातारं इन्द्रं अवितारं इंद्रं..’ इस महत्वपूर्ण मन्त्र का अर्थ ( The Meaning of Important mantra of shree Trivikram – ‘Trataram Indram Avitaram Indram …’ ) परम पूज्य सद्‌गुरु श्री अनिरुद्ध बापु ने गुरूवार ६ मार्च २०१४ के हिंदी प्रवचन में श्रीत्रिविक्रमके ‘त्रातारं इन्द्रं अवितारं इंद्रं…..’ इस महत्वपूर्ण मन्त्र का अर्थ स्पष्ट किया है। वह आप इस व्हिडियो में देख सकते हैं। ॥ हरि ॐ ॥ ॥ श्रीराम ॥ ॥

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श्रीत्रिविक्रमाच्या त्रातारं इंद्रं अवितारं इंद्रं …’ ह्या महत्वपूर्ण मन्त्राचा अर्थ ( The Meaning of Important mantra of shree Trivikram – ‘Trataram Indram Avitaram Indram …’ ) सर्व समर्थ असणार्‍या आणि आमची हर तर्‍हेने काळजी घेणार्‍या श्री त्रिविक्रमाचे आवाहन या मंत्राद्वारे केले गेले आहे. सद्‍गुरु तत्वात्वर विश्वास असणार्‍याचे हित करणार्‍या त्रिविक्रमाच्या केवळ असण्यानेच आमचे जीवन आनंदमय होणार आहे आणि आम्हाला सर्व प्रकारच्या भय, क्लेश व अनुचितता यांपासून मुक्ति मिळणार आहे. अशा

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श्रीसूक्तावरील प्रवचनासंबंधीची सूचना (Announcement Regarding The Discourses On Shree-Suktam) श्रीहरिगुरुग्राम येथे गुरुवार दिनांक १२ मार्च २०१५ रोजी ‘श्रीश्वासम्’बद्द्ल सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध म्हणजेच बापू स्वत: माहिती देणार आहेत. त्याचबरोबर त्यापुढील गुरुवारपासून बापू ‘श्रीसूक्ता’वर (Shree-Suktam) बोलण्यास सुरुवात करणार आहेत हेदेखील बापुंनी सांगितले. श्रीसूक्तात पवित्र, शुभ, मंगल असे सर्व काही आहेत. श्रीसूक्ताचा महिमा सांगून श्रीसूक्तावरील प्रवचनासंबंधीची सूचना सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या २६ फेब्रुवारी २०१५ रोजीच्या प्रवचनात दिली, जे आपण या व्हिडियोत पाहू शकता. ॥

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‘श्रीश्वासम्’विषयक प्रवचनासंबंधीची सूचना – भाग २ ( Announcement Regarding Discourse On ShreeShwaasam – Part 2 ) ‘श्रीश्वासम्’ या उत्सवाची सर्वच श्रद्धावान उत्सुकतेने वाट पाहत आहेत. गुरुवार दिनांक १२ मार्च २०१५ रोजी श्रीहरिगुरुग्राम येथे या उत्सवाबद्दलची माहिती सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध म्हणजेच बापू स्वत: देणार आहेत. हा उत्सव ही जीवनातील सर्वोच्च भेट मी तुम्हाला देत आहे, असे बापुंनी या वेळी सांगितले. ‘श्रीश्वासम्’ची माहिती देणार्‍या या विशेष प्रवचनाबद्दलची सूचना सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या २६