compassion

Unconditional Compassion of Bapu (Aniruddhasinh) – In the course of his discourse he dwelt upon the subject of how the world that we are born in and grow up is referred to as Mrutyulok (the mortal world). What Bapu (Aniruddhasinh) spoke thereafter is something that we must treasure and hold close to our hearts for the rest of our lives. Bapu (Aniruddhasinh) went on to say that starting today, there will be nothing such as death for the Shraddhavaan. Every Shraddhavaan will only be born, alternating between the two worlds, Mrutyulok andBhargalok (the abode of Gods). This, he said, was the vardaan (boon) that his mother, Aadi Maata, Mahishasuramardini had granted him as soon as he started this Upasana on the first day of Adhik Maas; and with the granting of the boon, this Upasana concluded.

He said that henceforth for Shraddhavaans there will be no such thing as death. The Sadguru will hold the Shraddhavaans by their fingers and escort them upto the entry gates of Mrutyulokand when the ‘learning’ there is over, He will return to take each Shraddhavaan back to where he came from i.e. Bhargalok. This he likened to a mother dropping her child to school and then, at the end of the day, coming back to take the child home.

मॉं दुर्गा ! करुणा का विस्तार करो (Mother Durga! Expand Your Compassion) - Aniruddha Bapu‬ Hindi‬ Discourse 01 Jan 2015

मॉं दुर्गा! करुणा का विस्तार करो (Mother Durga! Expand Your Compassion) ‘दुर्गे दुर्घट भारी तुजवीण संसारी, अनाथनाथे अंबे करुणा विस्तारी’ इस मॉं दुर्गाकी आरती में माता दुर्गा पर सर्वप्रथम विश्वास प्रकट करके फिर दुर्गामाता(मॉं दुर्गा) से प्रार्थना की है कि हे मॉं, मैं जहां भी हूं वहां तक तुम अपनी करुणा का विस्तार करो; मैं अक्षम हूं परंतु तुम अपनी करुणा का विस्तार करने में संपूर्ण समर्थ हो। श्री आदिशंकराचार्यजी

Durga

  दुर्गे दुर्घट भारी तुजविण संसारी । अनाथनाथे अंबे करुणा विस्तारी ॥ वारी वारी जन्ममरणांतें वारी । हारी पडलो आता संकट निवारी ॥ 1 ॥ जय देवी जय देवी महिषासुरमर्दिनी । सुरवरईश्वरवरदे तारक संजीवनी ॥ धृ ॥ त्रिभुवनभुवनी पाहता तुजऐसी नाही । चारी श्रमले परंतु न बोलवे कांही ॥ साही विवाद करिता पडिले प्रवाही । ते तूं भक्तांलागी पावसि लवलाही॥ जय देवी… प्रसन्नवदने प्रसन्न होसी निजदासा । क्लेशांपासुनि सोडवी तोडी

परिपूर्णता यह भ्रम है (Perfection Is An Illusion) - Aniruddha Bapu‬ Hindi‬ Discourse 25 Dec 2014

परिपूर्णता यह भ्रम है (Perfection Is An Illusion) यदि किसी अपने के साथ झगडा होता है, तब भी ‘वह मेरा अपना है’ इस बात को भूलना नहीं चाहिए। खून का रिश्ता हो या मन का, हर रिश्ते की बुनियाद प्यार की होनी चाहिए। परिवार के दो सदस्यों के बीच मतभेद हो भी जाते हैं, तब भी वे एकदूसरे के शत्रु नहीं बन जाते। इस वर्ष हमें प्रेम बढाते समय इस

करुणा इस शब्द का अर्थ (Meaning Of Compassion) - Aniruddha Bapu‬ Hindi‬ Discourse 25 Dec 2014

करुणा इस शब्द का अर्थ (Meaning Of Compassion) करुणा इस शब्द का अर्थ है, बिना किसी शर्त के प्रेम करना और करुणा यानी कंपॅशन यही सबसे बडी ताकत होती है। करुणा के बिना किसी के लिए कुछ करते समय उसमें उपकार की भावना रहती है। लेकिन करुणा के साथ मानव जो कुछ करता है वह केवल प्रेम के कारण करता है। करुणा (कंपॅशन) इस शब्द के अर्थ के बारे में

Mother Durga! Expand Your Compassion, अनाथनाथे अंबे! करुणा विस्तारी, आदिमाता, ‘दुर्गे दुर्घट भारी, आरतीचा अर्थ, ‘हे माय दुर्गे, सर्वसमर्थ, साद, आई, अनाथनाथे अंबे, करुणा, जख्म, संसारी, वाईट, कठिण, लाडका, लांब, सर्वश्रेष्ठ, वारी, जय जय देवी महिषासुरमर्दिनी, चण्डिका, Durga, fear, Sansar, Aadimata, karuna, Aai, mother, Ambe, bestest, feel, swarga-Narak, स्वर्ग-नरक, हृदय, भावार्थ, Aarti, त्रिभुवन, वाद, प्रवाह, भक्त, प्रसन्न, वदन, त्रिविक्रम, नरहरी, पंकज, सुंदर, बोलणे, शास्त्र, चर्चा, पावणे, वेद, ज्ञान, अधःपतन, चेहरा, दास, सेवा, संजीवनी, श्रम, विवाद, seva, shastra, bhakta, god, lord, ved, knowledge, लवलाही, devi, parmatma, happy, trivikram, bhakti,

अनाथनाथे अंबे! करुणा विस्तारी – भाग २ (Mother Durga! Expand Your Compassion – Part 2) आदिमाता चण्डिकेची ‘दुर्गे दुर्घट भारी….’ या आरतीला श्रद्धावानांच्या हृदयात अनन्यस्थान आहे. या आरतीचा अर्थ सांगताना बापुंनी यातील अनेक भक्तिमय उलगडून दाखवले. ‘हे माय दुर्गे! माझ्यासाठी तुझी करुणा विस्तार कारण तू सर्वसमर्थ आहेसच’, अशी साद मोठ्या आईला या आरतीत घातली आहे. दुर्गे दुर्घट भारी या आरतीच्या ओळींबद्द्ल सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या ०१ जानेवारी २०१५ रोजीच्या प्रवचनात सांगितले,

भक्त भगवान से जुडा हुआ होता है। (The Devotee is constantly connected with The God) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 24 July 2014

मानव को यह श्रद्धा रखनी चाहिए कि मैं भगवान से जुडा हुआ हूँ और भगवान दयालु एवं क्षमाशील हैं, वे मुझे सजा देने के लिए नहीं, बल्कि प्रेम से मेरा उद्धार करने आये हैं । भगवान से क्षमा अवश्य माँगिए, परंतु भगवान ने मेरा साथ छोड दिया है, ऐसा कभी भी मत मानना । भगवान से मुझे अन्य कोई भी अलग नहीं कर सकता, इस श्रद्धा के महत्त्व के बारे

‘न्हाऊ तुझिया प्रेमे प्रतिक्रिया – प्रकाशसिंह गजनीकर   ‘न्हाऊ तुझिया प्रेमे प्रतिक्रिया – प्रकाशसिंह गजनीकर  

Nahu Tujhiya Preme Satsang

Aniketsinh Khedekar हरि ओम दादा, कालचा न्हाऊ तुझिया प्रेमे हा कार्यक्रम खूपच सुंदर झाला, “सुंदर” हा शब्द देखील अपुरा पडेल इतका तो अप्रतिम होतो . खरच दादा “Hatsoff” तुमच्या आणि सगळे गायक व वादक मंडळींच्या मेहनतीचे आणि विशेष कौतक ते IT core team चे . ह्या प्रेमसागरात आम्ही सर्व न्हाऊन निघालो अशी आंघोळ जी ह्या पूर्वी कधीच केली न्हवती ती ह्या सदगुरू रायाने घडवली काल खऱ्या अर्थाने मी शुद्ध झालो

I have received numerous heart-filling responses from my fellow Shraddhavan friends on ‘the Premyatra – Nahu Tujhiya Preme’. Nahu Tujhiya Preme has indeed turned out to be the exact spurt that was needed for blossoming of faith, love and devotion that we already have for our Bapu, our Sadguru in hearts and minds of each one of us. I am herewith enclosing some of the most touching and intense feedbacks

Nahu Tujhiya Preme Satsang

न्हाऊ तुझिया प्रेमे लोगो “न्हाऊ तुझिया प्रेमे’ (Nahu tuzhiya preme )ह्या सत्संगाला मिळणारा उदंड व वाढता प्रतिसाद लक्षात घेता, तसेच पद्मश्री डॉ. डी. वाय. पाटील स्टेडियमची आसनव्यवस्था बघता प्रत्येक श्रद्धावान भक्ताला, त्याने ह्या स्टेडियमला असलेल्या ११ वेगवेगळ्या प्रवेशगेटपैकी नक्की कोणत्या प्रवेशगेटने आत प्रवेश करायचा आहे, हे प्रवेशिका (एन्ट्री पास) घेतानाच कळवणे अत्यंत गरजेचे झाले आहे. त्यासाठी प्रत्येक प्रवेशिकेवर (एन्ट्री पास) प्रवेश गेट छापणे आवश्‍यक आहे.   हा प्रतिसाद लक्षात घेता

Unique compassion of Aniruddha Bapu हरि ॐ बापू करितो अमुची सेवा । आद्यपिपादादांच्या अभंगातील या ओवीची खरी अनुभूती मिळते ती कोल्हापूर मेडिकल कॅम्पमध्ये. २६, २७, २८ जानेवारी २०१३ या तीन दिवसात कोल्हापूर मेडिकल कॅम्प संपन्न झाला. खरं तर गेली ८ वर्षे हा कॅम्प होत आहे. परंतु प्रत्येक कॅम्पमध्ये नाविन्य आहेच. लाभार्थींची वाढती संख्या, तिकडच्या लोकांमध्ये होणारे बदल आणि सुधारणा नियोजनपध्दतींमध्ये दरवर्षी होणारी सुधारणा ह्यामूळे या कॅम्पचा प्रगतीचा आलेख सर्व बाजूंनी

Bapu at Shree Harigurugram

Unconditional Compassion of Bapu (Aniruddhasinh) Yesterday, Bapu (Aniruddhasinh) came to Shri Harigurugram after a gap of two Thursdays. As we all know Bapu (Aniruddhasinh) is in the midst of his Upasana which commenced on the first day of the holy month of Shraavan (Shraavan Shuddha Pratipada) and which would conclude on the day of Dassera. In the course of his discourse he dwelt upon the subject of how the world that we are born