Aniruddha Gurukshetram

‘Shree Aniruddha Gurukshetram’, the place of the gurus of Sadguru Aniruddha, was unveiled by Sadguru Aniruddha Bapu himself on September 3, 2007, on the auspicious occasion of Gokulashtami.

At the centre of the place is installed the most captivating picture of Shree Dattaguru. This ‘tasbir’ is the enlarged version of the very image that Param Poojya Bapu prays to since the age of eight till today. The uniqueness of the picture can be understood and appreciated when one actually makes a pilgrimage to the Shree Aniruddha Gurukshetram.

On either side of the beautiful tasbir of Dattaguru are two ‘Gaumukh’. The arrangement is in place for bhaktas to make an offering of ‘Prasadam’ to the two ‘Gaumukh’. The prasadam to be offered is available only at Shree Aniruddha Gurukshetram and is different each day.

On the right of Shree Dattaguru is Aadimata Anasuya Mata and left is Aadimata Mothiaai Mahishasurmardini. Bhaktas believe that it is not her idol, but She Herself is present here.

Facing the tasbir of Lord Dattaguru is the ‘Dharmasan’, the seat of Param Poojya Bapu. The Dharmasan also hosts the Trivikram Linga which is worshipped by bhaktas. Shodasgandha is available for bhaktas to apply to (gandharchan) the Dharmasan.

The centre also has the ‘Shreemad Purushartha Purushottam Yantra’. This Yantra is the abode of the ‘Panchagurus’ of Param Poojya Bapu namely, Dattaguru, Gayatrimata, Shree Ram, Shree Hanumanta and Shree Sainath. This Yantra is the only one of its kind. Param Poojya Bapu has got this Yantra sanctified and activated through Param Poojya Samir Dada and Aadya Pipa, Shri Suresh Dattopadhye. Opposite the Yantra is Shree Mahadurgeshwar or the Aadipita.

Outside the centre place are kept the Charanmudra (impressions of the lotus feet) of Param Poojya Sadguru for darshan. Bhaktas can offer the Tripurari Trivikram garlands to the Charanmudras of Param Poojya Sadguru.

Also, in the precincts is a large tank filled with Udi, which is blessed by Param Poojya Bapu. The Udi is available all times for the bhaktas.

On either side of the entrance to Shree Aniruddha Gurukshetram are installed the ‘Nishaan’ (flags hoisted having Vedic symbols).

Next to the centre, are the idols of Mata Shivagangagauri, Shree Kiratrudra, Shree Mulark Ganpati and a picture of Chandika Kul.

Bhaktas will be able to get complete information of Shree Aniruddha Gurukshetram only upon visiting personally.

आश्विन नवरात्रि उत्सव (अशुभनाशिनी नवरात्रि उत्सव) के संदर्भ में सूचना

हरि ॐ, कोरोना वायरस, “कोविद – १९” की व्यापकता का अंदाज़ा सभी श्रद्धावानों को है ही। आज के इस दौर में श्रीअनिरुद्ध गुरुक्षेत्रम्‌ बंद होकर, आनेवाली आश्विन नवरात्रि में भी वह बंद ही रहेगा और नवरात्रि का कोई भी कार्यक्रम गुरुक्षेत्रम्‌ में नहीं होगा, इसपर कृपया सभी श्रद्धावान ग़ौर करें। इस पृष्ठभूमि पर, सद्‍गुरु बापुजी के कहेनुसार, श्रद्धावान इस साल आश्विन नवरात्रि उत्सव (अशुभनाशिनी नवरात्रि उत्सव) में “अंबज्ञ इष्टिका पूजन”

श्रीअनिरुद्ध गुरुक्षेत्रम्‌ मध्ये श्रीविष्णुसहस्रनाम स्तोत्र पाठ

गुरुवार, दि. ०४ फेब्रुवारी २०१६ ते शनिवार, दि. ०६ फेब्रुवारी २०१६ ह्या दरम्यान श्रीअनिरुद्ध गुरुक्षेत्रम्‌ मध्ये श्रीविष्णुसहस्रनाम स्तोत्र पाठ संपन्न झाला. ह्या उत्सवामध्ये २३ पुरोहितांच्या उपस्थितीत श्रीविष्णुसहस्रनाम स्तोत्र पाठ होत असताना, पूजन स्थळी शाळीग्रामावर अनुक्रमे पहिल्या दिवशी ऊसाच्या रसाने, दुसर्‍या दिवशी मधाने व तिसर्‍या दिवशी नारळ पाण्याने अखंड अभिषेक करण्यात आला. त्याचप्रमाणे ह्या प्रत्येक दिवसाच्या पाठाची सांगताना होताना, शेवटच्या आवर्तनाच्या वेळेस, पहिल्या दिवशी तुळशीपत्राने, दुसर्‍या दिवशी गुलाब पुष्पांनी व तिसर्‍या

श्री अनिरुध्द गुरूक्षेत्रम्‌ में हुआ श्री सुंदरकांड पठण

जैसा कि बापू ने प्रवचनों के द्वारा बार बार बताया है, विश्व की अत्यधिक सुंदर चीज़ है ‘सुंदरकांड’! ऐसे इस सुंदरकांड का पठण श्रीअनिरुद्ध गुरुक्षेत्रम्‌ में दि. १० जनवरी से लेकर दि. १८ जनवरी, इस कालावधि में बहुत ही हर्षोल्लास के साथ प्रसन्न वातावरण में संपन्न हुआ। इन ९ दिनों में २४ पुरोहितों के द्वारा अलग अलग धुनों में किये गए इस पठण का आस्वाद कई श्रद्धावानों ने लिया। संपूर्ण

परमपूज्य सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापू के घर संपन्न हुआ श्री सप्तमातृका-पूजन

मंगलवार, दि. ८ दिसंबर २०१५ को परमपूज्य सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापू के घर के श्री सप्तमातृकापूजन संपन्न हुआ। आपको यह शुभ समाचार देते हुए मैं बहुत ही आनन्दित हूँ कि बापू के घर नये मेहमान का आगमन हुआ है। आप सब को यह जानकर खुशी होगी कि सुचितदादा के बेटे स्वप्निलसिंह और बापू की बेटी शाकंभरीवीरा को पुत्रसंतान की प्राप्ति हुई है। ८ दिसंबर २०१५ को अस्पताल से नवजात शिशु

रुद्र को पुकार : बापूजी ने (अनिरुद्धसिंह) किया हुआ कविता पाठ (Poem recited by Aniruddha Bapu-Rudras Avahan)

सावन माँस की शिवरात्रि पूजा के दिन परमपूज्य बापूजी ने कहा कि, “कविश्रेष्ठ, श्री भा. रा. तांबेजी की श्री रुद्र पर बहुत अच्छी कविता हैं; वह कविता आज मिल जाये तो बहुत अच्छा होगा | यह सुनते ही सुचितदादा ने बापू को यह कविता इंटरनेट से डाऊनलोड करके दी | तत्पश्चात बापूजी ने हम सब को यह कविता पढ़कर सुनाई और मुझे इसे मोबाइल पर रिकॉर्ड करने का मौका मिला