Aniruddha Bapu

‘I am one among you. A simple common being’, says Sadguru Shree Aniruddha Bapu but that in fact is His uniqueness. A family person Himself, He connects with us common persons as a ‘friend’ – a friend who loves unconditional, a friend who wants to see us happy. And yet for millions this ‘friend’ for life is a father, a mother – in fact all of these always – He is their Sadguru. He is their guide, who walks the path to show the way.

Rheumatologist of repute Dr. Aniruddha Dhairyadhar Joshi MD (med) also known as Sadguru Shree Aniruddha Bapu states in no uncertain terms that He is not an avataar, not of anybody. He was Aniruddha and Aniruddha He will always be. Shunning miracles as jugglery, He relates to all those who have faith in the divine principles as their server. He has love and nothing but love to give to the world.

His discourses that began way back in 1996, centre around sacred works like the Vishnusahasranaam, the Radhasahasranaam, the Ramraksha, the Shree Saisachcharit but reveal to us, how these relate to life even today, how the principle contained can be implemented, how they strengthen bhakti and how they bring closer to God.

Bhakti and seva (devotional services) are sides of one and the same coin. The various seva projects undertaken by the organization that functions on His inspiration and principles weave in both these values along with the well-being of man as a component of society.

you-make-impossible-possible

  Experience Of Kumaran   An ordinary Shraddhavan who dream of getting a job in an organization. Such a simple aim! However, the situation was entirely against him. He had no experience for the type of work he would be expected to do, for the role that he had applied. Moreover, his previous experience was utterly irrelevant for the new job. The other candidates who had come for the interview

स्वयंभगवान त्रिविक्रम के अठारह वचन

कल गुरुवार २ अगस्त २०१८ के दिन श्रीहरिगुरुग्राम में बापू ने, अत्यधिक महत्त्वपूर्ण ‘स्वयंभगवान त्रिविक्रम के अठारह वचनों’ के बारे में बताया। हम इन वचनों का लाभ गुरुवार १६/०८/२०१८ को बापू के साथ ले पायेंगे। इसी के साथ बापू ने ‘स्वयंभगवान त्रिविक्रम’ का गजर शारण्य तथा आनंद भाव से कैसे करना है इसके बारे मे भी बताया है। इसकी वीड़ियो क्लिप मैं blog तथा WhatsApp और YouTube पर अपलोड़ कर

सद्गुरु गायत्री मन्त्र के एक शब्द में किया गया बदलाव

श्रद्धावानों की सुविधा के लिए, साथ की ऊपरोक्त सूचना में उल्लेखित बदलाव किये गये सद्गुरु गायत्री मन्त्र का ५ बार पाठ की गयी ऑडिओ फाइल यहॉ पर दे रहा हूँ। – समीरसिंह दत्तोपाध्ये १५ जून २०१८

स्वयंभगवान त्रिविक्रम

आज गुरुवार दि. २६-०४-२०१८ रोजी प्रकाशित झालेल्या ‘दैनिक प्रत्यक्ष’मधील ‘तुलसीपत्र-१४८६’ ह्या अग्रलेखामध्ये, ‘स्वयंभगवान त्रिविक्रम’ प्रथमच प्रकट झाल्याचे वर्णन केले गेले आहे, तेच हे ‘महासाकेत’ ह्या सर्वोच्च स्थानावर स्थित ‘स्वयंभगवान त्रिविक्रमा’चे स्वरूप. आज गुरुवार दि. २६-०४-२०१८ को ‘दैनिक प्रत्यक्ष’ में प्रकाशित हुए ‘तुलसीपत्र-१४८६’ इस अग्रलेख में, ‘स्वयंभगवान त्रिविक्रम’ के पहली ही बार प्रकट होने का वर्णन किया गया है। यही वह ‘महासाकेत’ इस सर्वोच्च स्थान पर स्थित ‘स्वयंभगवान त्रिविक्रम’ का स्वरूप।

Aniruddha Bapu

 Dr. Rajiv Karnik It was the evening of the 8th of October 2005. I was thrusting a lot of my belongings in a bag as I was preparing to go to the Cleveland Clinic, America for a training course of 2 months duration. Meanwhile, my wife, Mrs. Priya, came along with a photograph of her deity (Yes, I was considering HIM as only her deity then) and said to me, “Rajeev,

Aniruddha Bapu - पंचमुखहनुमत्कवचम्

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ०९ मार्च २०१७ के पितृवचनम् में ‘पंचमुखहनुमत्कवचम्’ के बारे में बताया। सो, इसलिये ये हमें दिशादर्शन करने के लिये, सही रास्ते में, हमें रास्ते में प्रवास के लिये जो भी आवश्यक है, यानी पंचमुखहनुमत्कवच हो या और कोई कवच हो या कोई स्तोत्र हो, मान लो स्तोत्र हो, तो उस प्रवास के लिये आवश्यक जो भी चाहिये वो हमें पूरा करने के लिये कौन

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 14 Jan 2016 about, 'Panchamukha-Hanumat-kavacham Explanation’.

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ०९ मार्च २०१७ के पितृवचनम् में ‘पंचमुखहनुमत्कवचम् विवेचन’ के बारे में बताया। ये पंचमुखहनुमत्कवचम्, जो मैने कहने के लिये, पठन करने के लिये इस साल के लिये बोला है, जिसके बारे में हम लोगों ने अग्रलेखों में भी बहुत कुछ पढा। आज से हम इस कवच का अर्थ जानने की कोशिश करेंगे। लेकिन बहुत ही संक्षिप्त में। बहुत मैं विस्तार में जाऊंगा तो शायद

Shivapanchakshari Stotra_Aniruddha Bapu

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ०२ मार्च जनवरी २०१७ के पितृवचनम् में शिवपंचाक्षरी स्तोत्र यह ‘ॐ नमः शिवाय’ इस मंत्र का ही स्पष्टीकरण है’, इस बारे में बताया। ये शिवपंचाक्षरी स्तोत्र क्या करता है, ‘ॐ नमः शिवाय’ इस मंत्र का ही explanation देता है, स्पष्टीकरण करता है। हमें जानना चाहिये कि ये हमें ये तत्व भी सिखाता है कि भाई, प्रार्थना करनी है तो कैसी कि भगवान ही सब

Shivapanchakshari Stotra_Aniruddha Bapu

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ०२ मार्च २०१७ के पितृवचनम् में ‘भय का निर्मूलन करने के लिए शिवपंचाक्षरी स्तोत्र यह बहुत ही प्रभावी स्तोत्र है’, इस बारे में बताया।   भय निर्मूलन के लिये शिवपंचाक्षरी स्तोत्र सबसे श्रेष्ठ माना जाता है, इतना छोटा होके भी। किसी भी तरीके का भय। अगर हमारे मन में भय उत्पन्न होता है, तो क्या बापू हम इस स्तोत्र का पठन कर सकते है?

Shivapanchakshari Stotra

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ०२ मार्च २०१७ के पितृवचनम् में ‘शिवपंचाक्षरी स्तोत्र’ के बारे में बताया। तो हम लोग ये जानते हैं, पंचाक्षरी मंत्र, ॐ नमः शिवाय, इसमें बहुत सारी ताकद है, भारत में सबसे ज्यादा मंदिर किसके हैं, तो शिवजी के हैं और हनुमानजी के हैं। हनुमानजी तो बहुत जगह, शिवजी के ही साक्षात अवतार माने जाते हैं, उनकी पूँछ जो है वो उमाजी का रूप मानी

श्रीचण्डिका एक्झाल्टेशन आर्मी के प्रशिक्षण की नई बॅच

हरि ॐ. गुरुवार, दि. १७ मार्च २०१७ को सद्‍गुरु अनिरुद्ध बापू ने पितृवचन के बाद एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण सूचना की। इस सूचना में, ‘रामराज्य’ संकल्पना का एक अंग रहनेवाली ‘श्रीचण्डिका एक्झाल्टेशन आर्मी’ के प्रशिक्षण वर्ग की दूसरी बॅच जल्द ही शुरू की जायेगी, ऐसा बापू ने घोषित किया। अगले गुरुवार, यानी दि. २३ मार्च २०१७ को, इस प्रशिक्षण वर्ग के प्रवेश के लिए आवश्यक फॉर्म्स, श्रीहरिगुरुग्राम में एक काउंटर पर

भारतवर्ष_aniruddha bapu_Bharatwarsha

Dr. Aniruddha D. Joshi’s (Aniruddha Bapu) appeal from today’s Dainik Pratyaksha I have no interest whatsoever in any political party or even in any political activity in the country i.e India. Not at all! From politicians I do not want to take anything and as for giving, I have nothing to give them either. However, I have an ardent and enormous interest in the wellbeing and an equally profound concern

नये युग का स्वीकार बडे प्यार से करो (Accept the new era with love) - Aniruddha Bapu

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने 31 मार्च २०१६ के पितृवचनम् में ‘नये युग का स्वीकार बडे प्यार से करो’ इस बारे में बताया। मृत्यु सिर्फ़ शरीर की ही नहीं बल्की कार्य की भी होती है, मृत्यु मन की भी होती है, भावना की भी होती है। मृत्यु रिश्ते की भी होती है। Husband & Wife जब divoce लेते हैं तो वो उस शादी की मृत्यु ही है। एक मॉ-बाप