श्रीमूलार्क गणेश

आज परमपूज्य बापूंनी श्रीअनिरुद्ध गुरुक्षेत्रम येथे श्रीमूलार्क  गणपतीचा:
ॐ गं गणपते श्रीमूलार्कगणपते वरवरद श्रीआधारगणेशाय नमः सर्वविघ्नान्‌ नाशय सर्वसिद्धिं कुरु कुरु स्वाहा ।
हा जप दिला.
उपस्थित असलेल्या सर्व श्रद्धावान बापूभक्तांनी हा जप परमपूज्य बापूंबरोबर नंदाई व सुचितदादांच्या उपस्थितीत केला. ह्या वेळेस परमपूज्य बापूंनी ह्या श्रीगणेशाचे नामकरण “श्री मूलार्क गणेश” असे केले.
श्रीमांदार गणेश अत्यंत सिद्ध एवं स्वयंभू गणेशजी का स्वरूप है | इसे श्रीमांदार गणेश या श्रीमूलार्क गणेश या  श्रीश्वेतार्क गणेश भी कहा जाता है | ऐसे श्रीमांदार गणेशजी के स्वागत के लिए / स्थापना के लिए जरुरी वेदोक्त विधियां साम्प्रत श्रीअनिरुद्ध गुरुक्षेत्रम्‌ में हो रही हैं | आम तौर पर मार्केट में / अन्यत्र इसके स्वरूप जैसी कई मूर्तियाँ दिखाई देती हैं; पर वे बनाई हुई या नक्काशी हुई होती हैं | प्राकृतिक / कुदरती स्थिति में सिद्ध एवं स्वयंभू स्वरूप का श्रीमूलार्क गणेश बहुत ही दुर्लभ बात है |
मांदार के पेड़ की कई प्रजातियाँ हैं | उनमें से कुछ हैं नील मांदार, श्वेत मांदार | नील मांदार सर्वत्र उपलब्ध होता है और श्रीगणेशजी की पूजा में तथा शनिवार को श्रीहनुमानजी की पूजा में इसका उपयोग किया जाता है | श्वेत मांदार अर्थात मांदार का पेड़ सिद्ध स्थान पर ही दिखाई देता है और इसका उपयोग बहुत ही पवित्र पूजाओं में किया जाता है | शिवजी को इस श्वेत मांदार के फूल बहुत प्रिय हैं | मांदार के पेड़ को नील मांदार या श्वेत मांदार उसके फूलों के अनुसार संबोधित किया जाता है |
ऐसे श्वेत मांदार के पेड़ की जड़ों में श्रीमांदार गणेशजी की प्राप्ति होती है | सामान्यतः २१ से २५ साल की आयु के पेड़ की जड़ों में परिपूर्ण स्वरूप में गणेशजी का स्वरूप दिखाई देने लगता है | जिस पेड़ की जड़ों में ऐसे श्रीमांदार गणेशजी होते हैं वह पेड़नित्य तेजोमय और पुष्पयुक्त होता है अर्थात उसका स्वरूप अत्यंत विशेषतापूर्ण होता है |
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ll Hari Om ll Today, on the occasion of the Shivaratri, the poojan was offered to Shree Mahadurgeshwar. It was the very first time that the along with the Mahadurgeshvar, the 12 Baanlinga, i.e. the representations of the 12 Jyotirlinga too were offered the poojan. Here are some pictures:. Pravinsinh Wagh Offers the Poojan  Guruji Offers the poojan  Shree Mahadurgeshwar and 12 Baanlinga that represent the 12 Jyotirlinga Guruji offers the poojan 

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ll हरि ॐ ll श्रीमहादुर्गेश्‍वराचे पूजन आज शिवरात्री निमित्‍त श्री अनिरुध्द गुरुक्षेत्रम्‌ येथे श्रीमहादुर्गेश्‍वराचे पूजन झाले. ह्या शिवरात्रीस प्रथमच श्रीमहादुर्गेश्‍वराबरोबर १२ ज्योतिर्लिंगांचे प्रतिनिधीत्‍व करणारी १२ श्रीबाणलिंगाचे पूजन देखील झाले. त्याचे फोटो पुढील प्रमाणे. पूजन करताना प्रविणसिंह वाघ पूजन करताना गुरुजी   श्रीमहादुर्गेश्‍वर व १२ ज्योतिर्लिंगांचे प्रतिनिधीत्‍व करणारी १२ श्रीबाणलिंग   पूजन करताना गुरुजी

Shree Moolarka Ganesh, श्रीमूलार्क गणेश

ll हरि ॐ ll कल पोस्ट में लिखे अनुसार आज बापूजी ने अधिक मॉस की अंगारक संकष्ट चतुर्थी के दिन दिव्य, सिध्द एवं स्वयंभू श्रीमूलार्क गणेश जी की श्रीअनिरुध्द गुरुक्षेत्रम्‌ में स्थापना की |   आज पासून नित्य दर्शनाच्या वेळेमध्ये प्रत्येक श्रध्दावान  या गणेशाचे दर्शन घेऊ शकेल. ॐ गं गणपते श्रीमूलार्कगणपते वरवरद श्रीआधारगणेशाय नमः सर्वविघ्नान्‌ नाशय सर्वसिद्धिं कुरु कुरु स्वाहा ।। काल बापूंनी दिलेला हा जप प्रत्येक श्रध्दावान करु शकतो.

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शुक्रवार दिनांक ३१ अगस्त २०१२ के रोज़ रात के ८.४५ बजे बापूजी (अनिरुद्धसिंह) का श्रीअनिरुद्धगुरुक्षेत्रम् में आगमन हुआ | उनहोंने अपने साथ कुल १२ ज्योतिर्लिंगों का प्रतिनिधित्व करनेवाले, संगमरमर के १२ श्रीबानलिंग लाये और उनहोंने वे एक थाली में रखे | तत्पश्चात उनहोंने वह थाली धर्मासन पर रखी | इन बारह श्रीबनलिंगों में से एक बनलिंग का आकर बड़ा एवं भिन्न रंग था और जैसी निशानी श्रीमाहादुर्गेश्वर की है वैसी ही निशानी

Shree Moolarka Ganesh, श्रीमूलार्क गणेश

आज बापूंनी (अनिरूद्धासिंह) श्रीमूलार्कगणेशाला स्वत: उपरणे अर्पण करुन पूजन केले. बापूंनी अर्पण केलेल्या  उपरण्यासहित श्रीमूलार्कगणेशाचे फोटो या पोस्ट बरोबर देत आहे.

Shree Moolarka Ganesh, श्रीमूलार्क गणेश

॥ हरि ॐ ॥ “श्री मूलार्क गणेश” ( Shree Moolarka Ganesh )   आज परमपूज्य बापूंनी श्रीअनिरुद्ध गुरुक्षेत्रम येथे श्रीमूलार्क  Shree Moolarka Ganesh गणपतीचा:    ॐ गं गणपते श्रीमूलार्कगणपते वरवरद श्रीआधारगणेशाय नमः सर्वविघ्नान्‌ नाशय सर्वसिद्धिं कुरु कुरु स्वाहा ।। हा जप दिला. उपस्थित असलेल्या सर्व श्रद्धावान बापूभक्तांनी हा जप परमपूज्य बापूंबरोबर नंदाई व सुचितदादांच्या उपस्थितीत केला. ह्या वेळेस परमपूज्य बापूंनी ह्या श्रीगणेशाचे नामकरण “श्री मूलार्क गणेश” असे केले. आपण सर्वजण

Shree Moolarka Ganesh, श्रीमूलार्क गणेश

श्रीमांदार गणेश जी का स्वागत Welcoming Mandar Ganesh)   श्रीमांदार गणेश अत्यंत सिद्ध एवं स्वयंभू गणेशजी का स्वरूप है | इसे श्रीमांदार गणेश या श्रीमूलार्क गणेश या  श्रीश्वेतार्क गणेश भी कहा जाता है | ऐसे श्रीमांदार गणेशजी के स्वागत के लिए / स्थापना के लिए जरुरी वेदोक्त विधियां साम्प्रत श्रीअनिरुद्ध गुरुक्षेत्रम्‌ में हो रही हैं | आम तौर पर मार्केट में / अन्यत्र इसके स्वरूप जैसी कई मूर्तियाँ दिखाई देती हैं;