विश्वास

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भाव इस शब्द में समग्रता है (There Is A Wholeness In The Word ‘Bhaav’) मानव के भीतर रहने वाले ‘मन, बुद्धि, चित्त और अहंकार’ ये चारों मिलकर किसी व्यक्ति, वस्तु या घटना के प्रति उठने वाले प्रतिसाद, भावना आदि को मिलाकर जो सहज स्पन्द उत्पन्न होता है, उसे भाव कहते हैं। भाव इस शब्द में समग्रता है, इस बारे में परम पूज्य सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने १६ अक्टूबर

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मंगलचण्डिकाप्रपत्तीचे महत्त्व (Importance Of Shree Mangal-Chandika-Prapatti) सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापुंनी ०८-०१-२०१५ रोजीच्या आपल्या प्रवचनात श्रीमंगलचण्डिकाप्रपत्तीसंदर्भात मार्गदर्शन केले. या वेळी बोलताना बापू म्हणाले की प्रपत्ती करताना ते कर्मकाण्ड म्हणून करू नका, तर प्रेमाने करा. शिस्तपालन आवश्यक आहे, पण भाव हा सर्वांत महत्त्वाचा आहे, हे विसरता कामा नये. स्त्रियांच्या द्वारे मकरसंक्रान्तीच्या पर्वावर केल्या जाणार्‍या या श्रीमंगलचण्डिकाप्रपत्तीचे महत्त्वसुद्धा बापुंनी या वेळी सांगितले, जे आपण या व्हिडियोत पाहू शकता. ॥ हरि ॐ ॥ ॥

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क्रिया के पीछे का भाव अधिक महत्त्वपूर्ण होता है (The Bhaav Behind The Action Is More Important) स्कूल न जाने वाले बच्चे की मरम्मत करने वाली माँ की बच्चे को पीटने की वह क्रिया ऊपरी तौर पर अनुचित क्रिया लग सकती है, लेकिन उसके पीछे रहने वाला उसका हेतु और कारण बच्चे का भला करना यही है और इन सबके पीछे का भाव ‘अपने बच्चे का भला करना’ यह होने

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महज क्रिया पर से भाव को नहीं जाना जा सकता (Bhaav Can Not Be Judged Only By Action) अन्य किसी को रोता देखकर आने वाले आँसू यह एक प्रकार की अभिव्यक्ति है। लेकिन कोई रो रहा है, तो सिर्फ़ उसकी रोने की उस क्रिया को देखकर उसके भाव के बारे में कहा नहीं जा सकता। महज क्रिया पर से भाव को नहीं जाना जा सकता, बल्कि उस क्रिया के पीछे

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भाव का अभिनय नहीं किया जा सकता (Enactment Of Bhaav Can Not Be Done) हर एक मनुष्य के मन में रहने वाला भाव केवल वह संबंधित मनुष्य ही जानता है। सिर्फ़ तीन साल तक के बच्चे के मन का भाव उस बच्चे की माँ जान सकती है। भाव यह अन्त:करण से उठनेवाला तत्त्व है, भाव को बनाया नहीं जा सकता, भाव का अभिनय नहीं किया जा सकता, इस बारे में

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भाव की व्याख्या (Definition Of Bhaav) किसी भी वस्तु, घटना या व्यक्ति के प्रति मनुष्य के अन्त:करणचतुष्टय से उद्‍भवित होने वाला जो प्रतिसाद, विचार, स्पन्द होता है, उस वस्तु, घटना या व्यक्ति के प्रति मनुष्य जो महसूस करता है, उसे भाव कहते हैं। मनुष्य यह भी अनुभव करता है कि बुद्धि और मन का भाव प्राय: परस्परविरोधी होता है। भाव की व्याख्या (Definition Of Bhaav) के बारे में सद्गुरु श्री

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नव वर्ष २०१५ की शुभकामनाएँ (New Year 2015 Best Wishes) सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापु ने अपने सारे श्रद्धावान मित्रों को अपने ०१-०१-२०१५ के प्रवचन में नये वर्ष २०१५ की शुभकामनाएँ दीं। बापु ने सभी से ‘हॅपी न्यू इयर’(Happy New Year) कहते हुए सारे श्रद्धावानों को इस नये साल में पवित्र सामर्थ्य, यश और सुरक्षा मिलें, यह भी कहा। बापु के द्वारा अपने श्रद्धावान मित्रों को दी गयी शुभकामनाएँ आप इस

अपने जीवन को दूसरों के मत से आकार मत दीजिए ( Don't Shape Your Life By Others’ Opinions ) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 09 Oct 2014

अपने जीवन को दूसरों के मत से आकार मत दीजिए ( Don’t Shape Your Life By Others’ Opinions ) सज्जनों से, आप्तमित्रों से मार्गदर्शन अवश्य लें, लेकिन औरों की राय से स्वयं को मत ढालिए। मेरा जीवन मुझे अपने हिसाब से जीना चाहिए, अपने मत से उसे बनाना चाहिए, यह मानव ध्यान में रखें। अपनी जिंदगी को स्वयं ही आकार देना चाहिए, इस बारे में परम पूज्य सद्गुरु श्री अनिरुद्ध

दूसरों की राय से स्वयं के बारे में निर्णय मत कीजिए (Don't Judge Yourself By Others' Opinions) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 09 Oct 2014

दूसरों की राय से स्वयं के बारे में निर्णय मत कीजिए | Don’t Judge Yourself By Others’ Opinions अन्य लोगों से, उनकी राय से मानव को अपना जीवन नहीं बनाना चाहिए। दूसरों के साथ प्यार से पेश आना, परिजनों के प्रति रहने वालीं अपनी जिम्मेदारियॉं निभाना, आप्तमित्रों से राय लेना यह आवश्यक है, लेकिन स्वयं को दूसरों के हिसाब से ढालना यह मानव के लिए नुकसानदेह होता है। दूसरों की

नकारात्मक विचारों पर काबू रखें (Overcome Negative Thoughts) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 09 Oct 2014

नकारात्मक विचारों पर काबू रखें ( Overcome Negative Thoughts ) हमेशा अपना दुखडा रोते रहने से बच्चों पर भी इस बात का नकारात्मक परिणाम होता है। पॅरेंट्स के द्वारा किया जानेवाला नकारात्मक आचरण और उनकी नकारात्मक सोच बच्चों के मन पर बुरा परिणाम करते हैं। मानव स्वयं ही स्वयं का आधार बनकर जीवन में सकारात्मक सोच रखे, इस बारे में परम पूज्य सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने ०९ अक्टूबर