रामनाम

‘हरि ॐ’। ‘श्रीगुरुक्षेत्रम् मंत्र’ यह हम सब लोगों का, हमारे जीवात्मा का मंत्र है । ॐ मानव-जीवात्मा-उद्धारक श्रीरामचंद्राय नमः।’ ॐ मानव-प्राणरक्षक श्रीहनुमंताय नमः। हर एक श्रद्धावान के लिए अपने जीवन को सोने की तरह सुंदर बना लेने का सुनहरा अवसर है, यह मंत्र ! हम ‘ॐ मंत्राय नमः’ में श्रीगुरुक्षेत्रम् मंत्र के बारे में जानकारी प्राप्त कर रहे हैं । उसमें ‘ॐ रामनाम तनु श्रीअनिरुद्धाय नमः’ इस मंत्र में उच्चारित किए गए अनिरुद्ध यानी वे ‘त्रिविक्रम’ । उपनिषद् में जो त्रिविक्रम हैं, उन्हीं के नेतृत्व में उस संपूर्ण तीर्थयात्रा का आरंभ होता है । अठारह प्रभाव केंद्रों का आदर सत्कार करते हुए, वहाँ पर प्रणाम करके आदिमाता से मुलाकात कर (मिलकर) उनके शब्द (बोल) सुनकर उनके रूप को निहारकर उत्तम एवं मध्यम को ही नहीं, बल्कि विगत को भी, जिसने अनेक पाप किए हैं, गलतियाँ की हैं, उस विगत को भी ये त्रिविक्रम छोडते नहीं हैं। अर्थात उसे तीर्थयात्रा का कष्ट भी कम और पूरा का पूरा लाभ भी मिलता ही है । ऐसी हैं वे ‘आदिमाता’ और उनके ये ‘त्रिविक्रम’। एक ही समय में जो तीन कदम चलता है वह है ‘त्रिविक्रम’ । पिछली बार हमने देखा कि ये जो हैं, वे एक ही हैं । गणित में भी हमने देखा 1 x 1 = 1, 11 x 11 = 121, 111 x 111 = 12321, यह दाहिनी ओर का आकड़ा कितना भी बढते गया, फिर भी यहाँ बायीं ओर केवल एक ही है । यह केवल गुणाकार है, क्योंकि त्रिविक्रम कभी भी भागाकार नहीं करते, अ‍ॅडिशन नहीं करते, वे गुणाकार ही करते हैं । और इसीलिए उस आदिमाता की कृपा से वे एक ही (अकेले ही) सभी लोगों का भला करने वाले होते हैं । यह अद्भुतता है ‘1’ इस अंक की । वे अकेले ही विविध रूप तैयार करते हैं । कौन से व्हायब्रेशन्स, कौन से स्पंदन, कौन सी आकृति, कौन-सा रूप वे निर्माण नहीं कर सकते, ऐसा नहीं है…और वह भी केवल आँखों को दिखाई देनेवाले ही नहीं, बल्कि आँखों को न दिखाई देने वाले भी ।

उपनिषद् में हम कथा पढते हैं कि वह वृत्रासुर और उसकी माँ लोगों के लिए बुरे चित्र बनाते हुए घूमते रहते हैं, ओर उसमें बुरे रंग भरते रहते हैं । होता यह है कि आदिमाता की कृपा से, उनकी ढाल से, चामर में से वह रेशमी वस्त्र निकलकर अपना काम करता ही है । उस रेशमी वस्त्र को प्रदान करनेवाला, उस रेशमी वस्त्र की कथा कहनेवाला वह त्रिविक्रम यदि ‘एक’ ही है, तब भी एक के एकत्वपन से, एक ही गुणधर्म से वह विभिन्न रूपों में विविध रंगों से चित्र निर्माण करते रहता है । तुम्हारे प्रारब्ध की गलती के चित्र निर्माण हो चुके होते हैं, खराब चित्र तैयार हो चुके होते हैं । जो बुरे चित्र तैयार हो चुके होते हैं, जिनका रंग बिगड़ चुका होता है, जिनकी आकृति बिगड चुकी होती है, जिनका आकार बदल चुका होता है, वह सब कुछ बदलने के लिए; बिलकुल तुम्हारे प्रारब्ध में कुछ भी पुण्य नहीं हो, तब भी वह त्रिविक्रम सहायता करता है । उन चित्रों को सुधारने के लिए तुम्हें उत्साह देता है, प्रेरणा देता है । इतना ही नहीं, तो ज़रूरत पड़ने पर आदिमाता से कहकर उनमें रंग भी भरता है, उन चित्रों के आकार को भी सुधारता है । ये सब कुछ कर सकनेवाला यह त्रिविक्रम है । उसका ऋग्वेद में अनेक स्थानों पर वर्णन किया गया है । अनेक नामों से उसे संबोधित किया जाता है । ‘त्रिविक्रम’ स्तोत्र तो ऋग्वेद में बहुत ही प्रसिद्ध है । अधिकतर यज्ञों में उस स्तोत्र को कहा जाता है । उसके बिना यज्ञ संपन्न नहीं होता । ऐसा है यह त्रिविक्रम !

सुंदरकांड पठण उत्सव - १७ मे ते २१ मे २०१६

संतश्रेष्ठ श्रीतुलसीदासजी विरचित ‘श्रीरामचरितमानस’ हा ग्रंथ सर्व भारतभर श्रद्धावानजगतात अत्यंत जिव्हाळ्याचा आहे आणि त्यातील ‘सुंदरकांड’ ह्या भागाला श्रद्धावानांच्या जीवनात आगळंवेगळं स्थान आहे. सद्गुरु बापूंसाठीही ‘सुंदरकांड’ ही अतिशय प्रिय गोष्ट आहे. सीतामाईच्या शोधाकरिता हनुमंताबरोबर निघालेल्या वानरांचा समूह समुद्रकाठी पोहोचतो इथपासून सुंदरकांडाची सुरुवात होते. त्यानंतर हनुमंत समुद्रावरून उड्डाण करून लंकेत प्रवेश करून सीतेचा शोध घेतो?व लंका जाळून पुन्हा श्रीरामांच्या चरणांशी येऊन त्यांना वृत्तांत निवेदन करतो. मग बिभीषणही श्रीरामांकडे येतो व श्रीराम वानरसैनिकांसह

Aniruddha Bapu‬ told in his Hindi‬ Discourse dated 05 Feb 2004, The names of Ram, Radha and Sadguru-tattva are the Saviours in Kaliyug.

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने ५ फरवरी २००४ के हिंदी प्रवचन में ‘राम, राधा और सद्गुरु के नाम कलियुग में तारक हैं’ इस बारे में बताया।    बापू ने प्रवचन में कहा, ‘आज से हम जो राधानाम का अध्ययन शुरु करने वाले हैं, इस राधानाम की एक और खासियत है। राधानाम का सुमिरन करना चाहिए। राधानाम का ज्ञान, जितना हम समझ सकते हैं, बस वही हमारे लिए काफी

रामनाम सहज सोपे नाम (Ram Naam is Simple and Easy) - Aniruddha Bapu Marathi Discourse 31 March 2005

परीक्षेमध्ये ज्याप्रमाणे आधी जे प्रश्न सोपे आहेत ते सोडवले पाहिजेत, त्याप्रमाणे परमार्थातही सर्वांत सहजसोप्या असणार्‍या अशा रामनामापासून सुरुवात केली पाहिजे. हे सहज नाम म्हणजेच रामनाम घेता घेता सहजपणे सहज प्राणायाम घडेल आणि त्यातून रामनाम अधिक दृढ होईल. सहजनाम असणार्‍या रामनामाबद्दल आणि रामनामामुळे मिळणार्‍या सहजलाभांबद्दल परम पूज्य सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या  ३१ मार्च २००५ रोजीच्या प्रवचनात सांगितले, जे आपण या व्हिडियोत पाहू शकता. ॥ हरि ॐ ॥ ॥ श्रीराम ॥ ॥ अंबज्ञ

सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने। (SahasraNaam Tattulyam RamNaam Varaanane) - Aniruddha Bapu Marathi Discourse 14 October 2004

‘सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने’ (SahasraNaam Tattulyam RamNaam Varaanane) या शब्दांमध्ये रामरक्षा स्तोत्रामध्ये रामनामाची महती शिवाने पार्वतीला सांगितली आहे. रामनामाने नष्ट झालं नाही असं पाप नाही आणि रामनामाने उद्धरला नाही असा पापी झाला नाही, होणार नाही. परम पूज्य सद्‌गुरु श्री अनिरुद्ध बापुंनी गुरूवार दिनांक १४ ऑक्टोबर २००४ रोजीच्या प्रवचनात रामनामाचा महिमा सोप्या शब्दांत सांगितला, जो आपण या व्हिडियोत पाहू शकता. ॥ हरि ॐ ॥ ॥ श्रीराम ॥ ॥ अंबज्ञ ॥

त्रिविक्रम जल पर आधारित परमपूज्य बापू का प्रवचन

गुरुवार, 6 मार्च 2014 को परमपूज्य बापू ने ‘ त्रिविक्रम जल ’ इस विषय पर प्रवचन किया। हिन्दी प्रवचन में भी बापू ने इस सन्दर्भ में संक्षेप में जानकारी दी। इस ‘त्रिविक्रम जल’ विषय पर आधारित मराठी प्रवचन का हिन्दी भाषान्तर यहाँ पर संक्षेप में दे रहा हूँ, जिससे कि सभी बहुभाषिक श्रद्धावानों के लिए इस विषय को समझने में आसानी होगी। — ‘हरि ॐ’। ‘श्रीगुरुक्षेत्रम् मंत्र’ यह हम सब लोगों