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भगवान किसी भी संकट से बडा है (God is Greater Than Any Problem) – Aniruddha Bapu Hindi Discourse 12 Jan 2006

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भगवान किसी भी संकट से बडा है (God is Greater Than Any Problem) भगवान पर रहनेवाला विश्वास यह सबसे अहम बात है। भगवान पर का भरोसा कभी भी हिलने मत दीजिए। जितना संकट बडा उतना भगवान (God) पर का विश्वास भी बडा रखो। मानव के लिए कोई संकट बडा हो सकता है, मगर भगवान (God) किसी भी संकट से बडा ... Read More »

धारा शब्द को उलटा करने पर राधा शब्द बनता है (The Revert of Dhara Is Radha) – Aniruddha Bapu Hindi Discourse 12 Jan 2006

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धारा शब्द को उलटा करने पर राधा शब्द बनता है (The Revert of Dhara Is Radha) मनुष्य के जीवन का सफर यह एक ‘धारा’ है। सृजन से लेकर विनाश तक बहनेवाली यह जीवनरूपी धारा होती है। विधायक से विघातक की दिशा में रहनेवाली गति धारा कहलाती है। विघातक शक्ति का रूपान्तरण जो विधायक शक्ति में करती है, वही राधा (Radha) ... Read More »

भक्तमाता राधा- श्रीमती (Bhaktamata Radha – Shreemati) – Aniruddha Bapu Hindi Discourse 25 March 2004

भक्तमाता राधाजी का एक नाम श्रीमती है । भक्तमाता राधाजी हर प्रकार का धन भक्त को देती हैं, भौतिक धन देती हैं । इसलिए वे श्रीमती हैं।  साथ ही मन को सुमति देनेवालीं भी भक्तमाता राधाजी ही हैं । भक्तमाता राधाजी के ‘श्रीमती’ इस नाम के बारे में सद्गुरु श्रीअनिरुद्धसिंह ने अपने २५ मार्च २००४ के प्रवचन में बतायी, जो ... Read More »

राधाजीही दैवी संपत्ती है। (Radha – The Divine treasure) – Aniruddha Bapu Hindi Discourse 25 March 2004

जो भी भगवानमें विश्वास करते है, वो मानते है की, भगवान के पास हमे सब कुछ देने की शक्ति है। भगवान के देने की शक्तिही राधाजी है। राधाजी भक्तोंको आराधना करने के लिए प्रेरित करती है। राधाजी हमे आनंद कैसे पाना है ये भी सिखाती है। इस बारेमें परम पुज्य बापूने अपने गुरुवार दिनांक २५ मार्च २००४ के हिन्दी प्रवचन ... Read More »

चिन्तन का महत्त्व (Importance of Chintan) – Aniruddha Bapu Hindi Discourse 26 Feb 2004

चाहे सुख हो या दुख, मानव को किसी भी स्थिति में भगवान से दूरी बढानी नहीं चाहिए । जीवन के हर मोड पर, कदम कदम पर भगवान से जुडे रहना जरूरी है । मानव के जीवनरूपी वर्तुल (सर्कल) की केन्द्रबिन्दु भगवान ही रहनी चाहिए । जो भगवान का हमेशा चिन्तन करता है, उसके योगक्षेम की चिन्ता भगवान करते हैं । ... Read More »

कृष्णसंयुता राधा (Krishna-sanyuta Radha) – Aniruddha Bapu Hindi Discourse 19 February 2004

  Krishna-sanyuta Radha – कृष्णसंयुता यह राधाजी का महज नाम नहीं है, बल्कि यह तो राधाजी की स्थिति है, यह राधाजी की आकृति है, यह राधाजी का भाव है । दर असल कृष्णसंयुता ही राधाजी का मूल स्वरूप है  । भरोसा यह कृष्णसंयुत ही होता है और इसीलिए भरोसा यह तत्त्व राधाजी से जुडा है । राधाजी के कृष्णसंयुता इस ... Read More »

भरोसा (Surety & Certainty) – Aniruddha Bapu Hindi Discourse 19 February 2004

  Surety & Certainty – मानव को केवल भगवान पर ही भरोसा करना चाहिए और भगवान पर ही केवल भरोसा करने की शक्ति ही राधाजी है । विश्वास और भरोसा इनके बीच फ़र्क है । विश्वास के स्तर पर से आगे बढकर मानव को भगवान पर पूरा भरोसा रखना चाहिए, यह मुद्दा सद्गुरु श्रीअनिरुद्ध बापु ने अपने १९ फ़रवरी २००४ ... Read More »

ॐ रां राधायै राधिकायै रमादेव्यै नम: ।(Om Ram Radhayai Radhikayai Ramdevyai Namah) – Aniruddha Bapu Hindi Pravachan

महाभाव-स्वरूपा राधाजी के सहस्र नामों में से प्रत्येक नाम की महिमा स्पष्ट करते हुए सद्गुरु श्रीअनिरुद्ध बापु अपने प्रत्येक प्रवचन में ’भक्तिमार्ग पर भक्तमाता राधाजी अपने बच्चों के लिए यानी श्रद्धावानों के लिए किस तरह सक्रिय रहती हैं’, यह भी विशद करते थे । ’ॐ रां राधायै राधिकायै रमादेव्यै नम:’ इस मन्त्र का जप ’राधासहस्रनाम’ पर आधारित प्रत्येक हिन्दी प्रवचन ... Read More »