राधा

हम उपासना करते हैं, साधना करते रहते हैं, आराधना करते रहते हैं, पूजन करते हैं, अर्चन करते हैं। अपने अपने धर्म, पंथ, प्रदेश, रीतिरिवाज के अनुसार अलग अलग तरीके से कर सकते हैं। कोई प्रॉब्लेम नहीं। लेकिन सबसे आवश्यक बात यह होती है कि भगवान के जिस नाम या रुप की उपासना मैं करता  हूं वह उपासना मुझ से सही तरीके से होनी चाहिए। सही तरीके से इसका अर्थ यह नहीं है कि मंत्रों का उच्चारण सही तरिके से ही हो। ऐसा नही। मंत्र सही तरीके से उच्चारित कर रहे हो तो अच्छी बात है। कोई बुरी बात नहीं है। अगर मंत्र उच्चारण में कोई गलती भी हो जाती है तो भी कोई फरक नही पडता। लेकिन आपका जो भाव होता है, वह गलत नही होना चाहिए। कम से कम उपासना के वक्त तो मेरा शुद्ध भाव रहना चाहिए। और यह शुद्ध भाव ही राधाजी स्वरूप है। भगवती राधाजी ये शुद्ध भाव हैं।

भगवान विष्णु, भगवान कृष्ण ये मूल भाव हैं। शुद्ध भाव के पहले मूल भाव होता है। अब इस में अंतर क्या है? भाव का शुद्ध और अशुद्ध यह द्वन्द्व ही जहॉ उपस्थित नहीं है ऐसी श्रीकृष्ण की स्थिति है। राधाजी शुद्ध भाव हैं, इस बारे में हमारे सद्गुरु अनिरुद्ध बापू ने प्रवचन में बताया, जो आप इस व्हिडिओ में देख सकते हैं।

जब वेदव्यासजी ने गुरु नारदजी से यह पूछा कि मैं तो बस ‘राम’ नाम रटते ही आ रहा था, क्योंकि आपने ही मुझे बताया था कि एक राम नाम ही सहस्र नामों के बराबर है। तब नारदजी ने कहा कि इस कलियुग के लिए सहस्र राम नाम की ताकद एक राधा नाम में है। जिन्होंने सारे वेद, उपनिषद्‍, पुराण, महापुराण लिखे हैं, संपादित किये हैं ऐसे महर्षि वेदव्यास कहते हैं कि मैं अज्ञानी हूं। जब वेदव्यास स्वयं को अज्ञानी समझते हैं तो बाकी किसी के ज्ञानी होने की संभावना नहीं है। वेदव्यास कहते हैं, ‘‘गुरुवर, मैं तो अज्ञानी हूं, अब आप ही मुझे बताइए कि यह बात कैसे हो सकती है?’’ उन्हें कोई आशंका नहीं है वो जानना चाहते हैं। बडी विनम्रता से वे पूछते हैं।

तब नारद भगवान उन्हे बताते हैं, ‘राम नाम का रं यह अग्नि बीज और आ यह भानू (सूर्य) बीज जिसने धारण किया है, वही राधा है। रं और आ ये रामनाम के दोनों बीज राधा ने धारण किये हैं। और जो धारण करता है वह ज्यादा बलशाली होता है।

Pravachan, God, vedic, prayer, Lord, devotion, faith, teachings, Bapu, Aniruddha Bapu, Sadguru, discourse, Bandra, Mumbai, Maharashtra, India, New English school, IES, Indian Education Society, भक्ती, विश्वास, Aniruddha Bapu, अनिरुद्ध बापू, Bapu, बापू, Anirudhasinh, अनिरुद्धसिंह, अनिरुद्ध जोशी, Aniruddha Joshi, Dr. aniruddha Joshi , डॉ. आनिरुद्ध जोशी, सद्‍गुरु अनिरुद्ध, भूकंप, राधा, भरोसा, विश्वास, स्पेस, चैनल, बडा, संकट, छोटा, दिव्यत्व, काल, दिशा, भक्ति, कंपन, श्रध्दा, सहाय्यता, भगवान, kal, disha, faith, channel, problem, shraddha, capable, truth, space, connection, bhagwan, bhakti, earthquake

भगवान किसी भी संकट से बडा है (God is Greater Than Any Problem) भगवान पर रहनेवाला विश्वास यह सबसे अहम बात है। भगवान पर का भरोसा कभी भी हिलने मत दीजिए। जितना संकट बडा उतना भगवान (God) पर का विश्वास भी बडा रखो। मानव के लिए कोई संकट बडा हो सकता है, मगर भगवान (God) किसी भी संकट से बडा ही है, इस बारे में परमपूज्य सद्गुरू श्री अनिरुद्ध बापूनें

Pravachan, God, vedic, prayer, Lord, devotion, faith, teachings, Bapu, Aniruddha Bapu, Sadguru, discourse, Bandra, Mumbai, Maharashtra, India, New English school, IES, Indian Education Society, भक्ती, विश्वास, Aniruddha Bapu, अनिरुद्ध बापू, Bapu, बापू, Anirudhasinh, अनिरुद्धसिंह, अनिरुद्ध जोशी, Aniruddha Joshi, Dr. aniruddha Joshi , डॉ. आनिरुद्ध जोशी, सद्‍गुरु अनिरुद्ध बापू, आप, मन, बुध्दी, राधा, धारा, प्रवाह, मृत्यू, नाम, विघातक, विधायक, भक्ति, महिना, काम, भगवान, साधन, जगह, जन्म, उलटा, साल, माह, प्रेम, दिप, दिया, मनरुपी, प्रेमरुपी, राधाशक्ति, रचनात्मक, उम्र, श्रध्दा, प्याररुपी, बुध्दीरुपी, मनुष्य, space, connection, naam, Radha, vidhayak, vighatk, chantting, bhakti, sharddha, age, year, month, maan, mind, love, dhara, born, travel,

धारा शब्द को उलटा करने पर राधा शब्द बनता है (The Revert of Dhara Is Radha) मनुष्य के जीवन का सफर यह एक ‘धारा’ है। सृजन से लेकर विनाश तक बहनेवाली यह जीवनरूपी धारा होती है। विधायक से विघातक की दिशा में रहनेवाली गति धारा कहलाती है। विघातक शक्ति का रूपान्तरण जो विधायक शक्ति में करती है, वही राधा (Radha) है। धारा शब्द को उलटा करने पर राधा (Radha) शब्द

भक्तमाता राधा- श्रीमती (Bhaktamata Radha - Shreemati) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 25 March 2004

भक्तमाता राधाजी का एक नाम श्रीमती है । भक्तमाता राधाजी हर प्रकार का धन भक्त को देती हैं, भौतिक धन देती हैं । इसलिए वे श्रीमती हैं।  साथ ही मन को सुमति देनेवालीं भी भक्तमाता राधाजी ही हैं । भक्तमाता राधाजी के ‘श्रीमती’ इस नाम के बारे में सद्गुरु श्रीअनिरुद्धसिंह ने अपने २५ मार्च २००४ के प्रवचन में बतायी, जो आप इस व्हिडियो में देख सकते हैं l ॥ हरि

राधाजीही दैवी संपत्ती है। (Radha - The Divine treasure) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 25 March 2004

जो भी भगवानमें विश्वास करते है, वो मानते है की, भगवान के पास हमे सब कुछ देने की शक्ति है। भगवान के देने की शक्तिही राधाजी है। राधाजी भक्तोंको आराधना करने के लिए प्रेरित करती है। राधाजी हमे आनंद कैसे पाना है ये भी सिखाती है। इस बारेमें परम पुज्य बापूने अपने गुरुवार दिनांक २५ मार्च २००४ के हिन्दी प्रवचन मे मार्गदर्शन किया, वह आप इस व्हिडीओमें देख सकते है।

चिन्तन का महत्त्व (Importance of Chintan) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 26 Feb 2004

चाहे सुख हो या दुख, मानव को किसी भी स्थिति में भगवान से दूरी बढानी नहीं चाहिए । जीवन के हर मोड पर, कदम कदम पर भगवान से जुडे रहना जरूरी है । मानव के जीवनरूपी वर्तुल (सर्कल) की केन्द्रबिन्दु भगवान ही रहनी चाहिए । जो भगवान का हमेशा चिन्तन करता है, उसके योगक्षेम की चिन्ता भगवान करते हैं । बुद्धि से भगवान की पर्युपासना करने की ताकत राधाजी देती

कृष्णसंयुता राधा (Krishna-sanyuta Radha) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 19 February 2004

  Krishna-sanyuta Radha – कृष्णसंयुता यह राधाजी का महज नाम नहीं है, बल्कि यह तो राधाजी की स्थिति है, यह राधाजी की आकृति है, यह राधाजी का भाव है । दर असल कृष्णसंयुता ही राधाजी का मूल स्वरूप है  । भरोसा यह कृष्णसंयुत ही होता है और इसीलिए भरोसा यह तत्त्व राधाजी से जुडा है । राधाजी के कृष्णसंयुता इस नाम के बारे में सद्गुरु श्रीअनिरुद्ध ने अपने १९ फ़रवरी

भरोसा (Surety & Certainty) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 19 February 2004

  Surety & Certainty – मानव को केवल भगवान पर ही भरोसा करना चाहिए और भगवान पर ही केवल भरोसा करने की शक्ति ही राधाजी है । विश्वास और भरोसा इनके बीच फ़र्क है । विश्वास के स्तर पर से आगे बढकर मानव को भगवान पर पूरा भरोसा रखना चाहिए, यह मुद्दा सद्गुरु श्रीअनिरुद्ध बापु ने अपने १९ फ़रवरी २००४ के हिंदी प्रवचन में विशद किया, जो आप इस व्हिडियो

ॐ रां राधायै राधिकायै रमादेव्यै नम: ।(Om Ram Radhayai Radhikayai Ramdevyai Namah) - Aniruddha Bapu Hindi Pravachan

महाभाव-स्वरूपा राधाजी के सहस्र नामों में से प्रत्येक नाम की महिमा स्पष्ट करते हुए सद्गुरु श्रीअनिरुद्ध बापु अपने प्रत्येक प्रवचन में ’भक्तिमार्ग पर भक्तमाता राधाजी अपने बच्चों के लिए यानी श्रद्धावानों के लिए किस तरह सक्रिय रहती हैं’, यह भी विशद करते थे । ’ॐ रां राधायै राधिकायै रमादेव्यै नम:’ इस मन्त्र का जप ’राधासहस्रनाम’ पर आधारित प्रत्येक हिन्दी प्रवचन के बाद सद्गुरु श्रीअनिरुद्ध बापु स्वयं करते थे और श्रद्धावान