भगवान

परम पूज्य सद्‍गुरू श्री अनिरुद्ध बापूने उनके ०८ जनवरी २०१५ के हिंदी प्रवचन में डॉ. टेस्ला का उदाहरण देकर भगवान सर्वसमर्थ है (God is omnipotent) इस बारे में समझाया।

एक विश्वास असावा पुरता, कर्ता हर्ता साई ऐसा। यह साईनाथ सब कुछ कर सकता है। हमारे मन में आता है- ये कैसे हो सकता है? ये नही हो सकता है। लेकीन हो सकता है। वह जरूर कर सकता है। प्रार्थना करना हमारा काम है और देना या न देना वह साईबाबा का अधिकार है। कभी कभी वो जानबूझकर भी, असहायता जानकर भी मदत नहीं करता, ऐसे हमे लगता है। नुकसान हो गया, नफा नही हुआ। लेकीन कभी कभी नुकसान होना भी आवश्यक होता है। लेकिन उसके बाद भी आप को खडा करने की ताकद भी उसी में है। ऐसे कितने लोगों के चरित्र हमने पढे होंगे जो पूरे झिरो में गये थे। यहां हमारे प्यारे अनिरुद्ध बापू ने डॉ. टेस्ला जो अभी तक का बेहतरीन साइन्टीस्ट का उदाहरण देकर हमें समझाया।

उन्होंनो कहा की, वह डॉ. टेस्ला अपनी लॅब खूद बनाई, उसके बहोतसारे प्रयोग बडे बडे व्यापारीयोंके खिलाफ थे। वह खूद अपने पेटंट बेचकर वह पैसे लॅबमें लगाता था। ऐसे बनी हुयो ३ मालेकी इमारत उन लोगोंने जला दी। सारे रेकॉर्ड, प्रयोग, केमिकल्स्‌, बूक्स्‌, साधन जल गये। उसने क्या किया – चर्च में जाकर बैठ गया। प्रार्थना कि, पूरा बायबल पढा । और आगे सिर्फ १५ महिनोंमे उसी सिटीमें २ लाख एकर इतने बडे जगह पर अपने नयी इलेक्ट्रीसिटी का दिखावा करके दिखाया । ये भगवान की ताकद है, ऐसे अपने लाडले अनिरुद्ध बापूने प्रवचनमें बताया |

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 14 Jan 2016 that, Jivatma is an integral part of Paramatma.

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १४ जनवरी २०१६ के पितृवचनम् में ‘जीवात्मा यह परमात्मा का ही अभिन्न अंश होता है’, इस बारे में बताया। और मैं क्या हूँ, every human being क्या है? तुम एक शरीर नहीं हो कि जिसमें आत्मा है। जान लो भाई, हम लोग क्या सोचते हैं कि, मेरा शरीर है और मेरे शरीर में मेरी आत्मा है, नहीं, तुम आत्मा हो, जिसके पास एक शरीर

‘मैं हूँ’ यह त्रिविक्रम का मूल नाम है - भाग २ (‘ I Am ’ Is Trivikram's Original Name - Part 2) - Aniruddha Bapu‬ Hindi‬ Discourse 01 Jan 2015

‘मैं हूँ’ यह त्रिविक्रम का मूल नाम है – भाग २ (‘ I Am ’ Is Trivikram’s Original Name – Part 2) मानव को स्वयं के बारे में कभी भी नकारात्मक रूप में नहीं सोचना चाहिए। भगवान से कुछ मांगते समय भी सकात्मक सोच ही होनी चाहिए। ‘भगवान आप मेरे पिता हो और मैं आपका पुत्र हूं। आप ऐश्वर्यसंपन्न हो, ऐश्वर्यदाता हो इसलिए मेरे पास भी ऐश्वर्य है, आप उसे

Durga

  दुर्गे दुर्घट भारी तुजविण संसारी । अनाथनाथे अंबे करुणा विस्तारी ॥ वारी वारी जन्ममरणांतें वारी । हारी पडलो आता संकट निवारी ॥ 1 ॥ जय देवी जय देवी महिषासुरमर्दिनी । सुरवरईश्वरवरदे तारक संजीवनी ॥ धृ ॥ त्रिभुवनभुवनी पाहता तुजऐसी नाही । चारी श्रमले परंतु न बोलवे कांही ॥ साही विवाद करिता पडिले प्रवाही । ते तूं भक्तांलागी पावसि लवलाही॥ जय देवी… प्रसन्नवदने प्रसन्न होसी निजदासा । क्लेशांपासुनि सोडवी तोडी

‘मैं हूँ’ यह त्रिविक्रम का मूल नाम है (‘I Am’ Is Trivikram's Original Name) - Aniruddha Bapu‬ Hindi‬ Discourse 01 Jan 2015

‘मैं हूँ’ यह त्रिविक्रम का मूल नाम है (‘I Am’ Is Trivikram’s Original Name) आदिमाता चण्डिका और उनके पुत्र त्रिविक्रम (Trivikram) से कुछ मांगते समय श्रद्धावान को सकारात्मक (पॉझिटिव्ह) रूप से मांगना चाहिए। वेदों के महावाक्य यही बताते हैं कि हर एक मानव में परमेश्वर का अंश है। यदि मानव में परमेश्वर का अंश है तो उसे नकारात्मक रूप से मांगने की आवश्यकता ही नहीं है। ‘मैं हूँ’ यह त्रिविक्रम

श्रीसूक्ताच्या पहिल्या ऋचेचा अर्थ - भाग १५  (The Meaning Of The First Rucha Of Shree Suktam - Part 15) - Aniruddha Bapu‬ ‪Marathi‬ Discourse 18 June 2015

श्रीसूक्ताच्या पहिल्या ऋचेचा अर्थ- भाग १५ (The Meaning Of The First Rucha Of Shree Suktam – Part 15) लहान मूल ज्याप्रमाणे आपल्या आईवडिलांकडे, आजीआजोबांकडे हट्ट करते, अन्य कुणा तिर्‍हाइकाकडे हट्ट करत नाही; त्याप्रमाणे श्रद्धावानाने आपल्या पित्याकडे म्हणजेच त्रिविक्रमाकडे हट्ट करावा, त्रिविक्रमाच्या मातेकडे म्हणजेच आपल्या आजीकडे अर्थात श्रीमातेकडे हट्ट करावा. त्रिविक्रमच उचित ते सर्वकाही देणारा आहे. या जगात जे जे काही शुभ, कल्याणकारी, मंगल आहे ते निर्माण करणारा ‘जातवेद’ त्रिविक्रम आहे.

दररोज दहा मिनिटे शान्त बसा- भाग २ (Sit Quite For 10 Minutes Every Day- Part 2) - Aniruddha Bapu‬ ‪Marathi‬ Discourse 18 June 2015

दररोज दहा मिनिटे शान्त बसा- भाग २ (Sit Quite For 10 Minutes Every Day- Part 2) रोज दिवसातून कमीत कमी दहा मिनिटे शान्तपणे बसा (Sit Quite). शान्तपणे बसण्याआधी ‘हरि ॐ, श्रीराम अंबज्ञ’ म्हणा आणि उठण्याआधी ‘जय जगदंब जय दुर्गे’ म्हणा. लक्ष्मी म्हणजे सर्व प्रकारची संपन्नता. अशा या लक्ष्मीमातेला श्रद्धावानाकडे घेऊन येणारा तिचा पुत्र त्रिविक्रम आहे. लक्ष्मीमातेचा श्रद्धावानाच्या जीवनात सर्वत्र संचार करण्याचा मार्ग प्रशस्त करणारा त्रिविक्रम आहे. या शान्तपणे बसण्यामुळे हा

दररोज दहा मिनिटे शान्त बसा (Sit Quite For 10 Minutes Every Day) - Aniruddha Bapu‬ ‪Marathi‬ Discourse 18 June 2015

दररोज दहा मिनिटे शान्त बसा (Sit Quite For 10 Minutes Every Day) दररोज दिवसातून वेळ काढून किंवा रात्री कमीत कमी दहा मिनिटांसाठी तरी शान्त बसा. शरीर स्थिर आणि मन शान्त करा. मनात जरी विचार आले तरी विरोध करू नका. दहा मिनिटे बसण्याआधी ‘हरि ॐ, श्रीराम अंबज्ञ’ म्हणा आणि दहा मिनिटे झाल्यावर ‘जय जगदंब जय दुर्गे’ म्हणा. दररोज दहा मिनिटे शान्तपणे बसण्याबाबत सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या १८ जून २०१५ रोजीच्या प्रवचनात जे

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‘ अंबा ’ या शब्दाचा अर्थ (The Meaning Of The Word ‘ Amba ’) दुर्गामातेच्या आरतीत ‘अनाथनाथे अंबे’ हे शब्द येतात. ‘ अंबा ’ या शब्दाचे ‘अंबे’ हे संबोधन आहे. ‘ अंबा ’ या शब्दाचा अर्थ आहे- ‘माझी प्रिय आई’. लहान मूल जसे ‘माझी आई’ या भावनेने आईला बिलगते, त्या माझेपणाच्या, प्रेमाच्या भावाने मोठ्या आईला साद घालायला हवी. अंबा या शब्दाच्या अर्थाबद्दल सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या १८ जून २०१५ रोजीच्या प्रवचनात

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श्रीसूक्ताच्या पहिल्या ऋचेचा अर्थ – भाग १४ (The Meaning Of The First Rucha Of Shree Suktam – Part 14) सर्व प्रकारच्या प्रगतीची देवता लक्ष्मीमाता (Laxmi) आहे. ‘हे जातवेदा, लक्ष्मीमातेला माझ्याकडे घेऊन ये’, अशी प्रार्थना ब्रह्मवादिनी लोपामुद्रा श्रीसूक्ताच्या पहिल्या ऋचेत करते. मानवाकडे असणारी सर्वांत मोठी क्षमता आहे- प्रार्थना (prayers) करण्याची क्षमता. प्रार्थना म्हणजे प्रेमाने, विश्वासाने भगवंताला साद घालणे, मनोगत सांगणे. श्रद्धावानाने प्रेमाने, विश्वासाने केलेली प्रार्थना भगवंताने ऐकली नाही असे कधी होऊच

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सर्वदृष्ट्या अचूक होण्यामागे लागणे हे क्षितिजाला धरण्यासाठी धावण्याप्रमाणे आहे (Perfection is like chasing the horizon) सर्वदृष्ट्या अचूक असणे म्हणजेच पर्फेक्शन (Perfection) ही गोष्ट माणसाच्या शक्यतेबाहेरची आहे. सर्वदृष्ट्या अचूक असणे हे क्षितिज आहे, कल्पना आहे. श्रद्धावान काल होता त्यापेक्षा आज अधिक विकसित व्हावा यासाठी त्रिविक्रम श्रद्धावानाच्या जीवनात, त्रिविध देहात तीन पावले दररोज चालतच असतो. कालच्या पेक्षा आज मी अधिक कसा विकसित (progress) होईन याकडे लक्ष द्या कारण सर्वदृष्ट्या अचूक होण्यामागे लागणे

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तुम्हारी उपलब्धि नहीं बल्कि तुम्हारा विश्वास निर्णायक साबित होता है (You Are Not Judged By Your Performance, You Are Judged By Your Faith) नववर्ष २०१५ में श्रद्धावानों ने प्रेम के पौधे को बढाने का, तुलना न करने का, न्यूनगंड को जगह न देने का, विकास के लिए हर रोज रात को कम से कम १० मिनट शान्ति से बैठने का संकल्प किया है। तुम कितने बडे बडे काम करते हो

त्रिविक्रम तुमसे प्रेम करते हैं (Trivikram Loves You) - Aniruddha Bapu‬ Hindi‬ Discourse 25 Dec 2014

त्रिविक्रम तुमसे प्रेम करते हैं (Trivikram Loves You) श्रद्धावान को दुष्प्रारब्ध से डरना नहीं चाहिए, किसी भी मुसीबत से हार नहीं माननी चाहिए। आदिमाता चण्डिका और उनके पुत्र त्रिविक्रम से श्रद्धावान को सहायता अवश्य मिलती है। वे श्रद्धावान की हर प्रकार से सहायता करते ही हैं। त्रिविक्रम क्यों हमारे लिए इतना करते हैं? क्योंकि वे प्रेममय हैं। त्रिविक्रम तुमसे निरपेक्ष प्रेम करते हैं, इस बारे में परमपूज्य सद्गुरू श्री अनिरुद्ध

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ज्ञान म्हणजे काय (What Is Knowledge) प्रपंच-परमार्थ दोन्ही एकाच वेळेस सुन्दर रित्या संपन्न करण्यासंबंधी ऋषिसंस्थेने भारतीय समाजास सदैव मार्गदर्शन केले. अखिल विश्वाच्या कल्याणासाठी चिन्तन करत असताना ब्रह्मर्षिंसमोर त्या आदिमाता चण्डिकेने जे ज्ञानभांडार खुले केले, तेच वेदरूपात प्रकटले. परमेश्वराने निर्माण केलेले जे जे काही जसे जसे आहे ते तसेच्या तसे जाणून घेऊन, तसेच त्यामागील परमेश्वरी हेतु जाणून घेऊन त्या माहितीचा पवित्र मार्गाने उपयोग अखिल विश्वाच्या कल्याणासाठी कसा करायचा याची परिपूर्ण जाणीव

त्रिविक्रम हमें सभी प्रकार की बीमारियों से मुक्त करता है (Trivikram Heals All Our Diseases) - Aniruddha Bapu‬ Hindi‬ Discourse 25 Dec 2014

त्रिविक्रम हमें सभी प्रकार की बीमारियों से मुक्त करता है (Trivikram Heals All Our Diseases) शरीर, मन को आवश्यक रहनेवाली शक्तियों में से एक शक्ति है, निरोगीकरण शक्ति यानी द हीलिंग पॉवर। इस शक्ति की आपूर्ति करता है- त्रिविक्रम । शरीर, मन के साथ साथ धन, परिवार, कार्य आदि अनेक क्षेत्रों में रहनेवाली बीमारियों को ठीक करने के लिए इस हीलिंग पॉवर की मानव को जरूरत होती है। त्रिविक्रम हमें

प्रतिदिन कम से कम दस मिनट तक शान्ति से बैठिए (Sit Quite At Least For 10 Minutes A Day) - Aniruddha Bapu‬ Hindi‬ Discourse 25 Dec 2014

प्रतिदिन कम से कम दस मिनट तक शान्ति से बैठिए (Sit Quite At Least For 10 Minutes A Day) भगवान का मूल रूप निर्गुण निराकार है। सुसन्तुलितता, शान्ति, अचलता यह वह रूप है। सन्तुलितता निर्माण करना मानव के लिए संभव नहीं होता, लेकिन शान्ति से, अचल स्थिति में तो यकीनन ही बैठ सकते हैं। कम से कम दस मिनट हर रोज शान्ति से बैठे रहने से आदिमाता चण्डिका और चण्डिकापुत्र