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मूलाधार चक्र के स्वामी एकदन्त गणेश हैं (The presiding deity for the Muladhara Chakra is ‘Ekadant’ Ganesha) – Aniruddha Bapu

Aniruddha Bapu told in Pitruvachanam 28 Apr 2016 that The presiding deity for the Muladhara Chakra is ‘Ekadant’ Ganesha

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २८ एप्रिल २०१६ के पितृवचनम् में  ‘मूलाधार चक्र के स्वामी एकदन्त गणेश हैं’, इस बारे में बताया। यह उच्चारण की क्लॅरिटी (clarity) देनेवाला शस्त्र क्या है? दन्त। दिखानेवाला दाँत है। यही क्लॅरिटी का बेसिक है। क्या हम जो मन में होता है, वही उच्चार करते हैं? नहीं, हमारे खाने के दाँत अलग, दिखाने के ... Read More »

मूलाधार चक्र की चार पंखुडियाँ (The four petals of Mooladhara Chakra) – Aniruddha Bapu

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ७ एप्रिल २०१६ के पितृवचनम् में ‘मूलाधार चक्र की चार पंखुडियाँ’ इस बारे में बताया। स्वाधिष्ठान चक्र को देखते समय ध्यान में रखिये की मूलाधार गणपति जो हैं, मूलाधार गणेश जो हैं, उनका जो ‘ॐ लं’ ये बीज है, इंद्र का भी बीज है, जो वसुंधरा का बीज है, ये जानते हैं कि इस ... Read More »

`ॐ लं ’ का जप करे (Chant `Om Lam’) – Aniruddha Bapu

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ७ एप्रिल २०१६ के पितृवचनम् में  ‘ॐ लं का जप करें’, इस बारे में बताया।  शमनं, दमनं नहीं, destruction नहीं, दमन नहीं है, suppression भी नहीं, नॉर्मल करना। जो हमारे विकार या वासनाएँ हैं, जो भी हमारे षड्‌रिपु हैं, वे सारे षड्‌रिपु कहां से काम करते हैं? तो मूलाधार चक्र से काम करते हैं। ... Read More »

‘ ॐ लं ’ यह कहना ही काफी है – भाग २ (Chanting Om Lam is sufficient – Part 2) – Aniruddha Bapu

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ७ एप्रिल २०१६ के पितृवचनम् में ‘ ॐ लं यह कहना ही काफी है’ इस बारे में बताया। ये जो ‘शं’ बीज है, ये रुद्र का भी है और भद्र का भी है। हमें हमारी जिंदगी में दोनो चाहिए, लेकिन ये स्वरुप किसके लिये हैं? आवश्यकता क्या है? हम कोशिश करते हैं, मैं किसी ... Read More »

‘ ॐ लं ’ यह कहना ही काफी है (Chanting Om Lam is sufficient) – Aniruddha Bapu

Chanting Om Lam is sufficient

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ७ एप्रिल २०१६ के पितृवचनम् में ‘ ॐ लं यह कहना ही काफी है’ इस बारे में बताया। अभी हम लोग यह चक्रों के बीजमंत्र को देख रहे हैं, right? तो यह मूलाधार चक्र हैं । मूलाधार चक्र के ‘ लं ’ बीज को हम देखते हैं। क्या है मूलाधार चक्र? उसके साथ हमें ... Read More »

श्रद्धावान यह चण्डिकाकुल से जुडा ही है (The Shraddhavan is connected to Chandikakul) – Aniruddha Bapu

he Shraddhavan is connected to Chandikakul

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ७ एप्रिल २०१६ के पितृवचनम् में ‘श्रद्धावान यह चण्डिकाकुल से जुडा ही है’ इस बारे में बताया। माँ भगवती और उसका जो बेटा है त्रिविक्रम, वो हमारा मन बदलने के लिये सारी सहायता करता है। हमारी बुद्धी को और ताकद देता है, हमारे मन को और सामर्थ्य देता है, हमारे प्राणों में ऐसे ‘बदलाव’ ... Read More »

सुन्दरकाण्ड पाठ, पूजन एवं अभिषेक (Sunderkand Paath) – Aniruddha Bapu

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने ०३ मार्च २०१६ के पितृवचनम् में श्रीहरिगुरुग्राम में १७ मई २०१६ से २१ मई २०१६ तक होनेवाले सुन्दरकाण्ड पाठ के बारे में जानकारी दी। १७ मई २०१६ से २१ मई २०१६ तक ५ दिन यहां श्री हरिगुरुग्राम में सुबह ९ बजे से शाम को ७ बजे तक पूरे के पूरे वैदिक पध्दति से ... Read More »

सुंदरकांड पठण उत्सव – १७ मे ते २१ मे २०१६

संतश्रेष्ठ श्रीतुलसीदासजी विरचित ‘श्रीरामचरितमानस’ हा ग्रंथ सर्व भारतभर श्रद्धावानजगतात अत्यंत जिव्हाळ्याचा आहे आणि त्यातील ‘सुंदरकांड’ ह्या भागाला श्रद्धावानांच्या जीवनात आगळंवेगळं स्थान आहे. सद्गुरु बापूंसाठीही ‘सुंदरकांड’ ही अतिशय प्रिय गोष्ट आहे. सीतामाईच्या शोधाकरिता हनुमंताबरोबर निघालेल्या वानरांचा समूह समुद्रकाठी पोहोचतो इथपासून सुंदरकांडाची सुरुवात होते. त्यानंतर हनुमंत समुद्रावरून उड्डाण करून लंकेत प्रवेश करून सीतेचा शोध घेतो?व लंका जाळून पुन्हा श्रीरामांच्या चरणांशी येऊन त्यांना ... Read More »

सर्वदेवनमस्कार: केशवं प्रति गच्छति (The worship offered to any deity ultimately reaches to the Supreme Being Keshava) – अनिरुद्ध बापू

सर्वदेवनमस्कार: केशवं प्रति गच्छति (The worship offered to any deity ultimately reaches to the Supreme Being Keshava) - Aniruddha Bapu Pitruvachanam 10 Mar 2016

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने १० मार्च २०१६ के पितृवचनम् में ‘सर्वदेवनमस्कार: केशवं प्रति गच्छति’ इस बारे में बताया।  अनिरुद्ध बापू ने पितृवचन के दौरान यह बताया की, हर किसी के दिमाग में एक सवाल उठता है । कि हम लोग कौनसी प्रार्थना करे, कौनसा जप करे गुरुक्षेत्रम का मंत्र दररोज करना बहुत अच्छी बात है, सुंदर बात ... Read More »

प्रदक्षिणा सूर प्रार्थना

प्रदक्षिणा सूर प्रार्थना

सद्‌गुरू श्रीअनिरुद्ध बापूंनी काल गुरूवार, दिनांक १० मार्च २०१६ रोजी ’श्रीशब्दध्यानयोग’ या उपासनेची महती विशद केली व ही उपासना झाल्यानंतर प्रत्येकाला स्वत:च्या सप्तचक्रांची प्रदक्षिणा करता येण्यासाठी म्हणून ’प्रदक्षिणा सूर’ प्रार्थना याविषयी सांगितले. श्रीशब्दध्यानयोगमध्ये मातृवाक्याच्या पठणानंतर ही ’प्रदक्षिणा सूर’ प्रार्थना यापुढे समाविष्ट केली जाईल.    सद्‌गुरू श्रीअनिरुद्ध बापूंनी यापूर्वीच सांगितल्याप्रमाणे प्रत्येकाने स्वत:च्या सप्तचक्रांची केलेली ही प्रदक्षिणा असेल आणि त्यासाठी प्रत्येकाने फक्त ... Read More »

जब भी आनंदित होंगे, तब तब ‘ जय जगदंब जय दुर्गे ’ बोलिए (Whenever you feel Happy, Say Jai Jagadamb Jai Durge) – Aniruddha Bapu

Aniruddha Bapu told in Pitruvachanam 22 Oct 2015 that Aniruddha Bapu Pitruvachanam 22 Oct 2015

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २२ अक्तूबर २०१५ के पितृवचनम् में ‘जब भी आनंदित होंगे, तब तब ‘ जय जगदंब जय दुर्गे ’ बोलिए’ इस बारे में बताया। अदितिमती याने काश्यपपत्नी। अदिति यानी आदिमाता का मूल स्वरूप, अदिति यानी जो कभी खंडित नहीं होती, खंडित होने देती ही नहीं। सबकुछ अखंडीत रखती है वो अदिति है राइट तो हम ... Read More »

सप्तचक्र उपासना – अधिक सुलभतेने कशी करावी?

गुरुवार, दि. १५ ऑक्टोबर २०१५ रोजी परमपूज्य सद्‌गुरु बापूंनी “श्रीशब्दध्यानयोग” ही, श्रद्धावानांचा अभ्युदय (सर्वांगीण विकास) घडवून आणणारी सप्तचक्रांची उपासना श्रीहरिगुरुग्राम येथे सुरु केली. त्यानंतर संस्थेतर्फे ह्या उपासनेची माहिती देणारी पुस्तिकाही श्रद्धावानांकरिता उपलब्ध करण्यात आली. पुस्तिकेत दिलेल्या माहितीनुसार, श्रद्धावान पुस्तिकेतील चक्रांच्या प्रतिमेकडे पाहता पाहता त्या संबंधित चक्राचा गायत्री मंत्र आणि स्वस्तिवाक्य म्हणत घरी उपासना करू शकतात. गुरुवार, दि. २१ जानेवारी २०१६ ... Read More »

सप्तचक्र उपासना – अधिक सुलभतासे कैसे करे?

गुरुवार, दि. १५ अक्तूबर २०१५ को परमपूज्य सद्‌गुरु बापू ने “श्रीशब्दध्यानयोग” यह, श्रद्धावानों का अभ्युदय (सर्वांगीण विकास) करानेवाली सप्तचक्रों की उपासना श्रीहरिगुरुग्राम में शुरू की। उसके बाद, इस उपासना की जानकारी देनेवाली पुस्तिका भी संस्था की ओर से श्रद्धावानों के लिए उपलब्ध करायी गयी। पुस्तिका में दी गयी जानकारी के अनुसार, श्रद्धावान पुस्तिका में दी गयीं चक्रों की प्रतिमाओं की ... Read More »

ध्यान के प्रकार – चिंतनात्मक और एकाग्रता (Types of Meditation- Contemplative & Concentrative) – Aniruddha Bapu Pitruvachanam 22 Oct 2015

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २२ अक्तूबर २०१५ के पितृवचनम् में ध्यान के दो प्रकारों के बारे में बताया। ध्यान के दो प्रकार होते हैं – एक है चिंतनात्मक और दूसरा है एकाग्रता, ऐसा बापू ने कहा।      ध्यान के चिंतनात्मक (contemplative) और एकाग्रता (concentrative) इन दो प्रकारों की जानकारी देकर बापू ने बताया कि हम यहॉ पर ... Read More »