बापू

तुलना से न्यूनगंड का निर्माण होता है - भाग १ (Comparison Leads To Inferiority Complex Part 1) - Aniruddha Bapu‬ Hindi‬ Discourse 25 Dec 2014

तुलना से न्यूनगंड का निर्माण होता है – भाग १ (Comparison Leads To Inferiority Complex Part 1) मानव अपनी तुलना अपने परदे के पीचे के किरदार की तुलना अन्य व्यक्तियों के परदे पर के किरदार के साथ करते हैं। स्वाभाविक रूप में, इस तुलना में अन्य व्यक्तियों के परदे पर का किरदार हमारे वास्तविक जीवन के किरदार को हरा देता है। कोई भी मानव परिपूर्ण नहीं होता, यह ध्यान में

परिपूर्णता यह भ्रम है (Perfection Is An Illusion) - Aniruddha Bapu‬ Hindi‬ Discourse 25 Dec 2014

परिपूर्णता यह भ्रम है (Perfection Is An Illusion) यदि किसी अपने के साथ झगडा होता है, तब भी ‘वह मेरा अपना है’ इस बात को भूलना नहीं चाहिए। खून का रिश्ता हो या मन का, हर रिश्ते की बुनियाद प्यार की होनी चाहिए। परिवार के दो सदस्यों के बीच मतभेद हो भी जाते हैं, तब भी वे एकदूसरे के शत्रु नहीं बन जाते। इस वर्ष हमें प्रेम बढाते समय इस

करुणा इस शब्द का अर्थ (Meaning Of Compassion) - Aniruddha Bapu‬ Hindi‬ Discourse 25 Dec 2014

करुणा इस शब्द का अर्थ (Meaning Of Compassion) करुणा इस शब्द का अर्थ है, बिना किसी शर्त के प्रेम करना और करुणा यानी कंपॅशन यही सबसे बडी ताकत होती है। करुणा के बिना किसी के लिए कुछ करते समय उसमें उपकार की भावना रहती है। लेकिन करुणा के साथ मानव जो कुछ करता है वह केवल प्रेम के कारण करता है। करुणा (कंपॅशन) इस शब्द के अर्थ के बारे में

प्रेम बढाओ (Increase Love) - Aniruddha Bapu‬ Hindi‬ Discourse 25 Dec 2014

प्रेम बढाओ (Increase Love) सद्‍गुरुतत्त्व पर रहनेवाले विश्वास को दृढ करना यह २०१२ इस वर्ष का ध्येय था। एक विश्वास संपूर्ण रूप में होना चाहिए कि मेरा कर्ता हर्ता मेरा सद्‍गुरुतत्त्व है। इस वर्ष का ध्येय है – प्यार बढाना। प्रेम यह परम-पवित्र भाव इस दुनिया में सर्वश्रेष्ठ है। २०१५ इस वर्ष में प्रेम बढाने (Increase Love) का ध्येय रखिए इस के बारे में परमपूज्य सद्गुरू श्री अनिरुद्ध बापूनें अपने

सकारात्मक विचारों पर अपना ध्यान केन्द्रित करें (Focus On Positive Thoughts) - Aniruddha Bapu‬ Hindi‬ Discourse 04 Dec 2014

सकारात्मक विचारों पर अपना ध्यान केन्द्रित करें (Focus On Positive Thoughts) जो नहीं करना है प्राय: उसपर मानव अपना ध्यान केन्द्रित करता रहता है। जो करना चाहिए उसपर मन केन्द्रित करने के बजाय जो नहीं करना है उसपर मानव अपना ध्यान केन्द्रित करता रहता है। जिस बात पर आप अपना मन केन्द्रित (फोकस) करते हो वही बात आपके जीवन में जडें मजबूत करती है। इसलिए मानव को चाहिए कि वह

‘कॉन्शसली करेक्ट’ - २ (Consciously Correct - 2) - Aniruddha Bapu‬ Hindi‬ Discourse 04 Dec 2014

‘कॉन्शसली करेक्ट’ – २ (Consciously Correct – 2) सुधार की प्रक्रिया जीवन में घटित करने के लिए मानव को मन को अनुशासन में रखना पडता है। ‘कॉन्शसली इन्करेक्ट’(Consciously Incorrect) इस स्थिति से ‘कॉन्शसली करेक्ट’(Consciously correct) इस स्थिति तक मानव को जाना चाहिए। हर एक बात को ‘कॉन्शसली करेक्ट’ करने का अभ्यास निरंतर करते रहनेवाला मानव धीरे धीरे अपने आप ‘अन्कॉन्शसली करेक्ट’(Unconsciously correct) इस स्थिति तक पहुंच जाता है। ‘कॉन्शसली करेक्ट’

कॉन्शसली इन्करेक्ट (Consciously Incorrect) - Aniruddha Bapu‬ Hindi‬ Discourse 04 Dec 2014

कॉन्शसली इन्करेक्ट (Consciously Incorrect) मानव को स्वयं में सुधार करने का प्रयास करते रहना चाहिए। अभानावस्था में गलती (अनकॉन्शसली इन्करेक्ट) इस स्थिति से उभरकर मानव को चाहिए कि वह उससे क्या गलत हो रहा है यह जानकर, गलती का स्वीकार कर ‘कॉन्शसली इन्करेक्ट’ (Consciously Incorrect) इस स्थिति तक प्रगति करें। मानव के हाथों हो रही गलती का और उसमें सुधार करना आवश्यक है इस बात का मानव को एहसास होना

अभानावस्था में गलती (अनकॉन्शसली इन्करेक्ट) (Unconsciously Incorrect) - Aniruddha Bapu‬ Hindi‬ Discourse 04 Dec 2014

अभानावस्था में गलती (अनकॉन्शसली इन्करेक्ट) (Unconsciously Incorrect) मानव के जीवन में किसी भी बीमारी (disease) का, संकट का, अनुचितता का निर्माण होने की पहली स्थिति है- अभानावस्था में गलती (अनकॉन्शसली इन्करेक्ट / Unconsciously Incorrect) । मानव से जब गलती हो रही होती है और ‘वह गलती कर रहा है’ इस बात का उसे एहसास तक नहीं होता, तब उसकी उस स्थिति को कहते हैं- अभानावस्था में गलती (अनकॉन्शसली इन्करेक्ट /

श्रीसूक्ताच्या पहिल्या ऋचेचा अर्थ - भाग १३ (The Meaning Of The First Rucha Of Shree Suktam - Part 13) - Aniruddha Bapu‬ ‪Marathi‬ Discourse 16 April 2015

श्रीसूक्ताच्या पहिल्या ऋचेचा अर्थ – भाग १३ (The Meaning Of The First Rucha Of Shree Suktam-Part 13) भारतवासीयांच्या जीवनात सुवर्ण (gold) आणि रौप्य (silver) यांचे स्थान प्राचीन काळापासून अबाधित आहे आणि ऋषिसंस्थेने भारतीय समाजजीवन सुन्दर रित्या घडवले आहे. (Ramayan) रामायणकाळातील ऋषि हे राजसत्तेसमोर लाचार झालेले नाहीत, हे आम्ही पाहतो. या ऋषिसंस्थेने भारतीय समाजास प्रपंच-परमार्थ दोन्ही सुन्दर रित्या करण्यासंबंधी मार्गदर्शन केले. जातवेद हा मूळ ऋषि आहे आणि पुरोहितही. श्रीसूक्ताच्या पहिल्या ऋचेत

श्रीसूक्ताच्या पहिल्या ऋचेचा अर्थ- भाग १२ (The Meaning Of The First Rucha Of Shree suktam - Part 12) - Aniruddha Bapu‬ ‪Marathi‬ Discourse 16 April 2015

श्रीसूक्ताच्या पहिल्या ऋचेचा अर्थ- भाग १२ (The Meaning Of The First Rucha Of Shree suktam-Part 12) विविध प्रकारचे सुवर्ण (सोने)(gold) आणि रजत (चांदी)(silver) ‘माझ्या जातवेदा! माझ्या श्रीमातेला माझ्यासाठी माझ्या जीवनात, माझ्या क्षेत्रात घेऊन ये’, असे आवाहन जातवेदास म्हणजेच त्रिविक्रमास करण्याबाबत माता लोपामुद्रा श्रीसूक्ताच्या पहिल्या ऋचेद्वारे आम्हाला सांगत आहे. माझ्यासाठी, माझ्या आयुष्यातील प्रश्न सोडवण्यासाठी, संकटाचे रूपान्तर संधीत करण्यासाठी, हित करण्यासाठी जे मूलभूत सामर्थ्य लागते, ते सामर्थ्य सुवर्ण-रजत या मूलभूत तत्त्वांमध्ये आहे.