परमेश्वर

दूसरे दिन पुस्तकों की दुकान में गया और ‘ऑरगॅनॉन ऑफ मेडिसीन’ की किताबें खरीद कर ले आये। कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद पहली बार ही यह पुस्तक खोलने वाला था। परन्तु होमियोपॅथी सिखने के लिये, होमियोपॅथी का अर्थ समझने के लिये, यह सब समझने के लिये ऑरगॅनॉन ऑफ मेडिसीन की ज़रूरत पड़ती है। होमियोपॅथी डॉक्टर इस पुस्तक को होमियोपॅथी का धर्मग्रंथ ही मानते हैं। फिर प्रारंभ से ही पुस्तक पढ़ने की शुरुआत की। परन्तु बाद में ध्यान आया कि यदि सब कुछ पढ़ते बैठा़ तो काफी समय निकल जायेगा। इसलिये जितना पहले बताना है उतना ही पढ़ते हैं उसी के अनुसार तैयारी में लग गया। परन्तु क्लास कितनी देर तक चलेगी, किस को पता था। और कितने टॉपिक लेने है यह भी कौन जानता था। मैंने सोचा, ठी़क है जितना हो सकेगा उतना करेंगे। (बाकी परमेश्वर पर छोड़ देते हैं)।

गुरुवार आ गया। शाम ६ बजे का समय पहले से ही तय किया जा चुका था। अत: मैं ६ बजने से थोड़ा पहले ही जा पहुँचा। बापू तभी उपासना करके ऊपर आये थे। (दूसरे मंजिल पर जहाँ बापू का रुम है) और फिर थोड़ी देर बाद मुझे अंदर बुलाया गया। वो मेरा पहला ही दिन था। अत: मन में लगातार एक ही शब्द गूंज रहा था जो मैंने पहली कक्षा में पाठ़ पढ़ते समय सुना था, आज स्कूल का पहला दिन और मन में मैं ध्यानमंत्र बोलकर मैंने शुरुआत की। सर्वप्रथम बापू को होमियोपॅथी के बारे में जानकारी दी। होमियोपॅथी में मुख्यत: चार विषयों का अभ्यास किया जाता है।

१) ऑरगॅनॉन ऑफ मेडिसीन जिस में होमियोपॅथी के बारे में जानकारी दी होती है।
२) होमियोपॅथीक मटेरियाम मेडिका अर्थात जिसमें होमियोपॅथीक औषधियाँ अल्फाबेटीकली दी गयी होती है और उनके लक्षणों की जानकारी इस पुस्तक में दी गयी है।
३) होमियोपॅथीक फार्मसी जिसमें यह बताया जाता है कि औषधियाँ कैसे और किससे बनायी जाती है।
४) होमियोपॅथीक रिपर्टरी जिस में बीमारी के लक्षण दिये हुये होते हैं और प्रत्येक लक्षण के सामने उसकी दवाईयों की फेहरिस्त (लिस्ट) होती है।
और इस तरह हमने ऑरगॅनॉन ऑफ मेडिसीन विषय की शुरुआत की।

‘मैं हूँ’ यह त्रिविक्रम का मूल नाम है - भाग २ (‘ I Am ’ Is Trivikram's Original Name - Part 2) - Aniruddha Bapu‬ Hindi‬ Discourse 01 Jan 2015

‘मैं हूँ’ यह त्रिविक्रम का मूल नाम है – भाग २ (‘ I Am ’ Is Trivikram’s Original Name – Part 2) मानव को स्वयं के बारे में कभी भी नकारात्मक रूप में नहीं सोचना चाहिए। भगवान से कुछ मांगते समय भी सकात्मक सोच ही होनी चाहिए। ‘भगवान आप मेरे पिता हो और मैं आपका पुत्र हूं। आप ऐश्वर्यसंपन्न हो, ऐश्वर्यदाता हो इसलिए मेरे पास भी ऐश्वर्य है, आप उसे

‘मैं हूँ’ यह त्रिविक्रम का मूल नाम है (‘I Am’ Is Trivikram's Original Name) - Aniruddha Bapu‬ Hindi‬ Discourse 01 Jan 2015

‘मैं हूँ’ यह त्रिविक्रम का मूल नाम है (‘I Am’ Is Trivikram’s Original Name) आदिमाता चण्डिका और उनके पुत्र त्रिविक्रम (Trivikram) से कुछ मांगते समय श्रद्धावान को सकारात्मक (पॉझिटिव्ह) रूप से मांगना चाहिए। वेदों के महावाक्य यही बताते हैं कि हर एक मानव में परमेश्वर का अंश है। यदि मानव में परमेश्वर का अंश है तो उसे नकारात्मक रूप से मांगने की आवश्यकता ही नहीं है। ‘मैं हूँ’ यह त्रिविक्रम

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ज्ञान म्हणजे काय (What Is Knowledge) प्रपंच-परमार्थ दोन्ही एकाच वेळेस सुन्दर रित्या संपन्न करण्यासंबंधी ऋषिसंस्थेने भारतीय समाजास सदैव मार्गदर्शन केले. अखिल विश्वाच्या कल्याणासाठी चिन्तन करत असताना ब्रह्मर्षिंसमोर त्या आदिमाता चण्डिकेने जे ज्ञानभांडार खुले केले, तेच वेदरूपात प्रकटले. परमेश्वराने निर्माण केलेले जे जे काही जसे जसे आहे ते तसेच्या तसे जाणून घेऊन, तसेच त्यामागील परमेश्वरी हेतु जाणून घेऊन त्या माहितीचा पवित्र मार्गाने उपयोग अखिल विश्वाच्या कल्याणासाठी कसा करायचा याची परिपूर्ण जाणीव

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‘मी आहे’ हे त्रिविक्रमाचे मूळ नाम आहे (‘ I Am ’ Is The Original Name Of Shree Trivikram) माणूस बरेचदा ‘मी असाच आहे, मी तसाच आहे’ अशा प्रकारच्या बोलांनी स्वत:च स्वत:बद्दल नकारात्मक विधाने करत असतो. पण मानवाने हे लक्षात घ्यायला हवे की ‘मी आहे’(I Am) हे त्रिविक्रमाचे मूळ नाम आहे. म्हणूनच कमीत कमी भगवंतासमोर बोलताना तरी या वाक्याचा उचित वापर करण्याची काळजी मानवाने घ्यायला हवी. ‘मी आहे’ या त्रिविक्रमाच्या मूळ

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सत्‌ – चित्‌ -आनन्द क्या हैं ? ( What is Sat – Chit – Anand? ) भगवान हैं यह जानने से, महसूस करने से, पहचानने से जो आनन्द होता हैं वहीं भगवान का सहीं स्वरुप हैं। इसके बारे में परमपूज्य सद्गुरू श्री अनिरुद्ध बापूनें अपने २८ नवंबर २०१४ के हिंदी प्रवचन में बताया, जो आप इस व्हिडिओ में देख सकते हैं। ॥ हरि ॐ ॥ ॥ श्रीराम ॥ ॥ अंबज्ञ

Sadguru Aniruddha Bapu's Upasana

At present, we all Shraddhavans are aware that Param Poojya Sadguru Aniruddha Bapu has been unable to come for delivering pravachans at Shri Harigurugram since last 3 Thursdays. Many Shraddhavans have enquired about Bapu with love and devotion as they were unable to seek Param Poojya Sadguru Aniruddha Bapu ‘s darshan from last 3 Thursdays. Accordingly I would like to inform all Shraddhavans that Bapu is engaged in severe Upasana which

त्रिविक्रमाचे रसायनशास्त्र (Trivikram's Chemistry) - Aniruddha Bapu Marathi Discourse 1 May 2014

परम पूज्य सद्‌गुरु श्री अनिरुद्ध बापुंनी गुरूवार दिनांक १ मे २०१४ रोजी च्या मराठी प्रवचनात श्री हरिगुरुग्राम येथे त्रिविक्रमाच्या रसायनशास्त्राबाबत(Trivikram’s Chemistry) सांगताना मिठाचे उदाहरण देऊन त्रिविक्रमाची अचिंत्य लीला स्पष्ट केली आणि श्रध्दावानाने त्रिविक्रमाचे हे रसायनशास्त्र जाणून त्याला प्रतिसाद कसा द्यावा? कुणासाठी काय उचित आहे आणि ते कधी त्याला द्यायचे हे तो त्रिविक्रमच जाणतो व तो ते करत असतो. त्यामुळे त्रिविक्रमाला अटी न घालता त्याने जे दिले आहे त्याचा प्रेमाने स्वीकार

विश्वासाचे गुण (Marks of Faith) - Aniruddha Bapu Marathi Discourse 27 Mar 2014

परम पूज्य सद्‌गुरु श्री अनिरुद्ध बापुंनी गुरूवार दिनांक २७ मार्च २०१४ रोजी च्या मराठी प्रवचनात श्री हरिगुरुग्राम येथे भगवंताबद्दल कुठलाही विकल्प मनात येऊ न देता ठेवता आणि स्वतःचा भगवंतावरील विश्वास जराही डगमगु न देता. मानवाने भगवंतावरील विश्वास अधिकाधिक वाढवला पाहिजे, कारण शेवटी ह्या विश्वासावरच सर्व काही अवलंबून असते. माणसाच्या जीवनात प्रश्नपत्रिकेत त्याला मिळणारे गुण इतर कुठल्याही गोष्टीवर अवलंबून नसून केवळ विश्वासावरच अवलंबून असतात, हे बापूंनी स्पष्ट केले. जे आपण ह्या

त्रिविक्रम आणि विज्ञान (Trivikram & Science) -  Aniruddha Bapu Marathi Discourse 27 Mar 2014

परम पूज्य सद्‌गुरु श्री अनिरुद्ध बापुंनी गुरूवार दिनांक २७ मार्च २०१४ रोजी च्या मराठी प्रवचनात श्री हरिगुरुग्राम येथे त्रिमितीच्या पलीकडे राहून त्रिमितीवर सत्ता गाजवणारा त्रिविक्रम ज्या श्रध्दावानाचा त्याच्यावर पूर्ण विश्वास असतो, त्याच्या जीवनात अचिंत्यलीला घडवून आणतो. त्रिविक्रमाच्या लीलांचा कार्यकारणभाव जाणता येत नाही. त्रिविक्रम आणि विज्ञान(Trivikram & Science) यातील संबंधाबाबत बापूंनी सांगितले. जे आपण ह्या व्हिडिओमध्ये पाहू शकतो. ॥ हरि ॐ ॥ ॥ श्रीराम ॥ ॥ अंबज्ञ ॥

लीला की व्याख्या (Definition Of Leela)

परम पूज्य सद्‌गुरु श्री अनिरुद्ध बापुंनी गुरूवार दिनांक २७ मार्च २०१४ रोजी च्या मराठी प्रवचनात श्री हरिगुरुग्राम येथे श्री साईसच्चरितातील लोहारणीची कथा आणि चांदोरकरांची कथा याद्वारे भगवंत त्रिमितीला वाकवून स्वलीलेने भक्ताला कसा सहायक होतो हे बापूंनी सांगितले. पण हे होण्यासाठी विश्वास महत्त्वाचा आहे, “एक विश्वास असावा पुरता कर्ता हर्ता गुरु ऐसा” हा सद्‌गुरु विश्वास ज्या भक्ताच्या ह्द्यात असतो त्या भक्ताला सद्‌गुरुतत्त्वाच्या अचिंत्य लीला अनुभवास येतात असे बापू म्हणाले. जे आपण