दत्तगुरु

2. स्वस्तिवाक्य

  • युद्ध माझा राम करणार। समर्थ दत्तगुरु मूळ आधार।
    मी सैनिक वानर साचार। रावण मरणार निश्चित॥

  • युद्ध करेंगे मेरे श्रीराम। समर्थ दत्तगुरु मूल आधार।
    मैं सैनिक वानर साचार। रावण मरेगा निश्चित ही॥

  • My Ram will wage war;

    Self-sufficient, Dattaguru is the Origin, the Basis;

    A soldier, I am a vanar in word and in deed; Ravan will die, yes he will.

  • युद्धकर्ता श्रीराम: मम। समर्थ: दत्तगुरु: मूलाधार:।

    साचार: वानरसैनिकोऽहम्। रावणवध: निश्चित:॥

6. आज्ञा चक्र

आज्ञा चक्रDSC_5055

1. गायत्रीमंत्र – ॐ भू: भुव: स्व:। ॐ महाप्राणाय विद्महे। आञ्जनेयाय धीमहि। तन्नो हनुमान् प्रचोदयात्॥

2. स्वस्तिवाक्य

  • साक्षात श्रीहनुमन्त माझा मार्गदर्शक आहे आणि माझे बोट धरून चालत आहे.
  • साक्षात् श्रीहनुमानजी मेरे मार्गदर्शक हैं और वे मेरी उँगली पकड़कर चल रहे हैं।
  • Shreehanumanta Himself is my guide and He walks holding me by the finger.
  • साक्षात् श्री हनुमान् मम मार्गदर्शक: तथा स: मम अंगुलं धृत्वा चलति।
  •  7. सहस्रार चक्रसहस्रार चक्रDSC_5054
    1. गायत्रीमंत्र – ॐ भू: भुव: स्व:। ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे। सर्वशक्त्यै च धीमहि। तन्नो जगदम्ब प्रचोदयात्॥
    2. स्वस्तिवाक्य
    • मी परिपूर्ण आहे. मी सुशान्तमन-दुर्गादास आहे.
    • मैं परिपूर्ण हूँ। मैं सुशान्तमन-दुर्गादास हूँ।
    • I am complete and sufficient.I am a calm, serene and peaceful server of the Mother Durga.
    • अहं परिपूर्ण:। अहं सुशान्तमनोदुर्गादास:।

    मातृवाक्य :-

    • माझ्या बालका, मी तुझ्यावर निरंतर प्रेम करीत राहते.

    • मेरे बच्चे, मैं तुम से निरंतर प्रेम करती रहती हूँ।

    • My dear child, I love You always.

    • मम बालक, अहं त्वयि निरन्तरं स्निह्यामि।

सप्तचक्र उपासना - अधिक सुलभतेने कशी करावी?

[dropcap]गु[/dropcap]रुवार, दि. १५ ऑक्टोबर २०१५ रोजी परमपूज्य सद्‌गुरु बापूंनी “श्रीशब्दध्यानयोग” ही, श्रद्धावानांचा अभ्युदय (सर्वांगीण विकास) घडवून आणणारी सप्तचक्रांची उपासना श्रीहरिगुरुग्राम येथे सुरु केली. त्यानंतर संस्थेतर्फे ह्या उपासनेची माहिती देणारी पुस्तिकाही श्रद्धावानांकरिता उपलब्ध करण्यात आली. पुस्तिकेत दिलेल्या माहितीनुसार, श्रद्धावान पुस्तिकेतील चक्रांच्या प्रतिमेकडे पाहता पाहता त्या संबंधित चक्राचा गायत्री मंत्र आणि स्वस्तिवाक्य म्हणत घरी उपासना करू शकतात. गुरुवार, दि. २१ जानेवारी २०१६ रोजी आपल्या पितृवचनामध्ये सद्‌गुरु बापूंनी अकारण कारुण्याची पुन्हा एकदा प्रचिती

सप्तचक्र उपासना - अधिक सुलभतासे कैसे करे?

[dropcap]गु[/dropcap]रुवार, दि. १५ अक्तूबर २०१५ को परमपूज्य सद्‌गुरु बापू ने “श्रीशब्दध्यानयोग” यह, श्रद्धावानों का अभ्युदय (सर्वांगीण विकास) करानेवाली सप्तचक्रों की उपासना श्रीहरिगुरुग्राम में शुरू की। उसके बाद, इस उपासना की जानकारी देनेवाली पुस्तिका भी संस्था की ओर से श्रद्धावानों के लिए उपलब्ध करायी गयी। पुस्तिका में दी गयी जानकारी के अनुसार, श्रद्धावान पुस्तिका में दी गयीं चक्रों की प्रतिमाओं की ओर देखते हुए उस संबंधित चक्र का गायत्री मंत्र और

Aniruddha Bapu told Shuddha swadharm pillars - Shreeshabdadhyaanyog, Shreeshwasam, Swastikshem Sawadam, Shree Gurukshetram Mantra in Pitruvachanam 22 Oct 2015

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २२ अक्तूबर २०१५ के पितृवचनम् में ‘शुद्ध स्वधर्म स्तंभ’ – ‘श्रीशब्दध्यानयोग, श्रीश्वासम्‌, श्रीस्वस्तिक्षेम संवादम्‌, श्रीगुरुक्षेत्रम्‌ मंत्र’ के बारे में बताया। ‘श्रीशब्दध्यानयोग इस स्तंभ के बारे में बताने के बाद अन्य स्तंभों की जानकारी देत् हुए बापू ने कहा- श्रीश्वासम्‌! हम लोग श्रीश्वासम्‌ सुनते हैं, वहॉ जो अपने आप जो ब्रीदींग होता है, जब तब सुन रहे होते हैं, उस ब्रीदिंग से हम लोग जो

Aniruddha Bapu pitruvacahanam

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १५ अक्तूबर २०१५ के पितृवचनम् में श्रीशब्दध्यानयोग- आज्ञाचक्र और सहस्रार चक्र उपासना के बारे में जानकारी दी।   आज्ञाचक्र के स्वामी स्वयं महाप्राण हनुमानजी है, अत एव आज्ञाचक्र प्रतिमा का पूजन महाप्राण सूक्तों से होगा। यह महाप्राण सूक्त बहुत ही सुंदर है। छांदोग्य उपनिषद्‌ में बहुत सुंदर महाप्राण सूक्त है, मुख्य प्राण को इतनी आसानी से कहीं समझाया नहीं गया है, जितना कि छांदोग्य

श्रीशब्दध्यानयोग-विधि

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने १५ अक्तूबर २०१५ के पितृवचनम् में श्रीशब्दध्यानयोग के बारे में जानकारी दी।   अनिरुद्ध बापू ने पितृवचन के दौरान यह बताया कि ‘श्री’ यानी आदिमाता। आदिमाता अदिति, जो परमेश्वर से दत्तगुरु से अभिन्न स्वरूप में रहती है, उसे अदिति कहते हैं, श्री आदिमाता के प्रथम स्वरूप को अदिति कहते हैं, वह जब प्रकट होती है तो उसे गायत्री कहते हैं।   यह जो

सहस्रार चक्र

सप्तचक्रांचे अ) गायत्रीमंत्र व ब) स्वस्तिवाक्ये :- 1. मूलाधार चक्र         गायत्रीमंत्र – ॐ भू: भुव: स्व:। ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि। तन्नो दन्ति: प्रचोदयात्॥     2. स्वस्तिवाक्य – मूलाधारगणेशाच्या कृपेमुळे मी संपूर्णपणे सुरक्षित आहे. मूलाधारगणेश की कृपा से मैं संपूर्ण रूप से सुरक्षित हूँ। By the grace of the MuladharGanesh, I am completely safe and secure मूलाधारगणेशस्य कृपया अहं संपूर्णत: सुरक्षित:।  2. स्वाधिष्ठान चक्र    

Aniruddha Bapu pitruvacahanam

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १५ अक्तूबर २०१५ के पितृवचनम् में ‘श्रीशब्दध्यानयोग जीवन में सुसंगति एवं सन्तुलन लाता है’ इस बारे में बताया।   अनिरुद्ध बापू ने पितृवचन के दौरान यह बताया कि हम जिन व्यक्तियों के साथ रहते हैं, जिन व्यक्तियों के साथ हमारा रोजमर्रा का काम होता है, उनके साथ हमारे सप्तचक्र जुडे हुए होते हैं। इस लिए जिस घर में यह balance नहीं है, उस घर

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  हरि ॐ, श्रीराम, अंबज्ञ. पहिल्यांदा आपल्याला आता श्रीसूक्त ऐकायचं आहे. श्रीसूक्त…वेदांमधील एक अशी अनोखी देणगी आहे की जी ह्या…आपण उपनिषदामध्ये आणि मातृवात्सल्यविंदानम् मध्ये बघितलंय की लोपामुद्रेमुळे आपल्याला मिळाली…महालक्ष्मी आणि तिची कन्या लक्ष्मी…ह्या मायलेकींचं एकत्र असणारं पूजन, अर्चन, स्तोत्र, स्तवन…सगळं काही…म्हणजे हे ‘श्रीसूक्तम्’. तर आज पहिल्यांदा…फक्त आजपासून सुरु करायचं आहे आपल्याला ‘श्रीसूक्तम्’. आपले महाधर्मवर्मन म्हणणार आहेत.   हरि ॐ. अर्थ आज आपल्याला कळला नसेल…काही हरकत नाही. पण ह्या आईचं…माझ्या आदिमातेचं