ई-मेल

ई-मेल – डाटा सेव्ह करने का माध्यम :
जी हाँ, ई-मेल डाटा संग्रहण (सेव्ह करना) का माध्यम बन सकता हैं। हमने देखा ई-मेल कम्पोज करते समय हम महत्त्वपूर्ण फाईल्स भी अटॅच करके भेज सकते हैं। तो अपने संगणक की महत्त्वपूर्ण फाईल्स का बॅक-अप ई-मेल अटॅचमेन्ट रूप में क्यों न ले? यह अत्यन्त सुंदर संकल्पना हैं व बहुत से युजर्स इसका उपयोग करते हैं।

  • एक नया ई-मेल कम्पोज करते समय अपने कॉम्प्युटर की महत्त्वपूर्ण फाईल्स अटॅचमेन्ट के स्वरूप में ई-मेल द्वारा भेजे।
  • यह ई-मेल स्वयं को ही भेजे।
  • अब फोल्डर संकल्पना का उपयोग कर बॅक-अप फोल्डर बनाए व ई-मेल इनबॉक्स से निकालकर यहाँ स्थानांतरित करें।
  • संगणक के खराब हो जाने की स्थिती में यह बॅक-अप डाटा बहुत उपयोगी सिद्ध होगा।

दो या अधिक ई-मेल अकाऊन्ट :

दो या अधिक ई-मेल क्यों खोलना? एक से मेरा काम तो होता है तो नए अकाऊन्ट का अतिरिक्त भार क्यों उठाना? कभी-कभी व्यक्तिगत कामों तथा व्यवसायिक कामों के लिए अलग-अलग अकाऊन्ट का होना लाभप्रद होता है।

  • एक ही कंपनी के सारे ई-मेल अकाऊन्ट हो यह आवश्यक नहीं हैं।
  • एक जी-मेल तो दूसरा याहू व तिसरा हॉटमेल हो सकता हैं।
  • सोशल नेटवर्किंग साईट अकाऊन्ट हेतु ई-मेल एड्रेस होना आवश्यक हैं इस हेतु हम एक ई-मेल एड्रेस का उपयोग कर सकते हैं । जैसे ट्विटर, फेसबुक आदी।
  • यही ई-मेल हम मित्रों व रिश्तेदारों को दे सकते हैं। यह एक तरह का सोशल नेटवर्किंग ही हैं।
  • ऑफिस या व्यवसायिक कार्यों हेतु एक अलग अकाऊन्ट का उपयोग करना चाहिए
  • इन्टरनेट बॅकिंग, स्टॉक मार्केट, ई-कॉमर्स साईट पर अकाऊन्ट बनाना हो तो ई-मेल एड्रेस आवश्यक हैं। इससे हमारे आर्थिक व्यवहार संबंधित ई-मेल हमें इस अकाऊन्ट में भेजें जाते हैं। तो आर्थिक कार्यभार हेतु हम तीसरा ई-मेल एड्रेस का उपयोग कर सकते हैं।
ई-मेल – भाग ५

पिछले लेख में हम ने ई-मेल की संकल्पना को समझा। ई-मेल इस्तेमाल करते समय सामनेवाले व्यक्ति से सीधे संपर्क नहीं होता। इसलिए उस व्यक्ति के समक्ष हम खुद को कितनी अच्छी तरह से पेश कर सकते हैं यह बात मायने रखती है। इसी को ई-मेल एटिकेट्स (शिष्टाचार) कहा जाता है। इन शिष्टाचारों द्वारा यह जाना जाता है कि हम कितने प्रभावी ई-मेल यूजर हैं। यह कहना कतई गलत नहीं होगा

ई-मेल – भाग ४

ई-मेल फोल्डर का प्रभावी उपयोग : मान ले हम एक ही साथ ४ प्रोजेक्टस्पर काम कर रहे हैं व इन चारों प्रोजेक्ट से संबंधित ई-मेल हमारे इनबॉक्स में आती हैं। समय के साथ-साथ मेल्स् की संख्या भी बढ़ती हैं व पुराने मेल्स् ढूंढ़ना कठीन होता जाता है, तब मेल्स् का प्रकारानुसार विभाजन आवश्यक हो जाता है व यही फोल्डर व्यवस्था काम आती हैं। प्रोजेक्ट अनुसार फोल्डर बनाकर वहीं मेल्स् को

ई-मेल – भाग ३

ई-मेल सर्च :     भेजे व प्राप्त होनेवाले मेल्स की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जाती हैं। ऐसे में पुराना मेल खोजना हो तो ई-मेल सर्च समय की बर्बादी से बचाता है। इस के दो भाग हैं – बेसिक व एडवान्सड। जी-मेल के होम-पेज पर एक लम्बा चौड़ा सर्च बार होता है। बेसिक सर्च : यदि हमें फेसबुक शब्द वाला ई-मेल ढूंढ़ना हैं – सर्च बार में फेसबुक लिखे। व

ई-मेल - भाग २

थीम्स : मूल ई-मेल का इन्टरफ़ेस सफ़ेद होता है । इस में रंग संगति व पृष्ठचित्र बदला जा सकता हैं । सबसे पहले जी-मेल के होम-पेज में आए । अगर चॅट ऑफ करना है, तो उसके बाजूवाले रेडिओ बटन पर क्लिक करें । इसके बाद सेव्ह चेंजेस्का बटन गहरा होगा वहाँ क्लिक करे । अब होम-पेज पर गुगल हँगआऊटस् बाँए निचले कोने में दिखना बंद हो जाएगा । यहाँ चॅट ऑन

ई-मेल – भाग १

संदेशो के लेनदेन पर पहले भी संसार चलता था, आज भी चल रहा है, ओर आगे भी चलता रहेगा। संदेश का समय रहते पहुँचना बहुत आवश्यक है। यद्यपि प्राचीन व आधुनिक संदेश माध्यमों में काफी अन्तर हैं तथापि मूल संकल्पना वहीं हैं। प्राचीन काल में संदेश वहन का कार्य राजा महाराजा के दूत किया करते थे। जिस में बहुत समय लगता था। धीरे-धीरे समय के साथ-साथ यातायात के साधनों में