आयएस

आयएस का इरादा है कि, कुछ समय पहले अल कायदा और तालिबान के कब्जे में जो अफगाणिस्तान और अंजरपंजर ढीले हो चुका पाकिस्तान को वह अपने कब्जे में कर ले। ’आयएस’ के आतंकी अफगाणिस्तान-पाकिस्तान में घुसकर इन दोनों देशों की सीमाओं पर अपना तंबू ठोके हुए तालीबान के हक्कानी गुट और अल कायदा के लिए बडी चुनौती बन रहे हैं। दावा किया जाता है कि, ‘तेहरिक-ए-तालिबान’ का ‘शाहिदुल्लाह शाहीद’ गुट ’आयएस’ में शामिल हो चुका है। और ऐसी घनी संभावना मानी जाती है कि, तालिबान के अन्य गुट भी उसी का अनुकरण करेंगे।

‘ आयएस ’ ने तो अफगाणिस्तान में हमले करने शुरु कर दिए हैं और पाकिस्तान के वायव्य सीमाभाग से राजधानी इस्लामाबाद स्थित प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के प्रशासकीय निवासस्थान के पास वाले इलाके तक ’ आयएस ’ के परचे पहुंच गए हैं। पाकिस्तान के पेशावर और अन्य कुछ शहरों की दीवारें ’ आयएस ’ के संदेश से पुती हुई हैं। पाकीस्तान में ’आयएस’ के समर्थक, हितचिंतकों का बडा गुट बन रहा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शरीफ की वर्चस्व वाले पंजाब प्रांत में भी ’आयएस’ ने अपना प्रचार शुरु कर दिया है।

विश्व को थर्रानेवाली ‘ आयएस ’ - भाग 3

यह जस्मिन रिवोल्यूशन या अरब स्प्रिंग देखते ही देखते ट्युनिशिया से इजिप्त, लिबीया, सिरिया इन देशों में तूफान की तरह फैल गया। हालांकि यह बहुत ही भिन्न विषय है, मगर ट्युनिशिया, इजिप्त और लिबिया इन देशों में कई दशकों से जनता को पैरोंतले रौंदनेवाले हुकूमशाहों की सल्तनत इस आंदोलन की वजह से और उसके बाद खूनी संघर्ष की वजह से पलट गई। सीरिया में अस्साद सल्तनत के विरोध में जारी

विश्व को थर्रानेवाली ‘ आयएस ’ - भाग २

’आयएस’ का इरादा है कि, कुछ समय पहले अल कायदा और तालिबान के कब्जे में जो अफगाणिस्तान और अंजरपंजर ढीले हो चुका पाकिस्तान को वह अपने कब्जे में कर ले। ’आयएस’ के आतंकी अफगाणिस्तान-पाकिस्तान में घुसकर इन दोनों देशों की सीमाओं पर अपना तंबू ठोके हुए तालीबान के हक्कानी गुट और अल कायदा के लिए बडी चुनौती बन रहे हैं। दावा किया जाता है कि, ‘तेहरिक-ए-तालिबान’ का ‘शाहिदुल्लाह शाहीद’ गुट ’आयएस’

विश्व को थर्रानेवाली ‘ आयएस ’ – भाग १ (barbaric isis that threats the world)

 ​ अमेरीका ने इराक युद्ध जीत लिया, ऐसी गर्जना राष्ट्रपति बराक ओबामा ने सन २०११ के दिसम्बर मास में की थी। अमेरीका ने इराक से नौं साल बाद सेना को वापस बुलाया था। ४५०० सैनिकों का बलिदान और अरबों डॉलर खर्च करके अमेरीका ने उन नौं सालों में क्या हासिल किया? इस प्रश्न का ‘विजय’ ही एकमात्र उत्तर था। अर्थात अमेरीकी राष्टपति जिसे विजय कहते थे, क्या वह विजय है,