अनिरुद्ध

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महज क्रिया पर से भाव को नहीं जाना जा सकता (Bhaav Can Not Be Judged Only By Action) अन्य किसी को रोता देखकर आने वाले आँसू यह एक प्रकार की अभिव्यक्ति है। लेकिन कोई रो रहा है, तो सिर्फ़ उसकी रोने की उस क्रिया को देखकर उसके भाव के बारे में कहा नहीं जा सकता। महज क्रिया पर से भाव को नहीं जाना जा सकता, बल्कि उस क्रिया के पीछे

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भाव का अभिनय नहीं किया जा सकता (Enactment Of Bhaav Can Not Be Done) हर एक मनुष्य के मन में रहने वाला भाव केवल वह संबंधित मनुष्य ही जानता है। सिर्फ़ तीन साल तक के बच्चे के मन का भाव उस बच्चे की माँ जान सकती है। भाव यह अन्त:करण से उठनेवाला तत्त्व है, भाव को बनाया नहीं जा सकता, भाव का अभिनय नहीं किया जा सकता, इस बारे में

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भाव की व्याख्या (Definition Of Bhaav) किसी भी वस्तु, घटना या व्यक्ति के प्रति मनुष्य के अन्त:करणचतुष्टय से उद्‍भवित होने वाला जो प्रतिसाद, विचार, स्पन्द होता है, उस वस्तु, घटना या व्यक्ति के प्रति मनुष्य जो महसूस करता है, उसे भाव कहते हैं। मनुष्य यह भी अनुभव करता है कि बुद्धि और मन का भाव प्राय: परस्परविरोधी होता है। भाव की व्याख्या (Definition Of Bhaav) के बारे में सद्गुरु श्री

New Year 2015 Best Wishes

नव वर्ष २०१५ च्या शुभेच्छा (New Year 2015 Best Wishes) सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापुंनी ०१-०१-२०१५ रोजीच्या आपल्या प्रवचनात श्रद्धावान मित्रांना नवीन वर्ष २०१५च्या शुभेच्छा (New Year 2015 Best Wishes) दिल्या. हे नवे वर्ष प्रत्येक श्रद्धावानाला पवित्र, सुन्दर, मंगल, सुखमय, शुभ जाईल हे नक्की, या शब्दांत त्यांनी शुभेच्छा दिल्या. बापुंनी श्रद्धावान मित्रांना दिलेल्या शुभेच्छा आपण या व्हिडियोत पाहू शकता. ॥ हरि ॐ ॥ ॥ श्रीराम ॥ ॥ अंबज्ञ ॥

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नव वर्ष २०१५ की शुभकामनाएँ (New Year 2015 Best Wishes) सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापु ने अपने सारे श्रद्धावान मित्रों को अपने ०१-०१-२०१५ के प्रवचन में नये वर्ष २०१५ की शुभकामनाएँ दीं। बापु ने सभी से ‘हॅपी न्यू इयर’(Happy New Year) कहते हुए सारे श्रद्धावानों को इस नये साल में पवित्र सामर्थ्य, यश और सुरक्षा मिलें, यह भी कहा। बापु के द्वारा अपने श्रद्धावान मित्रों को दी गयी शुभकामनाएँ आप इस

अपने जीवन को दूसरों के मत से आकार मत दीजिए ( Don't Shape Your Life By Others’ Opinions ) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 09 Oct 2014

अपने जीवन को दूसरों के मत से आकार मत दीजिए ( Don’t Shape Your Life By Others’ Opinions ) सज्जनों से, आप्तमित्रों से मार्गदर्शन अवश्य लें, लेकिन औरों की राय से स्वयं को मत ढालिए। मेरा जीवन मुझे अपने हिसाब से जीना चाहिए, अपने मत से उसे बनाना चाहिए, यह मानव ध्यान में रखें। अपनी जिंदगी को स्वयं ही आकार देना चाहिए, इस बारे में परम पूज्य सद्गुरु श्री अनिरुद्ध

दूसरों की राय से स्वयं के बारे में निर्णय मत कीजिए (Don't Judge Yourself By Others' Opinions) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 09 Oct 2014

दूसरों की राय से स्वयं के बारे में निर्णय मत कीजिए | Don’t Judge Yourself By Others’ Opinions अन्य लोगों से, उनकी राय से मानव को अपना जीवन नहीं बनाना चाहिए। दूसरों के साथ प्यार से पेश आना, परिजनों के प्रति रहने वालीं अपनी जिम्मेदारियॉं निभाना, आप्तमित्रों से राय लेना यह आवश्यक है, लेकिन स्वयं को दूसरों के हिसाब से ढालना यह मानव के लिए नुकसानदेह होता है। दूसरों की

नकारात्मक विचारों पर काबू रखें (Overcome Negative Thoughts) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 09 Oct 2014

नकारात्मक विचारों पर काबू रखें ( Overcome Negative Thoughts ) हमेशा अपना दुखडा रोते रहने से बच्चों पर भी इस बात का नकारात्मक परिणाम होता है। पॅरेंट्स के द्वारा किया जानेवाला नकारात्मक आचरण और उनकी नकारात्मक सोच बच्चों के मन पर बुरा परिणाम करते हैं। मानव स्वयं ही स्वयं का आधार बनकर जीवन में सकारात्मक सोच रखे, इस बारे में परम पूज्य सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने ०९ अक्टूबर

अपनी कुशलताओं को खोजो ( Discover Your Skills ) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 09 Oct 2014

अपनी कुशलताओं को खोजो ( Discover Your Skills ) मानव को चाहिए कि वह पहले स्वयं की खोज करे। भगवान के द्वारा मानव को दिये गये अच्छे गुणों की खोज मानव को करनी चाहिए। स्वयं में रहने वालीं सकारात्मक बातों को, क्षमताओं को खोजकर भक्ति करके बढाना चाहिए इस बारे में परम पूज्य सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने ०९ अक्टूबर २०१४ के हिंदी प्रवचन में बताया, जो आप इस

समय को बरबाद नहीं करना चाहिए ( Don't Waste Your Time ) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 09 Oct 2014

समय को बरबाद नहीं करना चाहिए ( Don’t Waste Your Time ) जो मानव समय का उचित उपयोग नहीं करता, वही निकम्मा है। समय का उपयोग विकास के लिए करना चाहिए, अपनी क्षमता को बढाना चाहिए। समय का उचित उपयोग करने के बारे में परम पूज्य सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने ०९ अक्टूबर २०१४ के हिंदी प्रवचन में बताया, जो आप इस व्हिडियो में देख सकते हैं l ॥