अनिरुद्ध

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सर्वदृष्ट्या अचूक होण्यामागे लागणे हे क्षितिजाला धरण्यासाठी धावण्याप्रमाणे आहे (Perfection is like chasing the horizon) सर्वदृष्ट्या अचूक असणे म्हणजेच पर्फेक्शन (Perfection) ही गोष्ट माणसाच्या शक्यतेबाहेरची आहे. सर्वदृष्ट्या अचूक असणे हे क्षितिज आहे, कल्पना आहे. श्रद्धावान काल होता त्यापेक्षा आज अधिक विकसित व्हावा यासाठी त्रिविक्रम श्रद्धावानाच्या जीवनात, त्रिविध देहात तीन पावले दररोज चालतच असतो. कालच्या पेक्षा आज मी अधिक कसा विकसित (progress) होईन याकडे लक्ष द्या कारण सर्वदृष्ट्या अचूक होण्यामागे लागणे

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त्रिविक्रम ज्ञान देतो (Trivikram Imparts Knowledge) ज्ञान हे नेहमी बुद्धी, मन आणि कृती या तीन पातळ्यांवर प्रवाहित होणे आवश्यक असते. एखादी गोष्ट बुद्धीला पटली, तरी मनाला पटणे आणि कृतीत उतरणे हेसुद्धा महत्त्वाचे आहे. या तीनही पातळ्यांवर एकत्रितपणे ज्ञान प्रवाहित करणारा त्रिविक्रम (Trivikram) आहे. ज्ञानाच्या तीन पातळ्यांवर त्रिविक्रम (Trivikram) ज्ञान कसे देतो याबद्दल सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या १८ जून २०१५ रोजीच्या प्रवचनात जे सांगितले, ते आपण या व्हिडियोत पाहू शकता. ॥ हरि

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तुम्हारी उपलब्धि नहीं बल्कि तुम्हारा विश्वास निर्णायक साबित होता है (You Are Not Judged By Your Performance, You Are Judged By Your Faith) नववर्ष २०१५ में श्रद्धावानों ने प्रेम के पौधे को बढाने का, तुलना न करने का, न्यूनगंड को जगह न देने का, विकास के लिए हर रोज रात को कम से कम १० मिनट शान्ति से बैठने का संकल्प किया है। तुम कितने बडे बडे काम करते हो

त्रिविक्रम तुमसे प्रेम करते हैं (Trivikram Loves You) - Aniruddha Bapu‬ Hindi‬ Discourse 25 Dec 2014

त्रिविक्रम तुमसे प्रेम करते हैं (Trivikram Loves You) श्रद्धावान को दुष्प्रारब्ध से डरना नहीं चाहिए, किसी भी मुसीबत से हार नहीं माननी चाहिए। आदिमाता चण्डिका और उनके पुत्र त्रिविक्रम से श्रद्धावान को सहायता अवश्य मिलती है। वे श्रद्धावान की हर प्रकार से सहायता करते ही हैं। त्रिविक्रम क्यों हमारे लिए इतना करते हैं? क्योंकि वे प्रेममय हैं। त्रिविक्रम तुमसे निरपेक्ष प्रेम करते हैं, इस बारे में परमपूज्य सद्गुरू श्री अनिरुद्ध

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ज्ञान म्हणजे काय (What Is Knowledge) प्रपंच-परमार्थ दोन्ही एकाच वेळेस सुन्दर रित्या संपन्न करण्यासंबंधी ऋषिसंस्थेने भारतीय समाजास सदैव मार्गदर्शन केले. अखिल विश्वाच्या कल्याणासाठी चिन्तन करत असताना ब्रह्मर्षिंसमोर त्या आदिमाता चण्डिकेने जे ज्ञानभांडार खुले केले, तेच वेदरूपात प्रकटले. परमेश्वराने निर्माण केलेले जे जे काही जसे जसे आहे ते तसेच्या तसे जाणून घेऊन, तसेच त्यामागील परमेश्वरी हेतु जाणून घेऊन त्या माहितीचा पवित्र मार्गाने उपयोग अखिल विश्वाच्या कल्याणासाठी कसा करायचा याची परिपूर्ण जाणीव

त्रिविक्रम हमें सभी प्रकार की बीमारियों से मुक्त करता है (Trivikram Heals All Our Diseases) - Aniruddha Bapu‬ Hindi‬ Discourse 25 Dec 2014

त्रिविक्रम हमें सभी प्रकार की बीमारियों से मुक्त करता है (Trivikram Heals All Our Diseases) शरीर, मन को आवश्यक रहनेवाली शक्तियों में से एक शक्ति है, निरोगीकरण शक्ति यानी द हीलिंग पॉवर। इस शक्ति की आपूर्ति करता है- त्रिविक्रम । शरीर, मन के साथ साथ धन, परिवार, कार्य आदि अनेक क्षेत्रों में रहनेवाली बीमारियों को ठीक करने के लिए इस हीलिंग पॉवर की मानव को जरूरत होती है। त्रिविक्रम हमें

Bapu’s visit to Nashik

   Our beloved Sadguru, Param Pujya Aniruddha Bapu visited Shri Guruji Rugnalaya managed by the institute, ‘Dr. Babasaheb Ambedkar Vaidyakiya Pratishthan’. During this visit, Bapu visited the ICU, Dialysis Room, General Ward, Special Rooms, X-Ray, CT Scan, Pharmacy, OPD, Pathology, Cancer Radiation Room and other various sections of the hospital. After this, ‘Special Ayurvedic packages for a healthy lifestyle’ created by the hospital’s Ayurvedic Department, were inaugurated by Bapu at

प्रतिदिन कम से कम दस मिनट तक शान्ति से बैठिए (Sit Quite At Least For 10 Minutes A Day) - Aniruddha Bapu‬ Hindi‬ Discourse 25 Dec 2014

प्रतिदिन कम से कम दस मिनट तक शान्ति से बैठिए (Sit Quite At Least For 10 Minutes A Day) भगवान का मूल रूप निर्गुण निराकार है। सुसन्तुलितता, शान्ति, अचलता यह वह रूप है। सन्तुलितता निर्माण करना मानव के लिए संभव नहीं होता, लेकिन शान्ति से, अचल स्थिति में तो यकीनन ही बैठ सकते हैं। कम से कम दस मिनट हर रोज शान्ति से बैठे रहने से आदिमाता चण्डिका और चण्डिकापुत्र

अचल बन जाओ और भगवान को जान लो (Be Still And Know The God) - Aniruddha Bapu‬ Hindi‬ Discourse 25 Dec 2014

अचल बन जाओ और भगवान को जान लो (Be Still And Know The God) दिन में थोडासा समय निकालकर शान्ति से बैठ जाइए। उस वक्त मन में जो विचार आते रहें उन्हें वैसेही आने दे। ना तो विचारों को काबू करने की कोशिश करें और ना ही मन को काबू करनेकी कोशिश करें। इस तरह अचल स्थिति मे रहनेसे आप भगवान (The God) को जान सकोगे, इस बारे में परमपूज्य

तुम शरीर नहीं हो जिसमें आत्मा है, बल्कि तुम वह आत्मा हो जिसके पास शरीर है  (You Are Not A Human With A Soul But You Are A Soul With A Human Body) - Aniruddha Bapu‬ Hindi‬ Discourse 25 Dec 2014

तुम शरीर नहीं हो जिसमें आत्मा है, बल्कि तुम वह आत्मा हो जिसके पास शरीर है (You Are Not A Human With A Soul But You Are A Soul With A Human Body) मानव ऐसा समझता है कि शरीर में आत्मा है, लेकिन यह गलत है। सच तो यह है कि मूलत: तुम एक आत्मा हो जिसके कार्य के लिए भगवान ने तुम्हें शरीर दिया है। मानव को चाहिए कि