अनिरुद्ध बापू

अनिरुद्ध बापू ने पितृवचन के दौरान यह बताया की, हर किसी के दिमाग में एक सवाल उठता है । कि हम लोग कौनसी प्रार्थना करे, कौनसा जप करे गुरुक्षेत्रम का मंत्र दररोज करना बहुत अच्छी बात है, सुंदर बात है, compulsory नहीं है। वैदिक धर्म की महत्ता है भारतीय धर्म की महत्ता है की compulsory कुछ नही होता। हम हमारे प्यार से करते है।

हमारे ग्रंथराज मे जितने सारे स्तोत्र दिए है मंत्र दिए है कौनसा भी ले सकते है। लेकिन कोई नियमित रहे तो बहुत अच्छा है, कोई एक महिने मे आप ज्यादा करना चाहते है एक महिना कम करना चाहते है कोइ problem नही है। ok लेकिन उसके सान्निध्य मे रहना। सर्वदेवनमस्कार: केशवं प्रति गच्छति | शव याने आकृती जो आकृती कि परे है।

सच्चिदानंद स्वरूप उस स्वरूप के साथ ही उस स्वरूप के पास ही हमारा हर प्रणाम जाता है। उस स्वरूप के पास से ही सारे वरदान आते है। जो हमारे कुल देवताऎ होती है, इष्टदेवताऎ होती है, वासुदेवताऎ, ग्रामदेवताऎ होते है, नगर देवताऎ होती है। ये सब सच्चिदानंद स्वरूप काही विलास है। बाकी कुछ नही है, ऐसे अनिरुद्ध बापू ने कहा

आगे अनिरुद्ध बापू  बोले, पुरी जिंदगी हम हवा अंदर लेते रहते है, 18 times breathing करते है। कितनी हवा लेते है calculate करके देखिय़े। कितनी हवा हमने अंदर ली। तो जान जाऎगे कि इतनी सारी ढेर सारी हवा अंदर ली । फ़िरभी क्या हमारा वजन बढा। क्या हमारे सर पर भार ज्यादा हो गया नही ना? वैसे ही ये सच्चिदानंद स्वरूप का जो स्वत्व है। हमारे इष्ट देवत का जो स्वत्व है जितना ज्यादा ग्रहण करते रहेंगे उतना अच्छा ही है। उससे कभी toxicity or poisoning नही हो सकता। लेकिन हमारे जिवन के लिऎ जो भी साँस लेना आवश्यक है। तो वैसे ही जो जो आवश्यक है, जो जो अच्छा है। जो हमारे जिवन की रक्षा के लिए, हमारे अपनोंकी रक्षा के लिऎ उनके वृध्दी कि लिऎ, उनके उन्नती के लिऎ। जो भी आवश्यक है उन सबका स्विकार करते रहेंगे।

Shivapanchakshari Stotra_Aniruddha Bapu

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ०२ मार्च जनवरी २०१७ के पितृवचनम् में शिवपंचाक्षरी स्तोत्र यह ‘ॐ नमः शिवाय’ इस मंत्र का ही स्पष्टीकरण है’, इस बारे में बताया। ये शिवपंचाक्षरी स्तोत्र क्या करता है, ‘ॐ नमः शिवाय’ इस मंत्र का ही explanation देता है, स्पष्टीकरण करता है। हमें जानना चाहिये कि ये हमें ये तत्व भी सिखाता है कि भाई, प्रार्थना करनी है तो कैसी कि भगवान ही सब

Shivapanchakshari Stotra_Aniruddha Bapu

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ०२ मार्च २०१७ के पितृवचनम् में ‘भय का निर्मूलन करने के लिए शिवपंचाक्षरी स्तोत्र यह बहुत ही प्रभावी स्तोत्र है’, इस बारे में बताया।   भय निर्मूलन के लिये शिवपंचाक्षरी स्तोत्र सबसे श्रेष्ठ माना जाता है, इतना छोटा होके भी। किसी भी तरीके का भय। अगर हमारे मन में भय उत्पन्न होता है, तो क्या बापू हम इस स्तोत्र का पठन कर सकते है?

Shivapanchakshari Stotra

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ०२ मार्च २०१७ के पितृवचनम् में ‘शिवपंचाक्षरी स्तोत्र’ के बारे में बताया। तो हम लोग ये जानते हैं, पंचाक्षरी मंत्र, ॐ नमः शिवाय, इसमें बहुत सारी ताकद है, भारत में सबसे ज्यादा मंदिर किसके हैं, तो शिवजी के हैं और हनुमानजी के हैं। हनुमानजी तो बहुत जगह, शिवजी के ही साक्षात अवतार माने जाते हैं, उनकी पूँछ जो है वो उमाजी का रूप मानी

श्रीचण्डिका एक्झाल्टेशन आर्मी के प्रशिक्षण की नई बॅच

हरि ॐ. गुरुवार, दि. १७ मार्च २०१७ को सद्‍गुरु अनिरुद्ध बापू ने पितृवचन के बाद एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण सूचना की। इस सूचना में, ‘रामराज्य’ संकल्पना का एक अंग रहनेवाली ‘श्रीचण्डिका एक्झाल्टेशन आर्मी’ के प्रशिक्षण वर्ग की दूसरी बॅच जल्द ही शुरू की जायेगी, ऐसा बापू ने घोषित किया। अगले गुरुवार, यानी दि. २३ मार्च २०१७ को, इस प्रशिक्षण वर्ग के प्रवेश के लिए आवश्यक फॉर्म्स, श्रीहरिगुरुग्राम में एक काउंटर पर

सप्तचक्र उपासना - अधिक सुलभतासे कैसे करे?

[dropcap]गु[/dropcap]रुवार, दि. १५ अक्तूबर २०१५ को परमपूज्य सद्‌गुरु बापू ने “श्रीशब्दध्यानयोग” यह, श्रद्धावानों का अभ्युदय (सर्वांगीण विकास) करानेवाली सप्तचक्रों की उपासना श्रीहरिगुरुग्राम में शुरू की। उसके बाद, इस उपासना की जानकारी देनेवाली पुस्तिका भी संस्था की ओर से श्रद्धावानों के लिए उपलब्ध करायी गयी। पुस्तिका में दी गयी जानकारी के अनुसार, श्रद्धावान पुस्तिका में दी गयीं चक्रों की प्रतिमाओं की ओर देखते हुए उस संबंधित चक्र का गायत्री मंत्र और

श्रीमंगलचण्डिका प्रपत्ती

गत ५ वर्षों से श्रद्धावान महिलाएँ परमपूज्य सद्गुरु श्री (अनिरुद्ध) बापू के मार्गदर्शन में हर्षोल्लास के साथ  ‘श्रीमंगलचण्डिका प्रपत्ती’ कर रही हैं। ‘प्रपत्ती’ यानी आपत्तिनिवारण करनेवाली शरणागति। जैसा कि बापू ने कहा है, ‘श्रीचण्डिका उपासना’ यह रामराज्य के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। बापू के कहेनुसार, माँ जगदम्बा की, महिषासुरमर्दिनी की उपासना करने पर ही अशुभ का नाश हो जाता है, अशुभ दूर हो जाता है और यश एवं पराक्रम की

श्री दुर्गा भगवती आराधना

काल मंगळवार, दिनांक २२ डिसेंबर २०१५ रोजी श्रीअनिरुद्ध गुरुक्षेत्रम्‌मध्ये “श्री दुर्गा भगवती आराधना (श्रीयंत्र महाभिषेक पूजन)” हा सोहळा अत्यंत मंगलमय व भक्तीपूर्ण वातावरणात संपन्न झाला. पूर्ण वेदोक्त पद्धतीने व नंदाईंच्या उपस्थितीत होणार्‍या ह्या पूजन व अभिषेक सोहळ्याची सुरुवात सकाळी ९.०० वाजता शांतीपाठाने झाली.  ह्या सोहळ्याचे प्रमुख वैशिषट्य होते ते पूजनस्थळी विराजमान झालेले, एरव्ही परमपूज्य बापूंच्या निवासस्थानी देवघरामध्ये असलेले व विशेष पद्धतीने घडवून घेतलेले पंचधातूचे त्रिमितीय श्रीयंत्र. सकाळी ११.०० ते दुपारी

Aniruddha Bapu pitruvacahanam

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १५ अक्तूबर २०१५ के पितृवचनम् में ‘स्वस्तिवाक्यम्‌ यह सबकुछ सुंदर बनाता है’ इस बारे में बताया। अनिरुद्ध बापू ने पितृवचन के दौरान यह बताया कि हर एक देवता के जो वैदिक सूक्त हैं, उन्हें हर चक्रपूजन एवं ध्यान के साथ पढा जायेगा। वैदिक सूक्त पहले पढे जायेंगे और उसके बाद उस देवता का जो गायत्री मंत्र होता है, जैसे गणेशजी का गायत्री मंत्र आप

पराम्बा पूजन (Paramba Poojan)

 अश्विन नवरात्रीतील सप्तमीचा दिवस ! ह्या दिवशी परमपूज्य बापूंच्या घरी मोठ्या आईचे “पराम्बा पूजन” केले जाते. ह्या वर्षीही हे पूजन नेहमीच्या उत्साही वातावरणात संपन्न झाले. बापू, नंदाई व सुचितदादांचे मोठ्या आईवरील नितांत प्रेम, तिच्या सहवासाची आणि तिला आळविण्याची नितांत आर्तता, ह्या सर्वांची अनुभूती ह्या दिवशी आम्ही सर्वांनी घेतली. मोठ्या आईच्या कृपेमुळे आम्हा काही श्रद्धावानांना हे सुंदर पूजन प्रत्यक्ष पाहण्याचे भाग्य लाभले आणि त्याचप्रमाणे अनेक श्रद्धावानांनी फेसबुक आदि सोशल मिडियाच्या माध्यमातून

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने ५ फरवरी २००४ के हिंदी प्रवचन में ‘इस विश्व की मूल शक्ति सद्‍गुरुतत्त्व है’ इस बारे में बताया।

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने ५ फरवरी २००४ के हिंदी प्रवचन में ‘इस विश्व की मूल शक्ति सद्‍गुरुतत्व है’ इस बारे में बताया। हमारे मन में प्रश्न उठता होगा कि मैं रामनाम लूं या एक बार रामनाम लेकर १०७ बार राधानाम लूं या गुरू का नाम लूं या जो भी कोई नाम लूं, कितनी भी बार लूं तब भी कोई प्रॉब्लेम नहीं है। एक साथ नामों की खिचडी

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने ५ फरवरी २०१५ के हिंदी प्रवचन में ‘भक्ति हमारा शुद्ध भाव बढाती है’ इस बारे में बताया।

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने ५ फरवरी २००४ के हिंदी प्रवचन में ‘भक्ति हमारा शुद्ध भाव बढाती है’ इस बारे में बताया। हिरन और शेर का उदाहरण देते हुए अनिरुद्ध बापू ने भय और निर्भयता ये शुद्धता और अशुद्धता से ही आते हैं, यह समझाया। हिरन के पास भय है और यह भय (डर, Fear) यह सब से बुरी अशुद्धता है। यहॉ अशुद्धता के बारे में नही सोच

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने ५ फरवरी २००४ के हिंदी प्रवचन में ‘शुद्धता यह सामर्थ्य है’ इस बारे में बताया।

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने ५ फरवरी २००४ के हिंदी प्रवचन में ‘ शुद्धता यह सामर्थ्य है ’ इस बारे में बताया। कृष्ण भगवान और राधाजी का हमारे जिंदगी के साथ क्या रिश्ता है, यह बात समझाने के लिए अनिरुद्ध बापू ने पानी और साबुन का उदाहरण देकर समझाया। उन्होंने कहा- ‘हम देखते हैं कि जब हम स्नान करते हैं। जिस पानी से हम स्नान करते हैं वह पानी

परमपूज्य सद्‍गुरू श्री अनिरुद्ध बापूंनी त्यांच्या २८ मे २०१५ च्या मराठी प्रवचनात ‘आदिमाता शक्ति पुरवायला समर्थ आहे’ याबाबत सांगितले.

परमपूज्य सद्‍गुरू श्री अनिरुद्ध बापूंनी त्यांच्या २८ मे २०१५ च्या मराठी प्रवचनात ‘ आदिमाता शक्ति पुरवायला समर्थ आहे ’ याबाबत सांगितले. आदिमातेकडे तिच्या बाळांसाठी भेदभाव नाहीव. सर्व तिची बालकंच आहेत. तिच्यासाठी छोटे बालक, आणि वृद्ध ही बालकंच आहे. वयाची अडचण आदिमातेला आड येत नाही. आपण प्रथम आपला भाव तपासून पहायला हवा. त्यात तसूभरही फरक वाटला तर ती चूक सुधारायला हवी. त्यासाठी ती आदिमाता आणि तिचा पुत्र त्रिविक्रम आपल्या हातात शंभरपट

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने ५ फरवरी २००४ के हिंदी प्रवचन में ‘राधाजी शुद्ध भाव हैं (Radhaji is shuddha bhaav)’ इस बारे में बताया।

राधाजी शुद्ध भाव हैं (Radhaji is shuddha bhaav) – Aniruddha Bapu‬ परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने ५ फरवरी २००४ के हिंदी प्रवचन में ‘राधाजी शुद्ध भाव हैं’ इस बारे में बताया। हम उपासना करते हैं, साधना करते रहते हैं, आराधना करते रहते हैं, पूजन करते हैं, अर्चन करते हैं। अपने अपने धर्म, पंथ, प्रदेश, रीतिरिवाज के अनुसार अलग अलग तरीके से कर सकते हैं। कोई प्रॉब्लेम नहीं। लेकिन

राधा सहस्त्रनाम

सहस्र रामनामतुल्य राधा नाम (Sahastra Ramnaam-Tulya Radha Naam) – Aniruddha Bapu‬ परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने ५ फरवरी २००४ के ‘राधासहस्रनाम’ हिंदी प्रवचन में ‘सहस्र-रामनाम-तुल्य राधा नाम’ इस बारे में बताया। जब वेदव्यासजी ने गुरु नारदजी से यह पूछा कि मैं तो बस ‘राम’ नाम रटते ही आ रहा था, क्योंकि आपने ही मुझे बताया था कि एक राम नाम ही सहस्र नामों के बराबर है। तब नारदजी