श्रीमंगलचण्डिका प्रपत्ती

त ५ वर्षों से श्रद्धावान महिलाएँ परमपूज्य सद्गुरु श्री (अनिरुद्ध) बापू के मार्गदर्शन में हर्षोल्लास के साथ  श्रीमंगलचण्डिका प्रपत्ती’ कर रही हैं। ‘प्रपत्ती’ यानी आपत्तिनिवारण करनेवाली शरणागति। जैसा कि बापू ने कहा है, ‘श्रीचण्डिका उपासना’ यह रामराज्य के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। बापू के कहेनुसार, माँ जगदम्बा की, महिषासुरमर्दिनी की उपासना करने पर ही अशुभ का नाश हो जाता है, अशुभ दूर हो जाता है और यश एवं पराक्रम की प्राप्ति होती है और वे अबाधित रहते हैं। ‘श्रीमंगलचण्डिका प्रपत्ती’ यह माता चण्डिका (दुर्गामाता) की उपासना ही है। यह प्रपत्ती करते समय, बापू के बतायेनुसार पूजन की रचना की जाती है। रचना के उपर, थाली में महादुर्गा के यानी ‘मोठी आई’ के पदचिन्ह हल्दी और कुंकुम से आरेखित किये जाते हैं। उसकी चारों ओर से ही श्रद्धावान महिलाएँ पूजन, आरती तथा गजर करती हैं।

Mahishasurmardini
Shree Mangalchandika Prapatti Poojan done at Germany Upasana Centre

प्रपत्तीपरिसर के माहौल को अधिक ही मंगलमय एवं आल्हाददायी बनाती है, वे परमपूज्य सद्गुरु की तसवीर की चहुँ ओर बनाये गयी फूलों की सुंदर सजावट तथा विभिन्न प्रकार की रंगोलियाँ। श्रद्धावान महिलाएँ उपासना केन्द्रों में बड़ी तादात में एकत्रित होकर हर्षोल्लास के साथ प्रपत्ती मनाती हैं। विदेश में रहनेवालीं कुछ श्रद्धावान महिलाएँ तो ४ डिग्री टेंपरेचर में भी हर साल आनंद एवं उत्साह के साथ प्रपत्ती मनाती हैं।

‘माँ चण्डिका यानी ‘मोठी आई’ हमें ‘श्रद्धावान सैनिक’ के रूप में तैयार कर ही रही है’ इस दृढ़ विश्वास के साथ हर साल श्रद्धावान महिलाएँ प्रपत्ती की तैय्यारियाँ करती हैं।

सद्गुरु श्री (अनिरुद्ध) बापू ने २४ दिसम्बर २०१५ के पितृवचन में श्रीमंगलचण्डिकाप्रपत्ती का ख़ास ज़िक्र किया। इसमें बापू ने प्रपत्ति के दौरान और कुछ बातों के लिए अनुमति दे दी है।

१. प्रपत्ती के समय किसी भी प्रकार का डेकोरशन कर सकते है।

२. आरती अथवा भक्तिसंगीत के ताल पर गरबा, दांडिया ऎसे खेल खेल सकते हैं या फिर प्रतिमा के चारों तरफ़ गोलाकार नृत्य (मराठीमे इसे “फेर धरणे” कहेते है) कर सकते है।

३. घर के पुरुष सदस्य दर्शन के लिए अवश्य आ सकते हैं; लेकिन वे नृत्य में शामिल नहीं हो सकते। साथ ही, वे यदि इस पूजन के लिए घर की महिलाओं की सहायता करते हैं, तो वह यक़ीनन ही लाभदायी, शुभ एवं हितकारी होगा।

अन्त में बापू ने कहा, ‘इस साल मैं मेरी बेटियों को हँसते, नाचते, गाते भक्तिपूर्ण वातावरण में प्रपत्ती करते हुए देखना चाहता हूँ।’

॥ हरि ॐ ॥   ॥ श्रीराम ॥  ॥ अंबज्ञ ॥

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