चरणसंवाहन – भाग २ (Serving the Lord’s feet – Part 2)

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने १५ अप्रैल २०१० के पितृवचनम् में ‘चरणसंवाहन’ के बारे में बताया।

अपनी दोनों हाथों से भगवान के, सद्‍गुरु की चरण संवाहना करो। हेमाडपंतजी हमें पूरे दिल से कह रहे हैं कि भाई, अभिवंदना करो और चरणसंवाहन कैसे करो? अभिसंवाहन करो। उसके पैर की जब हम सेवा करते हैं, चरणों की सेवा करते हैं, फोटों में, तसबीर में, मूर्ती में जो भी हैं तो वही है ये जानकर करते हैं| उसकी धूल में खुद को स्नान कराते हैं, उसकी चरणधूली को साथ में लेकर उसे सबसे पूज्य मानते हैं तो भाई, जान लो कि हमारे ये जो सेंटर्स हैं, स्पीच रिलेटेड सेंटर, हॅन्ड रीलेटेड सेंटर्स ये सभी के सभी क्या होते हैं? सामर्थ्यवान हो जाते हैं और हाथ के साथ रीलेटेड सेंटर्स यानी क्या? हाथों के साथ रीलेटेड सेंटर्स ब्रेन के हाथों के साथ जुड़े हुए सेंटर्स यानी क्या सिर्फ लिखने के? नहीं, कौशल्य, स्किल।

ह्युमन का हर स्किल जो है, 90% ऑफ देम, 90% स्किल कहाँ सें आता है? हाथों सें आता हैं ना। तुम लिखते हो, चित्र करते हो, वाद्य बज़ाते हो वो जो भी काम करते हो हाथों से करते हैं ना, यानी स्किल इज रीलेटेड विथ व्हॉट? इन हॅन्डस। (Skill is related with what? in hands) स्किल यानी कौशल्य किसके साथ जुड़ा हुआ है? अपने हाथों से जुड़ा है।

तो भाई, हमारे पास जो कौशल्य है, उसे अधिक अच्छा बनाना है। एक औरत रसोई बनाती है ये भी कौशल्य है, एक्सपरटीज है। ये कौशल्य हाथों में कैसे आता हैं, कैसे बढ़ता है? तो जब सद्‌गुरु की चरणसंवाहना करते हैं, हेमाडपंतजी कहते हैं की भाई, उनकी संवाहना के कारण क्या होगा? उनकी ये एक्सपरटीज जो है, ये उनका स्पेशालिटीज जो है, ये उनका कौशल्य जो है ये अधिकाधिक बढ़ता रहेगा।

‘चरणसंवाहन’ के बारे में हमारे सद्गुरु श्री अनिरुद्ध ने पितृवचनम् में बताया, जो आप इस व्हिडिओ में देख सकते हैं।

ll हरि: ॐ ll ll श्रीराम ll ll अंबज्ञ ll

 

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