सरस्वती पूजन (दशहरा/विजयादशमी)

हरि ॐ, दिनांक १० अक्तूबर २०१९ को किये हुए पितृवचन में सद्‌गुरु श्री अनिरुद्धजी ने ‘या कुन्देन्दुतुषारहारधवला’ इस प्रार्थना के बारे में बताते हुए, दशहरे के दिन घर में सरस्वती पूजन कैसे किया जाता है इसकी जानकारी मेरे ब्लॉग में दी जायेगी, ऐसा कहा था। उसके अनुसार इस पूजन की जानकारी दे रहा हूँ।

पूजन सामग्री
१) हल्दी, कुंकुम, अक्षता
२) निरांजन
३) नारियल – २
४) गुड़-खोपरे का नैवेद्य
५) फूल, सोना (कठमूली के पत्तें)
६) सरस्वती – पुस्तकें और चित्र
७) सुपारी – २
८) बीढ़े के पत्ते – २
९) संरचना में सबसे पीछे महापूजन (वरदाचण्डिका प्रसन्नोत्सव) की अथवा यदि वह न हों, तो मोठी आई (महिषासूरमर्दिनी) और सद्‌गुरु की एकत्रित तसवीर रखें।

** इस साल सर्वत्र फ़ैली कोरोना वायरस (कोविद-१९) की आपत्ति के कारण निर्माण हुई बाह्य परिस्थिति को मद्देनज़र रखते हुए, उपर नमूद की हुई पूजन सामग्री के बदले हरिद्रा अक्षता और कुंकुम अक्षता का इस्तेमाल करें।

रचना
१) एक चौरंग अथवा पीढ़ा रखें और उसपर वस्त्र बिछाएँ।
२) उसपर नीचे रेखांकित किये चित्र में बतायेनुसार रचना करें।

पूजन विधि
१) पहले निरांजन को हल्दी-कुंकुम अर्पण करें।
२) उसके बाद ‘वक्रतुंड’ स्तोत्र का पाठ करें।

‘वक्रतुंड’ स्तोत्र

प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम् ।।
भक्तावासं स्मरेन्नित्यमायु:कामार्थसिद्धये ।।१ ।।

प्रथमं वक्रतुण्डं च एकदन्तं द्वितीयकम् ।।
तृतीयं कृष्णपिगाक्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम् ।।२ ।।

लम्बोदरं पञ्चमं च षष्ठं विकटमेव च ।।
सप्तमं विघ्नराजेन्द्रं धूम्रवर्णं तथाष्टमम् ।।३ ।।

नवमं भालचन्द्रं च दशमं तु विनायकम् ।
एकादशं तु गणपतिं द्वादशं तु गजाननम् ।।४ ।।

द्वादशैतानि नामानि त्रिसंध्यं य: पठेन्नर: ।
न च विघ्नभयं तस्य सर्वसिद्धिकरं प्रभो ।।५ ।।

विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम् ।
पुत्रार्थी लभते पुत्रान् मोक्षार्थी लभते गतिम् ।।६ ।।

जपेत् गणपतिस्तोत्रं षड्भिर्मासै: फलं लभेत् ।
संवत्सरेण सिद्धिं च लभते नात्र संशय: ।।७ ।।

अष्टभ्यो ब्राह्मणेभ्यश्च लिखित्वा य: समर्पयेत् ।
तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादत: ।।८ ।।

इति श्री नारदपुराणे संकटविनाशनं श्रीगणपतिस्तोत्रं संपूर्णम् ।

३) स्तोत्र कहने के बाद तस्वीर को **हार पहनायें।

४) उसके बाद **बीढ़े पर, **नारियल पर, पुस्तकों पर और आयुधों पर हल्दी-कुंकुम तथा अक्षता अर्पण करें।

५) उसके बाद इस श्लोक का उच्चारण करें।

शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं
विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्ण शुभाङ्गम्।
लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम्
वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्।।

६) उसके बाद ‘या कुन्देन्दुतुषारहारधवला’ यह स्तोत्र / प्रार्थना कहते हुए **फूल और **सोना (कठमूली के पत्तें) अर्पण करें।

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता ।
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना ॥
या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता ।
सा माम् पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ॥

७) उसके बाद २४ बार ‘ॐ कृपासिंधू श्रीसाईनाथाय नमः’ यह जाप करें।

८) जाप संपन्न होने पर निरांजन से आरती उतारें और गुड़-खोपरे का नैवेद्य अर्पण करें।

९) उसके बाद ‘विजयमंत्र’ कहें।

यहाँ पर पूजन संपन्न होता है।

ll हरि ॐ ll श्रीराम ll अंबज्ञ ll
ll नाथसंविध् ll

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