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सजल मूल जिन्ह सरितन्ह नाहीं … (Sajal Mool Jinha Saritanha Naahi …) – Aniruddha Bapu Hindi Discourse 12 Jan 2006

सजल मूल जिन्ह सरितन्ह नाहीं …
(Sajal Mool Jinha Saritanha Naahi …)
गंगाजी जैसी बारह महीने बहनेवाली नदियों का मूल सजल होने के कारण वे कभी नहीं सूखतीं। इसी तरह भगवान का नाम जिस मानव की जीवन-नदी का मूल होता है, उसका जीवन कभी नहीं सूखता। वहीं, जिन्हें केवल बरसात का ही आसरा है, वे वर्षा के बीत जाने पर फिर तुरंत ही सूख जाती हैं। भगवान से विमुख होकर जीने वाले मनुष्य की हालत ‘असजल मूल’ नदियों की तरह ही होती है, इस बात को ध्यान में रखना चाहिए। सजल मूल जिन्ह सरितन्ह नाहीं। बरषि गएँ पुनि तबहिं सुखाहीं॥ इस सुन्दरकाण्ड की चौपाई के बारे में परमपूज्य सद्गुरू श्री अनिरुद्ध बापूनें ने अपने १२ जनवरी २००६ के प्रवचन में बताया, जो आप इस व्हिडियो में देख सकते हैं l

॥ हरि ॐ ॥ ॥ श्रीराम ॥ ॥ अंबज्ञ ॥

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