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साईंनिवास – डाक्यूमेंट्री अब हिंदी में भी उपलब्ध (डबींग की हुई) (Sainiwas Documentary)

Sainiwas Documentary

साईंनिवास हिंदी डाक्यूमेंट्री डी.वी.डी.हरी ॐ मित्रों,

पिछले गुरूवार को, अर्थात ३१ जनवरी २०१३ को श्रद्धावनों के लिए स्वस्तिक्षेम संवाद के बाद, जो बापूजी के हिंदी प्रवचन के लिए बैठते हैं उनके लिए साईंनिवास डाक्यूमेंट्री (हिन्दी में डबींग की हुई) लगाई गयी थी। चूंकि मूल प्रति की अवधि २ घंटों की है, इसका संक्षिप्त प्रारूप, जिसकी अवधि ४५ मिनटों की है, वह दिखाई गई।

उपस्थितों में से बहुतों ने पहले ही मूल मराठी प्रति देखी हुई थी, इसलिए उनके लिए यह दुबारा देखने जैसी बात होती, मगर वास्तव में ऐसा हुआ नहीं। हिन्दी प्रति इतनी अच्छी बनी है, विशेष कर सद्य पीपा (आप्‍पासाहेब दाभोलकर) और चेतनसिंह दाभोलकर के भावों को इतनी अच्छी से फिल्माया गया है की, देखनेवाला भूल जाता है कि वह डब की हुई प्रति देख रहा है। जब स्क्रीनिंग पूरी हो गयी तो ऐसा लगा की ४५ मिनट आँख झपकते ही बीत गए।

साईंनिवास पर बनी हुई डाक्यूमेंट्री का हमारे पास होना एक अनमोल खज़ाना है। मराठी एवं हिन्दी (डबींग की हुई) दोनों डी.वी.डी. प्रतियाँ श्रीहरिगुरुग्राम, श्रीअनिरुद्ध गुरुक्षेत्रम, साईंनिवास तथा अन्य बहुत सारे उपासना केन्द्रों पर उपलब्ध हैं।

One comment

  1. हरी ॐ दादा. साई-निवास -बापू भक्तों का एक पुण्यप्रद तीर्थक्षेत्र !!! पिछले गुरूवार को, अर्थात ३१ जनवरी २०१३ जब साई-निवास की हिंदी में डाक्यूमेंट्री दिखाई गयी, तो मन आनंद से फूला नहीं समाया │श्रीसाईसच्चरित से मीनावैनीने ही अटूट नाता बाँध दिया था, मीनावैनीने ही साईसच्चरित की प्रथमा परिक्षा देने के लिए प्रेरित किया था, वो ही हमारी श्रीसाईसच्चरित के अखंड पारायण के दौरान पूरी रात भर जागकर तैयारी भी करवा लेती थी और साथ-साथ खाली पेट भगवान का नामसुमिरन नहीं होता यह ३२ वे अध्याय की सिंख को आचरण में लाने का सबक पढाते हुए हमारे खाने का भी इंतजाम करती थी │मीनावैनी हमेशा बताती थी कि बापू को जानने का, उनको निहारने सबसे अच्छा और आसान तरीका याने श्रीसाईसच्चरित का नित्य , हररोज किया हुआ पठण , मनन और चिंतन │ मेरे साईबाबा की कथाओं, लीलाओंमे तुम्हें मेरे बापू ही मिलेंगे │ आज वो सारी स्मृतीयाँ मन में फिर से जागृत हो गयी और आसूओं का सैलाब उमड पडा │वो संक्षिप्त प्रारूप की ४५ मिनटों अवधी में ही बापू का एक अनमोल खज़ाना, बापू की अकारण करूणा से प्राप्त हुआ है │ अनगिनत बार भी हमारा सिर उस साई-निवास कि चौखट पर रखें तो कम ही होगा , और यही सौभाग्य डाक्यूमेंट्री देखतें हुए हमें घर बैठें ही बापू की कृपा ने प्रदान किया है│ आदिमाता ,कोटी कोटी बार मैं अंबज्ञ हूँ, ऐसा सदगुरु हमें प्रदान करने के लिए , जिसने जिंदगी में सचमुच का साई याने साक्षात ईश्वर का दर्शन भी करवाया और मनोमंदिर में उसी अनिरुद्धसाई का निवास करवाना भी सिखाया ….काय गोड (गुरुची) बापूंची शाळा │ सुटला जनक-जननींचा लळा │
    अंबज्ञ, अंबज्ञ,अंबज्ञ….

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