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त्रिविक्रम के प्यार को प्रतिसाद दो (Respond to Trivikram’s Love) – Aniruddha Bapu

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने १० मार्च २०१६ के पितृवचनम् में ‘ त्रिविक्रम के प्यार को प्रतिसाद दो’ इस बारे में बताया। 
त्रिविक्रम के प्यार को प्रतिसाद दो  - (Respond to Trivikram's Love)

त्रिविक्रम के प्यार को प्रतिसाद दो (Respond to Trivikram’s Love) – Aniruddha Bapu

हमें जिंदगी मे यही जानना चाहिए- don’t react, respond तुरंत react करते जाते हैं। नहीं, थोडा तो सोचिए। एक पल भर के लिए सोचिए। सही अर्थ क्या है इसका और एक ध्यान में रखिए की तुम इन्सान हो तो बाकी के सारे भी इन्सान है। हर एक जन को ऎसा सोचना चाहिए। मुझसे अगर गलती हो सकती है तो और किसी से भी गलती हो सकती है। उसके हाथ से भी गलती हो सकती है। सब चीजों को पकड के रखने की जरुरत नही होती। लेकीन हम हर बात पकड के रखते हैं। तुलना करते रहते हैं और यह कलियुग है। तो बुराईया और बुरी प्रवृत्तियां ज्यादा होंगी ही। हमें उनसे बचना है। वो चाहे सूक्ष्म रूप की हो, चाहे energy रूप की हो। चाहे बुरे मार्ग की हो, चाहे कुछ भी हो । लेकिन उसका असर हम पर नही होना चाहिऎ। फ़िर भी होता रहता है। और पिछले जन्म मे क्या किया है, क्या मालूम है। उसे क्या क्या भुगतना है, क्या मालूम है। 
लेकिन वह त्रिविक्रम जानता है, इसीलिए वो सारी adjustment करता रहता है। त्रिविक्रम का इस विश्व के साथ एक ही रिश्ता है, जो उसे अपना बाप मानता है वे सारे उसके बच्चे हैं। सारे, लडका हो या लडकी हो, बेटा या बेटी, बाकी कोई रिश्ता नही। और उसे जो अपना बाप नहीं मानता उसके साथ उसका कोई रिश्ता नहीं होता। वो संत नहीं है, उसके पास मेरा अपना और पराया यह विचार अवश्य होता है और होना  चाहिए। नहीं तो अच्छे लोगों का क्या होगा। हालत खराब हो जाएगी| एक गरीब मा ने अपने बेटे के लिऎ खाना लाया होगा और कोई चोर उस चुरा के भागा तो वो चोर त्रिविक्रम का नहीं हो सकता। जो अच्छे मार्ग पर चलना चाहता है उसके हात से कितनी भी गलती या कयों ना हो, पाप भी कयो ना हो वो क्षमा करने के लिए त्रिविक्रम सदैव तत्पर है तैयार है। लेकिन वो यह कहेगा कि जो मुझे बाप नही मानता उसे मै अपना बच्चा कहूं यह काहे का नियम हो गया भाई! ये नही हो सकता।
इसलिए जो त्रिविक्रम को अपना बाप मानता है, अपना पिता मानते हैं वो ही उसका १ टक्का भी नही, वो ही उसका २ टक्का भी नही, वो ही उसका ३ टक्का भी नही, वो ही उसका ९९ टक्का भी नही, वो ही उसका १०० टक्का भी नही, वो ही उसका १०८ टक्का, at list १०० % तो १०८% अपने आप हो जाएगा। जैसा प्यार बढता है वैसे वो अपने आप हो जाएगा । १०० percent तो यह मानना चाहिए कि त्रिविक्रम मेरा पिता है । 
परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने १० मार्च २०१६ के पितृवचनम् में ‘ त्रिविक्रम के प्यार को प्रतिसाद दो’ इस बारे में बताया, जो आप इस व्हिडियो में देख सकते हैं। 

 

॥ हरि ॐ ॥ ॥ श्रीराम ॥ ॥ अंबज्ञ ॥

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