पंचमुखहनुमत्कवचम् विवेचन – १६ (कवच का बीज ‘र्‍हीं’) [Panchamukha-Hanumat-kavacham Explanation – 16 (Armor seed is ‘Rhim’)] – Aniruddha Bapu

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १६ मार्च २०१७ के पितृवचनम् में ‘पंचमुखहनुमत्कवचम् विवेचन – १६ (कवच का बीज ‘र्‍हीं’) ’ के बारे में बताया

पंचमुखहनुमत्कवचम् विवेचन – १६ (कवच का बीज ‘र्‍हीं’ )
पंचमुखहनुमत्कवचम् विवेचन – १६ (कवच का बीज ‘र्‍हीं’) – Aniruddha Bapu

र्‍हीं बीज याने क्या तो इस कवच का बीज जो है, जिस बीज से ये कवच बढता है, हर एक के अंदर वो र्‍हीं याने माँ का प्रणव। जो देवी अथर्वशीर्ष जानते है, हम लोगों ने ग्रंथ में दिया हुआ है, देवी अथर्वशीर्ष, माँ का अथर्वशीर्ष कि र्‍हीं ये लज्जा बीज है। ये माँ का प्रणव है। याने ॐकार का जो महत्व, उतना ही महत्व र्‍हीं बीज का है।

इसलिये उसे देवी प्रणव कहा गया है या मातृप्रणव कहा गया है। र्‍हीं जो है ये लज्जा बीज है। ये लज्जा बीज याने, लज्जा याने शरम वगैरे ऐसा रुप में अर्थ में इसका अर्थ नही लेना चाहिये। ये लज्जा बीज है, याने ये गूढ बीज है। ये सारे सिक्रेट्स ऑफ द वर्ल्ड, जग की सारी की सारी जो सिक्रेट्स है, याने गुप्त वार्ताये है, गुप्त रहस्य है, गुप्त मंत्र है, गुप्त तंत्र याने वो तंत्र मंत्र वाला जंतर मंतर वाला तंत्र नही। तंत्र याने टेक्निक। तंत्रमहाविद्यालय हम लोग देखते है ना। इसके सारे समीकरण, सारे सूत्र जिसमें है, ऐसा ये बीज है, र्‍हीं बीज। र्‍हीं बीज में क्या है?

विश्व की हर एक प्रक्रिया जो है याने अपने शरीर में होनेवाली प्रक्रिया हो, जग में आप जो प्रक्रिया करते है, वो हो, या आपके साथ लोग जैसा बर्ताव करते है, या वनस्पति निसर्ग आपके साथ जो बर्ताव करते है ये सारी क्रियाओं का बीज कहा है तो originally र्‍हीं में है। तो क्या इस कवच का भी बीज है र्‍हीं ही बीज है। याने हम लोग जान सकते है, जिस कवच का बीज ही र्‍हीं है, वो हमारे लिये क्या कुछ नही कर सकता, इस बारे में हमारे सद्गुरु अनिरुद्ध बापू ने पितृवचनम् में बताया, जो आप इस व्हिडिओ में देख सकते हैं।

॥ हरि ॐ ॥ ॥ श्रीराम ॥ ॥ अंबज्ञ ॥

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