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व्यापारयुद्ध की पृष्ठभूमि पर चीन ने लगातार छह महीने बडी तादाद में सोना खरीदा

बीजिंग: देश के आरक्षित सोने के भंडार संबंधी अंतरराष्ट्रीय समुदाय को हमेशा अंधेरे में रखनेवाले चीन ने पिछले छह महीनों में लगातार सोने के भंडार संबंधी जानकारी प्रसिद्ध की है| इन छह महीनों में चीन ने सोने के आरक्षित भंडार में बढोतरी की है और मई महीने में भी करीबन १५.८६ टन सोना खरीदने की जानकारी दी| इस खरीद के बाद चीन के आरक्षित सोने का भंडार १,९२५ टन तक बढ चुका है|

पिछले वर्ष से अमरिका और चीन में व्यापारयुद्ध शुरू है और चीन की अर्थव्यवस्था को इससे जोरदार झटका लगने की बात उजागर हुई है| इस पृष्ठभूमि पर चीन ने अमरिका को चुनौती देने के लिए कई विकल्पों का इस्तेमाल करना शुरू किया है और सोने की खरीद यह इन्ही में से एक अहम विकल्प समझा जा रहा है| इससे पहले चीन की हुकूमत ने कभी भी लगातार अपने सोने के भंडार की जानकारी प्रसिद्ध नही की थी| लेकिन, अब लगातार छह महीनों से चीन ने सोने की खरीद शुरू की है और इसकी जानकारी भी प्रसिद्ध की जा रही है|

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अर्थव्यवस्था पर मंदी का साया आने से सोने के दामों में उछाल

लंदन/न्यूयॉर्क: अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर मंदी का साया होने के संकेत लगातार सामने आ रहे है| इस पृष्ठभूमि पर निवेषकों ने अपना ध्यान फिर से सोने पर केंद्रीत किया है और इस वजह से सोने के दामों में बडा उछाल दिखाई दिया| न्यूयॉर्क में हुए व्यवहार में सोने के दाम प्रति औंस (२८.३५ ग्रैम) १,३४८.३१ डॉलर्स तक बढे| सोने के दामों का यह पिछले १४ महीनों का उच्चतम स्तर है|

अमरिका-चीन के बीत तेज हो रहा व्यापारयुद्ध, यूरोपिय अर्थव्यवस्था की बिगडी स्थिति, उत्पाद क्षेत्र के नकारात्मक आंकडों से अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था मंदी की दिशा में आगे बढ रही है, यह दावे किए जा रहे है| अमरिका के साथ कुछ प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में रोजगार निर्माण की गति भी धीमि हुई है और सेंट्रल बैंकों ने ब्याज दरों में कटौती करने के संकेत दिए है| ईंधन के दामों में भी पिछले कुछ हफ्तों से लगातार गिरावट हो रही है|

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तकनीकी क्षेत्र की बडी कंपनियां वैश्‍विक अर्थव्यवस्था में उथल पुथल करेगी – अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष की प्रमुख का इशारा

टोकियो – ‘दुनिया की कुछ चुनिंदा कंपनियों का हाथ में जानकारी की काफी बडा भंडार है| यह कंपनियां ‘आर्टिफिशल इंटेलिजन्स’ और अन्य तकनीक के बल पर वैश्‍विक अर्थव्यवस्था का आधार होनेवाले आर्थिक व्यवहारों पर वर्चस्व प्राप्त करके अर्थव्यवस्था में उथल पुथल कर सकती है’, यह चौकानेवाला इशारा अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष की प्रमुख क्रिस्तिन लैगार्ड ने दिया है| पिछले कुछ महीनों में तकनीकी क्षेत्र की बडी कंपनियों के विरोध में अमरिका और यूरोप में कानूनी कार्रवाई शुरू हो रही है और ऐसे में मुद्राकोष की प्रमुख ने दिया यह इशारा ध्यान आकर्षित करता है|

पिछले कुछ वर्षों में ‘आईटी’ क्षेत्र की कुछ चुनिंदा कंपनियां नई तकनीक, जानकारी एवं बहुत बडी आर्थिक क्षमता के बल पर अलग अलग क्षेत्र में वर्चस्व करती दिख रही है| यह करते समय इन कंपनियों से सामाजिक, आर्थिक, सियासी क्षेत्रों के समेत कई क्षेत्र के लिए तय नियमों का खुलेआम भंग होता दिख रहा है| अभिव्यक्ती स्वतंत्रता, मानवाधिकार और कानून में रही कमी के बल पर यह कंपनियां दुनिया के प्रमुख देशों की भी परवाह नही कर रही है|

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रशिया-चीन में ‘युआन’ चलन पर निर्भर निवेश के लिए निधि का ऐलान – स्थानिय चलन, ‘ई-कॉमर्स’, परमाणु सहयोग और ‘५जी’ समझौते पर भी हस्ताक्षर

मास्को – चीन के राष्ट्राध्यक्ष शी जिनपिंग इनके रशिया दौरे में दोनों देशों में युआन चलन पर आधारित स्वतंत्र निधि स्थापित करने की महत्वपूर्ण घोषणा की गई है| अब तक दोनों देशों में एक दूसरों के साथ व्यापार एवं निवेश बढ़ाने के लिए विविध उपक्रम कार्यान्वित किए गए हैं| फिर भी सिर्फ युआन चलन का समावेश होनेवाला निधि निर्माण होने का पहला समय है| रशिया एवं चीन इन दोनों देशों में अमरिका के प्रतिबंधों का सामना करते समय अमरिकी डॉलर का वर्चस्व कम करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं| इनमें चीन के युआन को बहुत बड़ा योगदान है और नया निधि उसी का एक भाग माना जा रहा है|

बुधवार को चीन के राष्ट्राध्यक्ष शी जिनपिंग रशिया में दाखिल हुए हैं| उस समय उन्होंने रशिया के राष्ट्राध्यक्ष व्लादीमीर पुतिन के साथ अनेक वरिष्ठ मंत्री एवं नेताओं से चर्चा की है| उस समय दोनों नेताओं की उपस्थिति में अनेक महत्वपूर्ण करार पर हस्ताक्षर किए गए हैं| इनमें दोनों देशों में स्थानीय चलन का उपयोग और ‘नेशनल पेमेंट सिस्टम’ की व्याप्ति बढ़ाने के संदर्भ में करार का समावेश है|

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