अंबज्ञ रहना बहुत आवश्यक है (It is necessary to stay Ambadnya)

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धने १५ मई २०१४ के पितृवचनम् में ‘अंबज्ञ रहना बहुत आवश्यक है’ इस बारे में बताया।

 

बात देखिये क्या है? कि ये भगवान का तरीका है अपने बच्चों के लिये सबकुछ वो Ready to cook. आजकल आते हैं ना पार्सल्स, ready to cook आते हैं ना, so that is what is His strategy, Ready to cook लेकिन आप लोग सोचिये वो निकाल के मैं ऐसे ही खा जाऊँ तो नही चलेगा। उतना तो खुद को करना चाहिये ना। यानी आपकी प्रार्थना, आप लोग जो, उपवास रखते हैं, प्रार्थना करते हैं, मंदिर जाते हैं, ये सब अच्छी बाते हैं। ये सब किसके लिये आवश्यक है? हमारे लिये आवश्यक है।

किसी ने सही कहा था, मैंने जब वचन के बारे में पूछा कि वचन क्यो कहने हैं? बाबा को याद दिलाने के लिये नही, वो उनका काम करते ही हैं। ३६८ जगह में आपके हर एक के laboratories है। जहां आपकी उन्नती के लिये प्रयास वो खुद कर रहा है। Scientist वो एक ही है। वो ही कर रहा है सारे experiments और फायदा किसे मिल रहा है? आप लोगों को।

तो ये वचन क्यो पढने हैं हम लोगों को? कि ये सबकुछ वो करता है हमारे लिये, इसकी हम लोगों को याद नहीं रहती, स्मृति नहीं रहती। हमें खुद को जगाने के लिये बाबा के ये वचन जो है, उन्हें बार बार दोहराना आवश्यक है। सिर्फ ३६९ नंबर याद में रखिये। कि मेरे लिये भगवान ३६८ labaoratory चला रहा है। Why is He doing it? Out of love. कोई बाप अपने बच्चे के लिये सबकुछ क्यों करता है? just प्यार के लिये। Can there be any other reason? एक माँ अपने बच्चे के लिये सबकुछ क्यों करती है? न्योछावर करने के लिये तैयार क्यों होती है? सिर्फ प्रेम के लिये। Not because of any expectations. कोई अपेक्षा के कारण नहीं। सिर्फ प्यार के कारण। समझ गये?

तो बाबा के वचनों को जानना किसलिये आवश्यक है? इसलिये आवश्यक है। उनका उच्चारण करना किसलिये आवश्यक है? इसलिये आवश्यक है। बाबा को याद दिलाने के लिये नही, खुद को एहसास दिलाने के लिये कि मेरा बाप है। और मेरा बाप ऐसा है, जो कुछ भी कर सकता है मेरे लिये। कुछ भी। इसका मतलब ये नही कि जो मै चाहूंगा वही करेगा, बिल्कुल नही। वो जो तुम्हारे लिये बेहतरीन है, अच्छा है, जो तुम्हारे जिंदगी में सुख ला सकता है, वही करेगा। आज दो घंटों के लिये रोओगे, कुछ नही बोलेगा, रोते रहो। तो ऐसी वही बात है। इसलिये मै बार बार कहता हूं कि भगवान ने मुझे जो कुछ भी दिया है, उसके लिये अंबज्ञ रहना आवश्यक है सिर्फ।

‘अंबज्ञ रहना बहुत आवश्यक है’ इस बारे में हमारे सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने पितृवचनम् में बताया, जो आप इस व्हिडिओ में देख सकते हैं।

॥ हरि ॐ ॥ ॥ श्रीराम ॥ ॥ अंबज्ञ ॥

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