मूलाधार चक्र का लम् बीज और भक्तमाता जानकी – भाग २

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ४ फरवरी २०१६ के प्रवचन में ‘मूलाधार चक्र का ‘लम्’ बीज और भक्तमाता जानकी’ इस बारे में बताया।

 

जानकी जो है, सीतामैया जो है, ये directly ‘लं’ बीज का आविष्कार है। ये वसुंधरा की कन्या होने के कारण, ये ‘लं’ बीज का मूर्तिमंत आविष्कार क्या है? तो ये ‘जानकी’ है। और उसकी शादी किसके साथ हो रही है? ‘राम’ के साथ – ‘श्रीराम’ के साथ। राम का बीज क्या है? ‘रं’ है। ‘रं’ कहाँ है? मणिपूरचक्र में – नाभिचक्र में, राईट।

श्रीराम खुद क्या हैं? ‘रं’ बीज, ‘रं’ बीज का आविष्कार हैं। श्रीरामजी ‘रं’ बीज का ही आविष्करण हैं यानी सूर्यबीज का आविष्करण हैं। ओ.के., सूर्य का बीज ‘रं’ होने के कारण ये श्रीरामजी जो हैं, ये ‘रं’ बीज का आविष्कार हैं। और यहाँ विवाह जानकी और श्रीराम का हो रहा है। यानी ‘लं’ बीज की शादी – ‘लं’ बीज का विवाह ‘रं’ बीज के साथ हो रहा है। ओके? यानी ‘लं’ बीज जो है मूलाधारचक्र में, इसका connection directly किसके साथ हो रहा है? ‘रं’ बीज के साथ यानी मणिपूरचक्र के साथ। यानी यहाँ इस कथा में क्या होता है हमेशा? ये कथा हम सुनने लगते हैं, पढ़ने लगते हैं, रामनाम लेने लगते हैं, तो हमारा जो मूलाधारचक्र है, उस मूलाधारचक्र का connection अपने आप किसके साथ जु़ड़ जाता है? मणिपूरचक्र के साथ।

लेकिन इन दोनों के विवाह के बीच में कौन आता है? उन्हें एक-दूसरे अलग कौन करता है? रावण। तो रावण का बीज क्या है? मैंने बार-बार कहा है, श्रीरामजी क्या है? पुरुषार्थ। जानकी क्या है? पुरुषार्थ का फल है। उन दोनों के बीच में क्या आता है? भय आता है, राईट। So, रावण किस बीज से बना हुआ है? किस बीज का आविष्कार है? तो ‘भय’ बीज का। वहाँ कोई बीजाक्षर नहीं हो सकता, क्योंकि वो पवित्र नहीं है। राईट, so भय जो है, भय का जो बीज है उसका ही आविष्करण क्या है? रावण है। और मूलाधारचक्र की जो क्रियाएँ हैं, हमारे बदन में, हमारे देह में और मणिपूरचक्र की क्रियाएँ जो हैं, उनका एक दूसरे के साथ रहना बहोत आवश्यक रहता है। और बीच में क्या है? ‘रं’ और ‘लं’ के बीच में ‘वं’ बीज है।

स्वाधिष्ठानचक्र जो है इसका तत्त्व क्या है? जल है। इसीलिए सीता को यहाँ से लेकर समुद्र पार करके लंका में ले जाया जाता है। एक हनुमानजी हैं जो यहाँ से एक, एक छलाँग मारकर, यहाँ से उधर जा सकते हैं और वहाँ से वापस आ सकते हैं, बाकी दूसरों के लिए ब्रीज बाँधना पड़ता है। सेतु का निर्माण करना आवश्यक होता है, राईट। ओ.के.!

‘मूलाधार चक्र का लम् बीज और भक्तमाता जानकी’ इस बारे में हमारे सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने प्रवचन में बताया, जो आप इस व्हिडिओ में देख सकते हैं।

ll हरि: ॐ ll ll श्रीराम ll ll अंबज्ञ ll

 

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