अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत का बढ़ता महत्व

भारत-अमरिका रक्षामंत्री की हुई बातचीत

नई दिल्लीरक्षामंत्री राजनाथ सिंग और अमरिकी रक्षामंत्री मार्क एस्पर के बीच बातचीत हुई हैइंडोपैसिफिक क्षेत्र की स्थिति और भारत एवं अमरिका के बीच रक्षा संबंधी सहयोग मजबूत करने का मुद्दा इस बातचीत में सबसे आगे रहा|

आसियान के रक्षामंत्रियों की बैठक बैंकॉक में आयोजित की गई है और इसमें रक्षामंत्री राजनाथ सिंग भी शामिल हो रहे हैइस बैठक से पहले रक्षामंत्री राजनाथ सिंग और अमरिकी रक्षामंत्री मार्क एस्पर की बातचीत हुईभारत और अमरिका के इंडोपैसिफिक’ क्षेत्र में एक समान हितसंबंध बने हैइस बारे में अमरिका के रक्षामंत्री समेत अच्छी बातचीत हुई और दोनों देशों की रक्षा संबंधी सहयोग मजबूत करने के विषय पर सहमति बनी हैऐसा रक्षामंत्री राजनाथ सिंग ने कहा|

जल्द ही भारत और अमरिका के बीच टू प्लस टू’ बातचीत होगीदोनों देशों के विदेशमंत्री और रक्षामंत्री इस बातचीत में शामिल होंगेइस दौरान कुछ अहम समझौते होने की उम्मीद हैइससे पहले राजनाथ सिंग और मार्क एस्पर के बीच हुई बातचीत टू प्लस टू’ के लिए पृष्ठभूमि तैयार करनेवाली साबित हो रही है|

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ब्रिक्स परिषद के लिए भारतीय प्रधानमंत्री ब्राजिल पहुंचे

ब्राझिलिया –  ‘ब्रिक्स’ देशों की परिषद के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्राजिल पहुंचे है| भारत के साथ रशिया, चीन, दक्षिण अफ्रीका और ब्राजिल की सदस्यता से बनी ‘ब्रिक्स’ की इश परिषद को काफी बडा सियासी एवं आर्थिक अहमियत प्राप्त हुई है| अमरिका-चीन व्यापारयुद्ध एवं अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में देखी जा रही गिरावट की पृष्ठभूमि पर ब्रिक्स देशों का आर्थिक और धारणात्मक सहयोग अहम भूमिका निभा सकता है| पर, अभी भी ब्रिक्स के सदस्य देशों में ऐसा सहयोग बन नही सका है| भारत ने चीन पुरस्कृत ‘आरसीईपी’ समझौते पर हस्ताक्षर करने से इन्कार करने पर यह बात बडी तीव्रता के साथ सामने आयी थी|

प्रधानमंत्री मोदी अपनी इस यात्रा के दौरान रशिया के राष्ट्राध्यक्ष व्लादिमीर पुतिन एवं चीन के राष्ट्राध्यक्ष शी जिनपिंग के साथ स्वतंत्र द्विपक्षीय बातचीत करेंगे| प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्राध्यक्ष जिनपिंग की बातचीत की ओर दोनों देशों के निरिक्षकों का खास ध्यान लगा है| कुछ दिन पहले मलेशिया में हुई ‘आसियान’ की बैठक के दौरान चीन के साथ १५ देशों ने ‘आरसीईपी’ समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए भारत पर दबाव बनाने की कोशिश की थी| भारत ने इस मुक्त व्यापीर समझौते में शामिल होने का निर्णय किया होता तो चीन ने अपना बाजार चीन में बने सामान से भर दिया होता, यह चिंता व्यक्त की जा रही थी| पर, प्रधानमंत्री मोदी ने संबंधित समझौते का हिस्सा होने से इन्कार किया था|

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भारत-रशिया सहयोग बढाने के लिए हुआ अहम समझौता

मास्को – रशिया से भारत को प्रदान हो रहे रक्षा सामान के रखरखाव एवं दुरूस्ती के साथ पुर्जों की सप्लाई करने के मुद्दों पर अहम समझौता हुआ है| इसके अनुसार रशिया से भारत को प्रदान हो रहे हथियारों की बिक्री के बाद सहयोग करने के लिए स्वतंत्र कार्यगुटों का निर्माण किया जाएगा| रक्षामंत्री राजनाथ सिंग और रशिया के रक्षामंत्री सर्जेई शोईगु के बीच हुई बातचीत के बाद संबंधित समझौते पर हस्ताक्षर हुए|

मंगलवार के दिन रक्षामंत्री राजनाथ सिंग रशिया पहुंचे थे| तीन दिनों की उनकी इस यात्रा के दौरान भारत-रशिया द्विपक्षीय सहयोग से जुडे कई मुद्दों पर बातचीत होने की जानकारी सूत्रों ने दी| इसमें ‘इंडिया रशिया इंटर गव्हर्नमेंटल कमिशन ऑन मिलिटरी ऍण्ड टेक्निकल को-ऑपरेशन’ (आयआरआयजीसी-एम ऍण्ड एमटीसी) की बैठक का भी समावेश था| इस बैठक के दौरान रशियन रक्षामंत्री के साथ हुई बातचीत के बाद इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए|

यह समझौता भारत की मेक इन इंडिया को मजबूती देनेवाला अहम स्तर के तौर पर जाना जा रहा है| रशिया ने भारत की रक्षा क्षमता बढाने के लिए सभी तरह की सहायता प्रदान करने का वादा इस समझौते के जरिए किया है| रशिया से भारत को प्राप्त हो रहे रक्षा सामान के पुर्जे एवं अन्य सामान का निर्माण आगे से भारत में ही होगा, यह जिक्र भी इस समझौते में है| इसके लिए दोनों देशों की संयुक्त परियोजनाओं का निर्माण होगा|

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