चीन और पाकिस्तान को रोकने के लिए भारत की तैय्यारी

लद्दाख के निकट चीन की सेना की हरकतें – भारत कडी नजर रखकर है

लद्दाख: लद्दाख के डेमचोक की नियंत्रण रेखा के निकट चीन की सेना रास्ते का निर्माण कर रही है| इस निर्माण कार्य पर हम कडी नजर रखकर है, यह जानकारी भारतीय सेना ने दी है| साथ ही नियंत्रण रेखा के निकट भारतीय सेना ने भी रास्ते का निर्माण कार्य शुरू किया है, यह बताया जा रहा है| ‘डोकलाम’ विवाद के बाद चीन के निकट की सीमा संवेदनशील बनी है और भारत इस संबंध में किसी भी प्रकार का खतरा उठाने को तैयार नही है, यह दिख रहा है| इसी पृष्ठभूमि पर लद्दाख से प्राप्त हुए इस समाचार की अहमियत बढी है|

इसके पहले चीन के सैनिकों ने कई बार लद्दाख में घुसपैठ करने की कोशिश की थी| लेकिन, भारतीय सेना ने समय समय पर चीन की इन सैनिकों को रोका था| चीन की घुसपैठ भारत की चिंता का विषय बना था| भारतीय सीमा के निकट चीन बुनियादी सुविधाओं का निर्माण कर रहा है और यह भारत के विरोध में सामरिक तैयारी समझी जा रही है| इस स्थिति का गंभीरता से संज्ञान लेकर भारत ने भी चीन की सीमा के निकट बुनियादी सुविधाओं का निर्माण शुरू किया था| इसमें रास्तों का निर्माण और ‘एअर स्ट्रिप’ का निर्माण करने पर जोर दिया गया था|

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दुश्मन देश पर नजर रखनेवाले प्रगत ‘रिसैट-२बी’ प्रक्षेपित

नई दिल्ली – खराब मौसम में भी दुश्मनों की गतिविधियों पर बारिकी के साथ नजर रखने की क्षमता होनेवाले ‘रिसैट-२बी’ सैटलाइट का भारत ने बुधवार के दिन सफलता के साथ प्रक्षेपण किया| अहमदाबाद के ‘स्पेस एप्लिकेशन सेंटर’ में निर्माण किए गए ‘रिसैट-२बी’ का प्रक्षेपण यानी एक बडी मुहीम होने की प्रतिक्रिया ‘भारतीय अंतरिक्ष संशोधन संस्था’ (इस्रो) के प्रमुख डॉ.के.सिवन इन्होंने दर्ज की| भारत ने कुछ ही महीने पहले पाकिस्तान के बालाकोट में हवाई हमला किया था| इस हमले की पृष्ठभूमी पर इस नए सैटलाइट का प्रक्षेपण काफी अहमियत रखता है|

बुधवार की सुबह करीबन ५.३० बजे श्रीहरिकोटा के सेंटर से ‘पीएसएलव्ही’ के जरिए ‘रिसैट-२बी’ का सफल प्रक्षेपण किया गया| ‘स्पेशल इमेजिंग कैपेबिलिटी’ इस करीबन ६१५ किलो भार के सैटलाइट की खासियत है|

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भारतीय वायुसेना के ‘सुखोई-३०एमकेआई’ से ‘ब्रह्मोस’ के हवाई संस्करण का परिक्षण

नई दिल्ली – भारतीय वायुसेना ने विमान से हमला करने में काबिल, ब्रह्मोस मिसाइल का परीक्षण किया| इस दौरान वर्णित मिसाइल ‘सुखोई-३० एमकेआई’ विमान से छोडा गया| हाल ही में सभी ‘सुखोई ३०’ विमान पर ‘ब्रह्मोस’ मिसाइल तैनात करने का निर्णय किया गया है| पुलवामा हमले के काबद भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में ने आतंकी ठिकाने पर हवाई हमलें किए थे| लेकिन, इसके लिए भारतीय वायुसेना को पाकिस्तान की हवाई सीमा में प्रवेश करना पडा था| लेकिन, सुखोई पर ब्रह्मोस की तैनाती होती है तो सीमा में प्रवेश किए बिना भारत को सिर्फ ६० सेकंड में डेढ सौ किलोमीटर अंदर तक हमला करना मुमकिन होगा| इस पृष्ठभूमि पर बुधवार के दिन किया गया परिक्षण अहम है|

वायुसेना ने बुधवार के दिन किए परीक्षण में जमीन पर तय किया गया परिक्षण सटिकता के साथ तबाह किया गया| भारत ने रशिया के सहयोग से निर्माण किए हुए ब्रह्मोस मिसाइल का समावेश सेना, वायुसेना और नौसेना के लिए स्वतंत्र संस्करण तैयार किया गया है| २२ नवंबर, २०१७ के रोज भारतीय वायुसेना ने पहली बार ब्रह्मोस का विमान से परिक्षण किय था| 

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भारतीय नौसेना ने ‘बराक-८’ का किया परिक्षण – इस्रायल का विशेष सहयोग

नई दिल्ली – भारतीय नौसेना ने शनिवार के दिन जमीन से हवां में हमला करनेवाले मध्यम दूरी की मिसाइल का सफल परिक्षण किया| यह मिसाइल भारतीय रक्षा संशोधन संस्था (डीआरडीओ) और इस्रायल एरोस्पेस इंडस्ट्रिज इन्होंने संयुक्त प्रयत्नों से विकसित किया है| भारतीय नौसेना की ‘आईएनएस कोची’, ‘आईएनएस चेन्नई’ एवं अन्य एक युद्धपोत की सहायता से यह परिक्षण करने की जानकारी नौसेना के सूत्रों ने दी है|

‘बराक-८’ नाम से पहचाने जा रहे इस मिसाइल की खरीद के लिए भारत और इस्रायल में वर्ष २०१७ में समझौता हुआ था| भारत में ‘भारत डायनामिक्स लिमिटेड’ ने इस प्रगत मिसाईल का निर्माण हो रहा है| नौसेना के लिए विकसित हो रहे यह मिसाइल ७० किलोमीटर दूरी तक हमला करने के लिए उपयोगी है| इस दूरी में जहाज विरोधी एवं बैलस्टिक मिसाइल नष्ट करने की क्षमता भी ‘बराक-८’ रखता है|

साथ ही दुश्मनों के लडाकू विमान और ड्रोन्स को लक्ष्य करने में भी ‘बराक-८’ कामयाब होगा, यह दावा भारतीय अधिकारियों ने किया है| नए परिक्षण की वजह से भारतीय नौसेना की युद्ध करने की क्षमता बडी तादाद में बढने का विश्‍वास भी अधिकारी ने व्यक्त किया है| मिसाइल के साथ ही दुश्मनों के लडाकू विमान और ड्रोन्स को लक्ष्य करने की क्षमता के मिसाइल रखनेवाले भारत दुनिया में गिनेचुने देशों में से एक होने की बात सूत्रों ने स्पष्ट की|

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