जीवन में अनुशासन का महत्त्व – भाग ६

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने ०७ अक्टूबर २०१० के पितृवचनम् में ‘जीवन में अनुशासन का महत्त्व’ इस बारे में बताया।

गुरु के साथ चलना यानी क्या? उसकी आज्ञा का पालन करना, राईट! और जो गुरु की आज्ञा का पालन करता है, छोटी से छोटे। तो उस गुरु के चरण हमेशा उसे डिसीप्लीन प्रदान करते हैं। क्योंकि गुरु के चरण, ‘गुरु’ शब्द में ही क्या है? हम लोग क्या कहते हैं, अर्थ में क्या है? हम लोग पृथ्वी पर चल क्यों सकते हैं? चाँद पर हम चल नहीं सकते। क्यों? क्योंकि चाँद का गुरुत्वाकर्षण, पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण से बहुत कम है। 

अगर पृथ्वी पर गुरुत्वाकर्षण ना होता, ग्रॅविटेशनल फोर्स, तो क्या होता? तो हम लोग चल नहीं सकते, हम लोगों को क्या करना पड़ता? उड़ना पड़ता था। A life was impossible. लाईफ पॉसिबल तभी होता है, लाईफ यानी प्राण, जीवन, ओ.के। ये कब पॉसिबल है? जब देअर इज गुरुत्वाकर्षण और तुम्हारे पैर भूमि से चिपके हुए हैं, तभी। आप भूमि पर चल फिर सकते हैं यानी गुरुत्वाकर्षण कम भी नहीं और ज्यादा भी नहीं। इतना कम नहीं कि आप जमीन पर टिक नहीं सकेंगे और इतना ज्यादा नहीं कि आप जमीन के अंदर खींचे जायेंगे।

गुरुत्वाकर्षणये जो गुरुत्वाकर्षण जो है पृथ्वी का, पृथ्वी हमारी माँ है। वैसे ही सूर्य और पृथ्वी के बीच में जो बॉण्ड है, ये बॉण्ड, बॉण्ड भी क्या है? गुरुत्वाकर्षण है। यानी गुरुत्वाकर्षण ये विश्व का बेसिक ‘ऋत’ है। यानी हम चल कैसे सकते हैं? हमारे दो पैर हैं राईट? जब हमारा एक कदम हम लोग आगे बढ़ाते हैं, तब दूसरा भी ऊपर उठाये तो कैसा होगा? will be able to walk हमे जंम्प मारना पड़ेगा will be able to walk, not. We will not be walking, will be hopping. तो चलना है तो क्या करना चाहिए हमें? एक कदम स्थिर है भूमि पर, दूसरा कदम आगे उठा सकते हैं। ये कब पॉसिबल है? जब there is a proper गुरुत्वाकर्षण।

यानी गुरु, ये जो बसिक फोर्स हैं, उसका कार्य ही क्या है? तुम्हारे एक पैर की गति करते समय दूसरे पैर को स्थिर रखना and that is Discipline. पैर फिसल गया यानी क्या? चलने की डिसीप्लीन टूट गयी, यानी पैर फिसल गया। भौतिक स्तर पे हो या किसी भी स्तर पर। लेकिन पैर फिसल जाता है, यानी क्या? चलने की डिसीप्लीन, चलने की अनुशासन का भंग हो गया, चलने का अनुशासन खंडित हो गया और ये चलने का अनुशासन जो है, ये कौन देता है? गुरुत्वाकर्षण देता है, गुरु का आकर्षण देता है। यानी गुरु इज बेसिक युनिवर्सल फोर्स में ही क्या है? स्थिरता है और गति भी है।

स्थैर्य और गति दोनों भी चाहिए। स्थिति और गति दोनों भी चाहिए। इमॅजीन अ कार, इसमें ब्रेक नहीं है और सिर्फ एक्सीलेटर है, क्या होगा? हम लोग देखते हैं ना, हिन्दी मुव्ही में दिखाते हैं, कोई ब्रेक निकालते हैं तो क्या हो जाता है, साऊंड ऑफ म्युझिक में देखा है जिन्होंने, अच्छी बात आती है उसमें भी राईट! तो ब्रेक्स नहीं हैं और एक्सीलेटर है तो क्या? मृत्यू डेफिनेट, ऍक्सीडन्ट, डेफिनेट ऍक्सीडन्ट और एक्सीलेटर नहीं है और सिर्फ ब्रेक्स हैं, तो गाड़ी चलेगी? ऍक्सीलेटर, ब्रेक्स हैं लेकिन क्लच नहीं है, धड़कट-धड़कट-धड़कट करके गाड़ी चलेगी, राईट। इसका मतलब क्या है? गाड़ी, अगर हमारी कार अच्छी चलनी है तो क्या चाहिए? ब्रेक्स भी चाहिए अच्छी तरह, अच्छे रुप में, एक्सीलेटर भी चाहिए और क्लच भी चाहिए, राईट! आगे गियर्स भी चाहिए। ये सभी के सभी यानी क्या है? कार की डिसीप्लीन। यानी कार अच्छी तरह से चले इसकी हमी, गॅरंटी जिसे कहते हैं और ये गॅरंटी, अनुशासन ही कौन देता है हमें? गुरु फोर्स देता है। थिस युनिवर्सल फोर्स कॉल ऍज गुरुत्व। लेकिन हमें क्या चाहिए? हमें उसका आकर्षण होना चाहिए। हम क्रिकेट की गेम की तरफ आकर्षित हो जाते हैं, वैसे ही गुरु के प्रति हमें आकर्षित हो जाना चाहिए।

तब क्या होता है स्थिति और गति इनका प्रॉपर बॅलन्स यानी ब्रेक, ऍक्सीलेटर, क्लच और गियर अच्छे रूप में, सही सेहत में तुम्हारे जिंदगी की कार में लगना ये कार्य कौन करता है? सद्‍गुरु करता है। This is how brings the, he brings the Discipline. तुम्हारे जिंदगी में अनुशासन कैसे लाता है? इस वजह से लाता है, समझे। 

‘जीवन में अनुशासन का महत्त्व’ के बारे में हमारे सद्गुरु श्री अनिरुद्ध ने पितृवचनम् में बताया, जो आप इस व्हिडिओ में देख सकते हैं।

ll हरि: ॐ ll ll श्रीराम ll ll अंबज्ञ ll

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