गुरुमंत्र का बीज ‘रं’ बीज ही है

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २० अप्रैल २०१७ के प्रवचन में ‘गुरुक्षेत्रम् मंत्र का बीज ‘रं’ बीज ही है(Ram beej is the beej of Guru-Mantra)’ इस बारे में बताया।

 

तो ये शृंगीप्रकाश और भृंगीप्रकाश। पहले उनका नाम क्या था, महर्षि शृंगी, महर्षि भृंगी। बाद में नाम क्या था? शृंगीनाथ, भृंगीनाथ। बाद में नाम क्या हो गया? शृंगीप्रकाश, भृंगीप्रकाश। अभी नाम क्या हो रहा है? शृंगीप्रसाद, भृंगीप्रसाद। ये जो शृंगीप्रसाद, भृंगीप्रसाद हैं, शृंगी से लेकर शृंगीप्रसाद तक, भृंगी से लेकर भृंगीप्रसाद तक ये जो हैं, ये दोनों हमारा जो ऊपर का चक्र हैं अनाहत चक्र, इसके स्वामी कौन हैं? परमशिवजी। उनके ये जो दो सहायक हैं, शृंगीप्रसाद और भृंगीप्रसाद, ये हमारे तीन चक्रों की रक्षा करने के लिये होते हैं।

हमारे तीन चक्रों मे जो भी डिफीकल्टीयाँ उत्पन्न होती हैं वो दूर करने के लिये। इन तीनों चक्रो में शिवजी के दो खास सहायक सेनापति कार्यरत होते हैं, लेकिन कब होते हैं कार्यरत? जब उन्हें एन्ट्री करने के लिये हम लोग अलाऊड करे तभी। यानी उन्हें एन्ट्री करने के लिये वहाँ प्रवेश करने के लिये हम लोग संमति दे, मान्यता दे तभी। ये मान्यता कैसी दी जाती हैं? ऐसे बोलने से नहीं, वो शृंगी महाराज, वो भृंगी महाराज आ जाओ, नहीं ऐसे नहीं आयेंगे।

उसके लिये क्या करना पड़ता है? शृंगीप्रसाद, भृंगीप्रसाद ने क्या किया था? गलत चीज हाथ से घटी थी ऐसा समय उनके जीवन में आया था, आया था सचमुच, उन्हें लग रहा था कि ये सब अन्याय हो रहा है, भगवान को छोड़कर चले गये थे लेकिन जैसे ही भगवान ने, उनके भगवान ने त्रिविक्रम ने ही उन्हें सही रास्ते पर लाया तब से।

यानी उससे हमें क्या सीखना हैं? कि हमारे जीवन में सिर्फ हमें,.. बोलो? ‘विश्वास असावा पुरता कर्ता हर्ता गुरु ऐसा’, क्योंकि ‘रं’ बीज ये जो बीज है ये जैसे राम का है, वैसे ही ‘रं’ बीज ये ‘ह्रीं’ बीज का भी पार्ट है, जो माँ का बीज है, ‘ॐ ह्रीं’ राईट। ‘ॐ ह्रीं’ ये माँ का मंत्र है राईट। वो ‘रं’ जो हैं ‘ह्रीं’ बीज का भी पार्ट है, वैसे ही ये गुरुबीज का गुरुमंत्र का भी बीज है। मैं क्या बात करा हूँ? गुरुमंत्र का भी बीज ‘रं’ है। हर एक गुरुमंत्र का बीज ‘रं’ ही होता हैं। समझो आज तक सौ पिढीयाँ, दस लाख पिढियाँ हो गयी हो शिष्य अगर अच्छे भाव से ले रहा है तो उस हर एक गुरुमंत्र का बीज कौनसा है? ‘रं’ ही है, समझे हर एक गुरुमंत्र का बीज ‘रं’ बीज ही है। इसीलिये वो, क्योंकि वो गुरु के साथ कनेक्टेड है।

‘गुरुमंत्र का बीज ‘रं’ बीज ही है’ इस बारे में हमारे सद्गुरु श्री अनिरुद्ध ने प्रवचन बताया, जो आप इस व्हिडिओ में देख सकते हैं।

ll हरि: ॐ ll ll श्रीराम ll ll अंबज्ञ ll

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