Reply To: The Importance of Having Complete Faith in the Sadguru-experiences of devotees

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श्री साईसच्चूरित में कई भक्तों की बातें आती हैं जिसकी वजह से भक्तों की श्रद्धा दृढ होती जाती है और सदगुरुचरणों में भक्ति भी दृढ होने लगती है । सदगुरु श्री अनिरुद्ध बापूजी के भक्तों को ऐसे कई अनुभव (Experiences) हुए हैं । कई अनुभव विशेषांक में छपे हैं और कई अनुभव कृपासिंधु(Krupasindhu) में भी छपते रहते हैं । इसके अलावा यह अनुभव अपने “अनिरुद्ध बापू वीडियोस” यूट्यूब चैनल पर  (http://www.youtube.com/user/manasamarthyadatavid/videos?flow=grid&view=1) भी देखे जा सकते हैं । यह अनुभव प्रत्येक श्रद्धावान के लिए मार्गदर्शक होने के साथ साथ सदगुरुचरणों में श्रद्धा और सबुरी को दृढ करते हैं l
इस श्रध्दा एवं सबुरी अर्थात धैर्यशीलता (धीरज), भक्तों की दृढ भक्ति का प्रतीक होता है । श्रीसाईंसच्चरित (Shri Saisatcharit) का अध्ययन करने से यह बात समझ में आती है कि साईंभक्त डॉ पिल्लेजी  का नारू सदगुरु साईनाथजी की कृपा से ठीक होना एवं बापूभक्त डॉ राजीव कर्णिकजी के फेफड़ों का कर्करोग सदगुरु बापूजी की कृपा से ठीक होना इन में समानता है । इसी तरह श्री साईंसच्चरित की लोहारन के बेटे को सद्गुरु साईंनाथजी ने अग्नि में हाथ डालकर बचाना एवं बपूभाक्त श्रीमती अनिमावीरा शेट्टीगारजी का बेटा 3री  मंज़िल से गिरा फिर भी सद्गुरु बापू की कृपा से उसे कोई ईजा नहीं हुई और उसका कुशलता से बचना, इन में भी समानता है। श्री साईंसच्चरित में साईंभक्त श्री बालासाहब मिरीकरजी को सद्गुरु साईंनाथजी ने पूर्वसांकेतिक सूचना देकर सर्पदंश से बचाना और बापूभक्त श्री अंकुशसिंह चौधरीजी को उनके थाईलैंड यात्रा के दौरान पानी से दूर रहने की पूर्वसंकेतिक सूचना देकर बापू का उन्हें नौका दुर्घटना से बचने में भी समानता है।

हमारे इस फोरम में मेरी अपेक्षा है की अब हम साईंनाथजी के भक्तों को आए हुए अनुभव और बापूभक्तों को आए हुए अनुभवों के संबंध जोड़कर एक विश्वास रहे पूराकरता हर्ता गुरु सा” यह तत्व सुस्पष्ट करें ।