सारे भय ये मूलत: भ्रम हैं (All the fears are basically delusions)

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १५ मई २०१४ के पितृवचनम् में ‘सारे भय ये मूलत: भ्रम हैं’ इस बारे में बताया।

 

मैंने ये किया इसलिये भगवान ने ये किया, इस विश्वास पर अगर कभी जाओगे तो आप कहां जाओगे, गलत दिशा में जाओगे। डेव्हिल की दिशा में जाओगे, शैतान की दिशा में जाओगे। फिर वहां कारोबार ऐसे ही चलता है, लेनेदेन का। तुमने ये तंत्र मंत्र किया तो डेव्हिल ने शैतान ने खुश होकर तुम्हे ये चीज दे दी। डेव्हिल कहां से लाएगा? शैतान कहां से लायेगा? शैतान कोई भी चीज उत्पन्न नहीं कर सकता। ध्यान में रखो, जिसे आप शैतान कहो, डेव्हिल कहो, evil emperor कहो, महिषासुर कहो, वृत्रासुर कहो, खुद कुछ भी निर्माण नही कर सकते। निर्माण करने कि क्षमता सिर्फ वो माँ बेटे में है।, चण्डिका और चण्डिकापुत्र में, बाकी किसी में भी नही।

तो लोग इस्तेमाल करेंगे तो क्या करेंगे? भगवान ने जो निर्माण किया है उसका इस्तेमाल वो कर ही नही सकते। वृत्रासुर याने शैतान, डेव्हिल और उसकी माँ नियति जो है, ये कुछ भी निर्माण नही कर सकते। भगवती ने जो निर्माण किया है, परमात्मा ने जो निर्माण किया है उसका इस्तेमाल भी नही कर सकते। तो बापू ये हमें डरा कैसे सकते हैं? That is called as delusions. They create only delusions याने भ्रम। शैतान और शैतान की माँ क्या निर्माण कर सकते हैं? भ्रम, हमें डराने के लिये। और भ्रम कौन दूर कर सकता है? सिर्फ भगवान का शब्द।

हम लोग अर्थ समझे या ना समझे। भगवान के शब्द क्यों रटने चाहिये? जो dillusions हैं, भ्रम हैं, जो हमारे मन में उत्पन्न होते हैं, All fears are basically delusions. ये क्यों उत्पन्न हो जाते हैं? क्योंकि हमें वो ज्ञात नहीं है। ये जो वृत्रासुर है और उसकी माँ नियति जो है वो क्या करते रहते हैं? ऐसे भ्रम उत्पन्न करते रहते हैं जिसमें जिसमें हम लोग फँसते हैं, फँसने लगते हैं, फँस जाते हैं। यानी हमें जानना चाहिये वो कोई भी चीज इस्तेमाल नही कर सकते इसके लिये इस्तेमाल भी नही कर सकते हमारे खिलाफ। इसके लिये आवश्यक क्या है? भगवान के शब्दों को बार बार दोहराना चाहिये, कि ये सब कुछ जो है इसी के वश में है, उस एक के वश में। ये परमात्मा, उसकी माँ यानी हमारी बडी माँ इनके ही हाथों में सबकुछ है।

और ये मेरा भला नहीं कर सकता तो कोई और मेरा भला कर ही नहीं सकता। इसका मतलब क्या है? जो हो रहा है, गया है वो भी भला ही है। थोडा टाईम देने से हम लोग जान जाते हैं कि जो आज ठेस लगी थी, कल वो कितनी फायदे की थी। ओके, समझ गये, जान गये कि ये वचनों का अभ्यास – स्टडी क्यों करना है? इन्हें बार बार क्यों दोहराना है? इसलिये कि हमें कोई भ्रम ना हो जाए। कोई शैतान या शैतान की माँ आकर हमारे दिमाग को, हमारे दिल को, हमारे प्राण को खाने की कोशिश ना करे। हमें खालीफुकट बहकाये नहीं और हमारे प्रगति पथ से हमें हटाये नहीं।

So promise? You will throw away all the delusions. तुम सारे भ्रमों को दूर कर दोगे? उसे ज्ञान देते हैं। ज्ञान अलग क्या है? ज्ञान is destroying delusions, that is knowledge. जो अज्ञान है उसे दूर करना ही knowledge है। यानी अगर हम लोगों ने भ्रम को दूर कर दिया तो ज्ञान हो गया। तो ज्ञान प्राप्ति के लिये तपश्चर्या करने की आवश्यकता नहीं है, इसलिये गीता में क्या कहा है? भक्ति के पीछे ज्ञान आता है, ज्ञान के पीछे भक्ति नहीं आती।

‘सारे भय ये मूलत: भ्रम हैं’ इस बारे में हमारे सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने प्रवचन में बताया, जो आप इस व्हिडिओ में देख सकते हैं।

॥ हरि ॐ ॥ ॥ श्रीराम ॥ ॥ अंबज्ञ ॥

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