यूरोपीय महाद्वीप से जुडी घटनाएँ

गृहयुद्ध की दहलीज पर खडे फ्रान्स की सरकार को गिराएंगे – यलो वेस्ट’ प्रदर्शनकारियों के नेता की चेतावनी

पैरिस – फ्रान्स गृहयुद्ध की दहलीज पर है और यलो वेस्ट आंदोलक जल्द ही देश में मैक्रोन प्रशासन को सत्ता से नीचे खिचेंगे, ऐसी चेतावनी यलो वेस्ट आंदोलन के नेता ख्रिस्तोफ शैलेंकौन ने दी है| फ्रान्स में राष्ट्राध्यक्ष इमैन्युएल मैक्रोन इनके प्रशासन के विरोध में तीन महीनों से अधिक समय प्रदर्शन शुरू है| राष्ट्राध्यक्ष मैक्रोन ने आंदोलकों ने की सार्वमत की मांग मंजूर करने की तैयारी दिखाने के बाद भी प्रदर्शन शुरू होने से फ्रान्स में बनी स्थिति अधिक गंभीर हो रही है| ऐसे में संयुक्त राष्ट्रसंघटना ने यलो वेस्ट आंदोलकों पर फ्रान्स सरकार ने की कार्रवाई पर नाराजगी व्यक्त की है|

फ्रान्स में नवंबर महीने से यलो वेस्ट आंदोलन शुरू होकर उससे फ्रेंच जनता का मैक्रोन इनके प्रशासन के विरोध में असंतोष बढ़ता दिखाई दे रहा है| लगातार १३ हफ्तों से राजधानी पैरिस के साथ देश के विभिन्न शहरों में प्रदर्शन शुरू होकर उसे नियंत्रित करने में राष्ट्राध्यक्ष मैक्रोन असफल हुए हैं| ईंधन के दाम कम करने के बारे में किया निर्णय तथा देश में विविध गुटों से संवाद करने के लिए प्रस्ताव रखने के उपाय भी असफल होने की बात स्पष्ट हो रही है|

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रशिया-जर्मनी दरमियान बन रही ‘नॉर्ड स्ट्रीम २’ पाइपलाइन पर यूरोपीय महासंघ की नजर

ब्रुसेल्स/बर्लिन – रशिया और जर्मनी के बीच निर्माण किए जा रहे ‘नॉर्ड स्ट्रीम-२’ इस महत्वाकांक्षी ईंधन पाइपलाइन पर इसके आगे यूरोपीय महासंघ नजर रखेगा| शुक्रवार के दिन हुई यूरोपीय महासंघ की बैठक में इस पर सहमती बनी| इस मुद्दे पर फ्रान्स ने जर्मनी के विरोध में भूमिका अपनाकर यह परियोजना रोकने की धमकी दी थी| लेकिन, आखरी समय पर फ्रान्स और जर्मनी में हुए समझौते के बाद फ्रान्स ने इस मुद्दे पर किया विरोध पीछे लिया है, ऐसा सामने आ रहा है| 

नॉर्ड स्ट्रीम-२’ के द्वारा रशिया से सीधा जर्मनी तक नैसर्गिक ईंधन वायू की आपुर्ति की जाएगी और इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए ११ अरब डॉलर्स की लागत होगी| रशिया और जर्मनी इन दोनों देशों ने यह परियोजना काफी अहम होने की बात रेखांकित की है और संबंधी देशों के राष्ट्रप्रमुख ने इसका लगातार जिक्र किया है| इस पाइपलाइन की वजह से जर्मनी को रशिया से बडी मात्रा में ईंधन की सप्लाइ शुरू होगी|

लेकिन, यह परियोजना युक्रैन के साथ यूरोपीय देशों के लिए खतरा होगी और इस माध्यम से रशिया यूरोपीय देशों को नोंक पर रख सकता है, ऐसा डर पोलंड के साथ कई अन्य देश जता रहे है|

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मैसिडोनिया नाटो का ३०वा सदस्य देश बना ब्रुसेल्स में हुए बैठक में करार पर हस्ताक्षर

ब्रुसेल्स – ग्रीस के साथ नामांतर का विवाद एवं रशिया की नाराजगी इस पृष्ठभूमि पर मैसिडोनिया ने नाटो में शामिल होने के करार पर हस्ताक्षर किए हैं। ‘रिपब्लिक ऑफ नॉर्थ मैसिडोनिया’ नाम होने वाला यह देश नाटो का ३०वा सदस्य देश बना है और बाल्कन क्षेत्र में नाटो का यह चौथा सदस्य देश ठहरा है। बुधवार को करार पर किए हस्ताक्षर के बाद रशिया में मैसिडोनिया का समावेश, यह केवल प्रतीकात्मक कदम होने का दावा किया है और शीत युद्धकालीन धारणा की पुनरावृत्ति है, ऐसा आरोप किया है।

बुधवार को ब्रुसेल्स में हुए नाटो की बैठक में २९ सदस्य देशों के साथ मैसिडोनिया के विदेशमंत्री निकोला दिमित्रोव उपस्थित थे। नाटो के प्रमुख जेम्स स्टोल्टनबर्ग ने यह ऐतिहासिक दिन होने की बात कहकर मैसिडोनिया के सदस्यता करार का स्वागत किया है। नाटो अमरिका एवं यूरोप में लगभग एक अरब लोगों की सुरक्षा पर ध्यान देता है और आज उसमें आप शामिल हुए हैं। ३० देश एक दूसरों की सुरक्षा के लिए वचनबद्ध हुए हैं। आपके नाटो प्रवेश से पश्चिमी बाल्कन क्षेत्र को अधिक स्थिरता मिलेगी। यूरोप के साथ यूरो-अटलांटिक क्षेत्र के लिए यह अच्छी घटना है, ऐसे शब्दों में स्टोल्टनबर्ग ने मैसिडोनिया के प्रवेश पर प्रतिक्रिया दी है।

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