ई-मेल – भाग ५

पिछले लेख में हम ने ई-मेल की संकल्पना को समझा। ई-मेल इस्तेमाल करते समय सामनेवाले व्यक्ति से सीधे संपर्क नहीं होता। इसलिए उस व्यक्ति के समक्ष हम खुद को कितनी अच्छी तरह से पेश कर सकते हैं यह बात मायने रखती है। इसी को ई-मेल एटिकेट्स (शिष्टाचार) कहा जाता है। इन शिष्टाचारों द्वारा यह जाना जाता है कि हम कितने प्रभावी ई-मेल यूजर हैं। यह कहना कतई गलत नहीं होगा कि ई-मेल एटिकेट्स दूसरों पर हमारी छाप छोड़ते हैं। ऐसे ही कुछ एटिकेट्स इस लेख में समझाए गए हैं।

Email Eticates (ई-मेल – भाग ५- ( ई-मेल एटिकेट्स )

ई-मेल सबजेक्ट (ई-मेल का विषय)
ई-मेल लिखते समय ई-मेल का सही सबजेक्ट लिखना बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। विषय ५ से १० शब्दों का होना चाहिए। विषय हमारे ई-मेल का महत्वपूर्ण भाग है क्योंकि विषय से ही पता चलता है कि ई-मेल किसके वास्ते लिखा गया है। इसका यही मतलब है कि ई-मेल का विषय कभी भी रिक्त नहीं रखा जाना चाहिए।
अगर ई-मेल का विषय रिक्त रखा जाता है तो हम कह नहीं सकते कि ई-मेल पानेवाले व्यक्ति ने उसे पढ़ा होगा कि नहीं। हो सकता है कि ई-मेल पानेवाला उस ई-मेल को स्पैम ई-मेल समझकर उसे पढ़े ही नहीं । इसलिए विषय रिक्त नहीं रखना चाहिए।
ई-मेल पानेवाला व्यक्ति भी हमारी ही तरह ई-मेल्स का जतन करना चाहता है। अगर ई-मेल का विषय प्रभावकारी होता है तो ई-मेल पानेवाले के लिए उन्हें विषय अनुसार अलग अलग करने में आसानी होती है। इसलिए प्रभावकारी विषय लिखना महत्वपूर्ण होता है।

Cc और Bcc का उचित इस्तेमाल
आईए हम एक उदहारण लेकर Cc और Bcc का उचित इस्तेमाल देखें। मान लीजिए कि हमें एक साथ १०० लोगों को ई-मेल भेजना है। तब सभी को एक दुसरे का ई-मेल एड्रेस दिखाने की कोई जरुरत नहीं है। अर्थात पानेवाले को ई-मेल की बड़ी सूचि पढ़नी नहीं पड़ेगी और वह ई-मेल के मैसेज पर ध्यान दे पाएगा। ऐसे में सबके ई-मेल एड्रेस Bcc में रखें। Bcc में लिखे गए ई-मेल एड्रेस पानेवाले को दिखाई नहीं देते, केवल ई-मेल भेजनेवाला ही उन्हें देख सकता है। Cc में भी जो लोग सीधे सीधे किसी कार्य से जुड़े हुए हैं उनके ही ई-मेल एड्रेस लिखें। जरुरत न हो तो किसी भी व्यक्ति को Cc में न रखें।

अभिवादन (सैलूटेशन)
ई-मेल भेजते समय औपचारिकता की जरूरत है। ई-मेल वास्तव में दो लोगों के बीच होनेवाला संवाद है। इसलिए ई-मेल पानेवाले का अभिवादन करके ई-मेल लिखना आरम्भ करें। हैलो, हाय के बाद उस व्यक्ति का नाम लिखें। ई-मेल के आरम्भ में अभिवादन करने के कुछ उदाहरण निम्नलिखित हैं,
black-symbol-atHi Nikhil,
Greetings for the day

Hi Nikhil,
How are you today?

पर यदि यही ई-मेल हमें किसी वरिष्ठ अधिकारी को भेजना हो तो उसके उदहारण निम्नलिखित हैं,

Respected Sir/Madam,
Greetings for the day.

ई-मेल का अंत भी अभिवादन से ही करें। उदहारण के तौर पर,
– Many Thanks
– Yours faithfully
– Thanks and Regards

स्पेलिंग, व्याकरण
ई-मेल में स्पेलिंग की गलतियां टाली जानी चाहिए। व्याकरण सही होना चाहिए। ई-मेल सादा, सीधा तथा समझने में आसान होना चाहिए। सारा ई-मेल एक ही परिच्छेद में न लिखें। ई-मेल कम से कम २ से ३ परिच्छेदों में लिखें। प्रत्येक परिच्छेद के बाद एक पंक्ति छोड़ें जिसकी वजह से ई-मेल पढ़ने में आसानी होती है। ई-मेल की सुविधा उपलब्ध करनेवाली कम्पनियाँ स्पेल चेकर नामक एक सुविधा देती हैं ताकि ई-मेल में स्पेलिंग की गलतियाँ सुधारी जा सकें। हर बार ई-मेल भेजने से पहले स्पेल चेकर का इस्तेमाल जरुर करें।

स्पैम/जंक ई-मेल्स
जो ई-मेल्स, ई-मेल सुविधा को आपत्तिजनक लगते हैं वे स्पैम/जंक मेल में सेव होते हैं। मान लीजिए कि हमारे पास हास्य/जोक के ई-मेल हमेशा आते रहते हैं। हमारे लिए वे ई-मेल एक तरह के स्पैम/जंक मेल हो सकते हैं। कुछ अरसे बाद ऐसे ई-मेल बोर करते हैं, और उन्हें पढ़ने का मन नहीं करता। इस तरह के ई-मेल दूसरों को न भेजें। हमारी तरह उन लोगों को भी ऐसे ई-मेल बोर कर सकते हैं। ऐसे ई-मेल्स को डिलीट करना ही बहतर है।

ई-मेल्स देखने की फ्रीक्वेंसी
मान लीजिए कि हम ने किसी को ई-मेल भेजा है और चार दिनों बाद भी उसका जवाब न मिले तो हम उस व्यक्ति को फ़ोन करके ई-मेल के बारे में पूछताछ करते हैं। इस पर वह व्यक्ति कहता है कि ४ दिनों से उसने ई-मेल्स देखे ही नहीं हैं। ऐसा भी हो सकता है कि वह व्यक्ति आपके ई-मेल्स गम्भीरता से नहीं पढ़ता हो। हम चाहते हैं कि हमारे ई-मेल्स को नज़रअंदाज़ न किया जाए; और यह स्वाभाविक भी है। मगर हमें भी तो दूसरों के ई-मेल्स को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। उनके ई-मेल्स को समय पर उत्तर देना चाहिए। इसलिए आए हुए ई-मेल्स को दिन में कम से कम एक बार पढ़ना चाहिएं।

बहुत ही आसान भाषा का इस्तेमाल
ई-मेल हमारा प्रतिनिधित्व करता है अर्थात ई-मेल हमारी पहचान है। इस से आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि ई-मेल में लिखी जानेवाली भाषा कितनी महत्वपूर्ण होती है। इसका यह मतलब नहीं है कि हम कोई ऐसी भाषा लिखें ताकि पानेवाला समझे कि हम कितने प्रगल्भ हैं। बल्कि भाषा जितनी सीधी और सरल होगी उतनी आसानी से ई-मेल पानेवाले को समझ में आएगी। इसलिए हमेशा ई-मेल सरल भाषा में लिखा जाना चाहिए।

कैपिटल या स्मॉल लेटर का उचित इस्तेमाल
मेसेज लिखते समय इस्तेमाल की जानेवाली भाषा में अंग्रेजी के कैपिटल लेटर या स्मॉल लेटर का इस्तेमाल कहाँ और कैसे किया जाए यह भी जानना बहुत जरुरी है। जब हम कोई वाक्य कैपिटल में ही लिखते हैं तब पढ़नेवाला यह मतलब निकाल सकता है कि शायद मुझे डांटा जा रहा है। इसलिए ई-मेल लिखते समय हमेशा स्मॉल लेटर का इस्तेमाल करें। इस में आप पहला लेटर कैपिटल लिख सकते हैं और यदि आपको कोई वाक्य महत्वपूर्ण दिखाना हो तो उसे बोल्ड किया जा सकता है। चाहें तो उस वाक्य का रंग भी बदला जा सकता है।

ग्रूप ई-मेल का उचित इस्तेमाल
हम एक से अधिक लोगों को ई-मेल भेज सकते हैं। हमें ऐसा ई-मेल यदि कोई भेजे तो उस ई-मेल को उत्तर देने से पहले यह देखें कि क्या इस ई-मेल का उत्तर उन सभी को भेजने की जरुरत है? तभी Reply to all करें वरना Reply करें। ग्रूप ई-मेल इस विकल्प का सही तरीके से इस्तेमाल करना महत्वपूर्ण है। उदाहरण के तौर पर देखें तो एक व्यक्ति ने समारोह का निमंत्रण भेजने के लिए ग्रूप ई-मेल का इस्तेमाल किया है। ऐसे व्यक्ति को उत्तर देना हो तो Reply to all का विकल्प इस्तेमाल करके सभी को Thanks a lot लिखने के बजाए जिसने ई-मेल भेजा है उसी को Reply में Thanks a lot लिखना चाहिए।

आसान ई-मेल सिग्नेचर
ई-मेल सिग्नेचर हमेशा ऐसा होना चाहिए जो कि समझने में आसान हो। अगर जरुरत ना हो तो सिग्नेचर में फ़ोटो न डालना बेहतर है। हम किसी व्यक्ति को ई-मेल भेजते हैं, उस के उत्तर में वह व्यक्ति हमें ई-मेल भेजता है। हम फिरसे उसे उसका उत्तर भेजते हैं। इस तरह ई-मेल्स का सिलसिला चल सकता है। अगर सिग्नेचर बड़ी होगी (सिग्नेचर बार बार ई-मेल के साथ भेजी ही जाएगी) तो मेसेज की अपेक्षा सिग्नेचर ही अधिक जगह व्यापेगी और मेसेज छुप जाएंगे। इसलिए सिग्नेचर जितनी छोटी उतना बेहतर। इसलिए सिग्नेचर में आपका नाम, संपर्क के लिए संक्षिप्त जानकारी, आप किस पद पर हैं इस की जानकारी और यदि वेबसाइट हो तो उसकी लिंक इन चीजों का समावेश करें। इस से ई-मेल पानेवाला व्यक्ति हमें आसानी से पहचान पाता है।

 – समाप्त – 

भाग १भाग २भाग ३भाग ४

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