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डोकलाम घटना के बाद भारत-चीन संबध का बदलता रुख

चीन की घुसपैठ रोकने के लिए भारत की तैयारी; लदाख मे ८ हजार सैनिक तैनात

नई दिल्ली: डोकलाम के विवाद में वापसी करने पर विवश हुए चीन से इस असफलता का बदला लेने की तैयारी शुरू हुई है। चीन के राष्ट्राध्यक्ष जिनपिंग अपने कारकीर्दगी के दूसरे सत्र में डोकलाम जैसे समस्याओं का सीधा सामना करेंगे, ऐसा कहकर चीनी विश्लेषक भारत को नए घुसपैठ का इशारा दे रहे हैं। भारत ने भी इन चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए तैयारी बढाई है। जम्मू कश्मीर के लद्दाख में भारत ने लगभग ८ हजार जवानों की तैनाती करने का वृत्त है। भूतान, भारत एवं चीन इन तीनो देशो की सीमा रेखा से जुड़े डोकलाम इस सीमा भाग में चीनी सैनिकों के रास्ते निर्माण पर भारत ने आक्षेप लिया था।

डोकलाम - भारत-चीन संबध

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‘इंडो-पॅसिफ़िक’ क्षेत्र में अमरिका के सामने चीन की चुनौती, भारत का सहकार्य – अमरिकी अधिकारी का दावा

डोकलाम - भारत-चीन संबध वॉशिंगटन: अमरिका को ‘इंडो-पॅसिफ़िक’ क्षेत्र में अपने हितसंबंधों को सुरक्षित रखना है, तो इस क्षेत्र में उदय हो रही चीन की चुनौती का सामना करना पड़ेगा, ऐसा इशारा अमरिका के वरिष्ठ अधिकारी रैंडाल श्रायव्हर ने दिया है। अमरिकी संसद की ‘आर्म्ड सर्विसेज कमिटी’ के सामने बोलते समय श्रायव्हर ने आशिया-प्रशांत क्षेत्र में अमरिकी हितसंबंध और चीन की महत्वाकांक्षा परस्पर विरोधी होने की वजह से बार बार झगडे होंगे, ऐसा इशारा दिया है। लेकिन इसी दौरान उन्होंने अमरिका की भारत के साथ रक्षा विषयक हिस्सेदारी का महत्व भी श्रायव्हर ने अधोरेखित किया है।

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राष्ट्रपति के अरुणाचल प्रदेश दौरे पर चीन का आक्षेप

बीजिंग: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अरुणाचल प्रदेश दौरे पर चीन ने आक्षेप लिया है। इस दौरे से द्विपक्षीय संबंधों पर परिणाम होंगे, ऐसा इशारा चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कैंग ने दिया है। इन दौरों की वजह से भारत के चीन से साथ संबंध अधिक उलझनभरे बनने की टिप्पणी भी, कैंग ने की है। रक्षामंत्री निर्मला सीतारामन के अरुणाचल प्रदेश दौरे पर भी चीन ने आक्षेप जताया था। रविवार को राष्ट्रपति कोविंद अरुणाचल प्रदेश के दौरे पर थे, इस पर चीन से अपेक्षित प्रतिक्रिया आई है। अरुणाचल प्रदेश यह दक्षिण तिबेट होकर यह चीन का भूभाग होने का दावा चीन कर रहा है।

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पाकिस्तान ने ‘रॉ’ पर किये आरोपों का चीन द्वारा खंडन

डोकलाम - भारत-चीन संबध बीजिंग: चीन एवं पाकिस्तान में विकसित हो रहे ‘इकनोमिक कॉरिडोर’ (सीपीईसी) परियोजना के विरोध में भारत षड्यंत्र कर रहा है, ऐसा आरोप पाकिस्तान ने किया था। भारत की गुप्तचर संघटना ‘रॉ’ ने प्रस्तुत प्रकल्प रोकने के लिए ५० करोड़ डॉलर्स का प्रावधान करने का आरोप पाकिस्तानी लष्कर के जनरल हयात ने किया था। पर इस पाकिस्तान के आरोप को चीनने अमान्य करके पाकिस्तान को जोरदार धक्का दिया है। ‘सीपीईसी’ प्रकल्प की वजह से पाकिस्तान का भविष्य जरुर बदलेगा। इसकी वजह से पाकिस्तान का बढ़ रहा महत्व भारत को मंजूर नहीं, इसलिए भारत में सीपीइसी प्रकल्प के विरोध में षड्यंत्र शुरू किया है और भारत की गुप्तचर संघटना ‘रॉ’ ने इसके विरोध में स्वतंत्र विभाग तैयार किया है। 

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