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World War III

आक्रमक जापान – भाग ४

आज भी इस आक्रमकता की छाया से दोनों देश पूर्णरूप से मुक्त नहीं हुए हैं। इसके पश्चात्‌ ऍबे ने प्रधानमंत्री मोदी के जापान दौर के अन्तर्गत लगभग ३५० करोड़ डॉलर्स का निवेश करने की घोषणा की। उसी प्रकार भारत को काफ़ी बड़े पैमाने पर यांत्रिक ज्ञान एवं यांत्रिक ज्ञान पर आधारित सेवा उपलब्ध करवाने के लिए भी जापान ने मान्य किया है। भारत एवं जापान के बीच बढ़ते हुए इस सहकार्य को देख चीन के माध्यमों में खलबली मची हुई थी। वास्तविक तौर पर देखा जाए तो किसी भी देश के माध्यमों की प्रतिक्रियाओं को इतना अधिक महत्त्व नहीं दिया ... Read More »

आक्रमक जापान – भाग ३

‘सेंकाकू’ टापूसमूहों के चक्कर में हम नहीं पड़ेंगे, ऐसा आरंभिक समय में अमेरिका की ओर से कहा जा रहा था। परन्तु द्वितीय विश्वयुद्ध के पश्चात्‌ जापान के संरक्षण की ज़िम्मेदारी उठाने के लिए हम वचनबद्ध हैं, इस प्रकार के उद्‍गार अमेरिका प्रकट करने लगी। यह चीन के लिए इशारा था। ऍबे की रणनीति यहाँ पर चल गई। परन्तु चीन के साथ मुकाबला करते समय केवल अमेरिका पर निर्भर रहने में कोई समझदारी नहीं है इसीलिए ऍबे ने चीन के आक्रमकता के अधिकार में रहनेवाले दक्षिण कोरिया, तैवान जैसे देशों के साथ सभी स्तरों पर अपने संबंध दृढ़ कर लिए। इन ... Read More »

Increase in European youth joining terrorists in Syria & Iraq

The recent reports of participation of European youth in terrorist groups of Syria and Iraq has hit the western world in its face and is an extremely worrying fact for these nations. ‘The International Centre for Counter Terrorism’, an independent Hague-based think tank has brought this news to limelight through its report.  According to the report, more than 2,838 youth from just four European nations viz., Belgium, UK, France and Germany have joined Syria and Iraq based terrorist groups. At the same time, policies of the European Union have been held widely responsible for the terrorist attacks across Europe. With these ... Read More »

आक्रमक जापान – भाग २

आज इन नीतियों को अपयश मिला है ऐसा कहा जाता है। इसीलिए २०१२ के चुनाव में जोरदार यश प्राप्त करनेवाले ऍबे की लोकप्रियता पतन की ओर जा रही है। परन्तु ऍबे ने स्वयं ही मध्यावधी चुनाव करवाने का निर्णय लिया है। इससे उनका अपने यश के प्रति आत्मविश्वास बढ़ता हुआ दिखाई देता हैं। इस चुनाव में ऍबे को पहले के समान यश प्राप्त होगा या नहीं, यह कहा नहीं जा सकता है। परन्तु वे पुन: सत्ता में आयेंगे, ऐसा जापान के विश्लेषकों का मानना है। इसीलिए ऍबे द्वारा स्वीकारी गई जापान की आक्रमक नीति भी वैसी ही रहेगी। किंबहुना और ... Read More »

The Great Game of China

North Korea’s Supreme Leader, Kim Jong-Un on Saturday claimed to have successfully tested an engine designed for an inter-continental ballistic missile (ICBM). “Now North Korea can tip new type inter-continental ballistic rockets with more powerful nuclear warheads and keep any cesspool of evils in the earth including the US mainland within our striking range,” exclaimed Kim, who monitored the test. China has been alleged by the international community of aiding and abetting the nuclear and conventional weapons programmes of North Korea. But to maintain its rosy diplomatic face China has also pretended to have slapped sanction against North Korea. But ... Read More »

आक्रमक जापान – भाग १

जापान के हिरोशिमा एवं नागासाकी पर अमेरिका द्वारा अणुबॉम्ब डालने के पश्चात्‌ जापानने शरणागति स्वीकार की और द्वितीय महायुद्ध का अंत हुआ। परन्तु जापान पर होनेवाले अणुबॉम्ब के हमले को मात्र कोई भी भूला न सका। अमेरिका एवं सोवियत रशिया ये द्वितीय महायुद्ध के (जेता) परस्पर देशों के बीच शीतयुद्ध भड़क उठा। दोनों ही महासत्ताओं के तड़ाखे में दुनिया को कितनी ही बार खाक कर सकनेवाले अणुबॉम्ब एवं इसके पश्चात्‌ के समय में अणुवस्त्र भी आ गये। ब्रिटन, फ्रान्स और इनके पश्चात्‌ चीन भी अणुअस्त्रों से सज्ज हो गया। परन्तु अणु हल्ला सहन करनेवाला दुनिया का एकमात्र देश होनेवाले जापान ... Read More »

ON THE GROUNDS OF PATHANKOT ATTACK…

The year 2016, witnessed an unpleasant start with the terror attack on strategically important Pathankot Air-Force base. Pathankot is a very important, forward airbase of Western Air Command sprawling with a 25 kms periphery. On January 2, 2016 a group of six heavily armed terrorists infiltrated the air-force station. The attack saw a fierce gun-battle between Indian security forces and terrorists stretching for four days for almost 80 hours code-named “Operation Dhangu“, after the place Dhangu where the base is located. Although, investigations in Pathankot attack are still on, the security forces and intelligence agencies have blamed Jaish-e-Mohammad, a radical ... Read More »

डस्ट बोल – भाग ​ ४

    उपनिवेशियों (साम्राज्यवादिओं) ने अफ्रीका के साथ-साथ दुनिया भर में अन्य स्थानों पर भी अपना उपनिवेश स्थापित किया था। इसी उपनिवेशवाद के कारण ही हमें अफ्रीका खंड की पहचान जंगली टोलियों के रुप में, गुलामों का प्रदेश इस रुप में हुई। सच पुछा जाय तो इन उपनिवेशियों के आगमन से पूर्व अफ्रीका में कुछ समृद्ध साम्राज्य थे। परन्तु खनिज संपत्ति समृद्ध प्रदेश के रुप में अब कही जाकर अफ्रीका की पहचान बाहरी जगत को हुई है। अन्यथा अफ्रीका के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोन ही उपनिवेशवादियों ने पूरी दुनिया में बना रखा था। इसी तरह अफ्रीकन नागरिकों के मन में भी यूरोप, ... Read More »

Digital Divide

It was the year 2012. I was attending one of the seminars being delivered by Dr. Aniruddha Joshi (beloved called Aniruddha Bapu by his friends and followers). There were many IT engineers and technologists from amongst Dr. Joshi’s friends who were attending this seminar along with me. This was when Dr. Joshi asked us if we were aware of ‘Digital Divide’ and the answer which we all had was “No”… So it was for the first time that I was hearing this word ‘Digital Divide’. In very simple and clear terms Dr. Joshi explained to us this new global concept ... Read More »

डस्ट बोल – भाग ​ ३

  इक्कीसवी सदी में जहाँ पर अनेक देशों की समृद्धता आँखों को चका चौंध कर देती है, प्रगति की होड़ लगी हुई है वहीं दूसरी ओर ऐसे गरीब राष्ट्र भी हैं जहाँ के लोगों की स्थिति एवं विपन्नावस्था देख दिल पर काफ़ी आघात पहुँचता है। प्रगत राष्ट्रों में जहाँ पर हर एक विद्यार्थी के हाथ में टॅब आ पहुँचा हैं, वहीं गरीब राष्ट्रों में बहुतांश बच्चों के लिए शिक्षा हासिल करना भी नसीब नहीं। उनके लिए एक समय का भोजन मिल पाना भी मुश्किल होता है, इसके लिए उन्हें काफ़ी संघर्ष करना पड़ता है। इस दुनिया में सामाजिक विषमता का ... Read More »

Fault lines in the European Union – II

Fault lines in the European Union

A recent happening worth noting is the local elections that happened in France in which supporters of France’s far-right Front National led by Marine Le Pen narrowly lost. But despite the setback, the bigger story is the rising support for the French far-right which has been staunchly against the EU holding its policies responsible for decline in agriculture, fishing, deindustrialization, etc. Interestingly Le Pen has compared Brexit to the fall of the Berlin Wall, predicting it would mean the beginning of the end for the EU. The issue of more than one million immigrants heading for Europe from Middle East, ... Read More »

Fault lines in the European Union – Part I

Fault lines in the European Union

First of the three ‘continental unions’ formed in the year 1993 was the ‘European Union’ or the EU. As of today it is a grouping of 28 European nations. By and large this politico-economic union has so far succeeded in establishing a single market, single visa regime, common laws and policies and most importantly a single currency with a few exceptions. “Exceptions”? EU today owns the largest net wealth in the world then which are these exceptions that I am referring to and what are the reasons behind them? In the year 2009, following the global financial crisis, Greece received ... Read More »

विश्व को थर्रानेवाली ‘ आयएस ’ – भाग 3

यह जस्मिन रिवोल्यूशन या अरब स्प्रिंग देखते ही देखते ट्युनिशिया से इजिप्त, लिबीया, सिरिया इन देशों में तूफान की तरह फैल गया। हालांकि यह बहुत ही भिन्न विषय है, मगर ट्युनिशिया, इजिप्त और लिबिया इन देशों में कई दशकों से जनता को पैरोंतले रौंदनेवाले हुकूमशाहों की सल्तनत इस आंदोलन की वजह से और उसके बाद खूनी संघर्ष की वजह से पलट गई। सीरिया में अस्साद सल्तनत के विरोध में जारी निदर्शन और बाद में आतंक शुरु हो गया। आतंकी और सीरियन फौजों के बीच जारी संघर्ष में अमेरीका और अमेरीका के खाडीवाले सौदी जैसे मित्रदेश आतंकियों की तरफ हो गए, ... Read More »

डस्ट बोल – भाग ​२​

  सबराहन देश माने जाने वाले इथिओपियाने तो पिछली सदी से ही अनेक दुर्भिक्षों का सामना किया है और अब भी कर ही रहा है| परन्तु सुदान के साथ केनिया, सोमालिया जैसे देश भी पिछले दो वर्षों में दुर्भिक्ष्य के कारण झुलस गये हैं| इन चारों ही देशों के अनेक हिस्सों में जिन लोगों को अन्न के लिए त्राहि-त्राहि करते हुए प्राण गंवाने पड़े हैं, वे छूट गए आज यह बात भी कहने का समय आ गया है क्योंकि ऐसी स्थिती में यहॉं पर जीने की अपेक्षा मरना ही ठीक है क्योंकि अतिकुपोषण के कारण अस्थिपंजर शरीर लेकर जीने की ... Read More »

The Killing Concoction in Syria (Part II)

In the earlier part of this article we went back to the starting point of the conflict in Syria and understood the various militias and countries that have ganged up against each other. The conflict which earlier seemed to have been restricted to a small area and local cause seems to be engulfing the entire world in this tentacles. In addition to all the nations mentioned earlier, there have been a few additions. France and the United Kingdom have actively participated in the aerial attacks on ISIS targets in Syria while Germany is conducting ‘intelligence extraction’ sorties. It is to ... Read More »

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