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‘ जातवेद ’ ('Jaataveda') - Aniruddha Bapu Pitruvachanam 16 Apr 2015

परमपूज्य सद्‍गुरू श्री अनिरुद्ध बापूंनी त्यांच्या १६ एप्रिल २०१५ च्या मराठी प्रवचनात ‘ जातवेद ’च्या अर्थाबाबत सांगितले. ‘ जातवेद ’ शब्दाचा एक अर्थ साधारत: असा आहे की जो सर्ववेत्ता आहे असा अग्नी. जो सर्ववेत्ता आहे असा अग्नी, सर्व जाणणारा अग्नी. ‘अग्निमिळे पुरोहितं’ हे ऋगवेदातलं पहिलं वाक्य. (श्रीसूक्तातील पहिल्या ऋचेबद्दल सांगताना बापू म्हणाले) अर्थ ज्यांना लिहून घ्यायचा आहे, सरळ सरळ त्यांनी लिहून घ्यायला हरकत नाही. हे जातवेदा, सुवर्णाप्रमाणे तेजस्वी कांती असणारी,

The Use Of Gold And Silver in India Since Ancient Times (भारतात प्राचीन काळापासून केला जात असणारा सुवर्ण आणि रौप्याचा वापर )

परमपूज्य सद्‍गुरू श्री अनिरुद्ध बापूंनी त्यांच्या १६ एप्रिल २०१५ च्या मराठी प्रवचनात ‘भारतातील सुवर्ण आणि रौप्य ही वैदिक संस्कृतीने घडविलेली ताकद आहे’ याबाबत सांगितले. भारताकडे अजूनसुद्धा प्रचंड सुवर्ण आहे आणि ते कसं आहे, प्रत्येक माणसाकडे आणि ही तुमची ताकद आहे. ही भारतातल्या प्रत्येक माणसाची भारतीय संस्कृतीने, वैदिक संस्कृतीने घडवलेली ताकद आहे. इकडचं सोनं फक्त सत्ताधार्‍यांकडे नाही आहे. आणि म्हणून भारतावर कितीही आक्रमणं झाली, तरी त्या भारतीयाचं प्रत्येकाचं वैशिष्ट्य त्याला जपता

श्रीशिवगंगागौरी गदास्तोत्र की महिमा - Aniruddha Bapu

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ३ मार्च २०१६ के पितृवचनम् में’ ‘श्रीशिवगंगागौरी गदास्तोत्र की महिमा’ इस बारे में बताया। श्रीशिवगंगागौरी गदास्तोत्रम्। श्रीशिवगंगागौरी गदा, उसके हाथ में गदा रहती है ना, उसके बाजू में गदा रखी होती है। तो गदास्तोत्र। और ये जो है, इसमें जो कलियुग की जो कलि का प्रभाव बढ रहा है, ये वृत्र हम पर जो attack करता रहता है, हमारे बच्चे जो हैं, उनके पैर

श्रीशब्दध्यानयोग-प्रदक्षिणा

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ३ मार्च २०१६ के पितृवचनम् में’ ‘श्रीशब्दध्यानयोग-प्रदक्षिणा’ के बारे में जानकारी दी। दूषित वातावरण का इन्फेक्शन होने से बचने के लिये, ये बुरी प्रवृत्तियां हमारे बच्चों में ना आये और आयी हुई हों तो निकल जायें इसके लिये और मैं कुछ करने जाऊं, टाईम टाईम पर मुझे बताना पडेगा, क्योंकि मैने always बताया है आपको कि मेरा प्लॅन क्या है? कुछ भी नहीं। So,

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १४ जनवरी २०१६ के पितृवचनम् में जिंदगी में ‘आपके साथ जप करने के लिए त्रिविक्रम को बुलाइए’ इस बारे में बताया। अध्यात्म करते समय भी, बापू ने बोला है अभी ३६ बार कुछ करना है या १० बार करें, जो आप करते हो, तभी पहले उनको बुलाना, हे दादी माँ, आजा! हे त्रिविक्रम, आ मेरे साथ जप करने के लिये! तेरा जप तू ही

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ३० नवंबर २०१७ के पितृवचनम् में ‘४ सेवाओं का उपहार’ इस बारे में बताया। हर साल, हर दिन, हर पल हर एक श्रद्धावान के मन में, हर एक इन्सान के मन में ये विचार रहता है कि मैं जिस स्थिति में हूं, उस स्थिति से मैं और कैसे आगे चला जाऊं, मेरा विकास कैसा हो जाये, मुझे सुख कैसा प्राप्त हो जाये, मेरे दुख

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १८ फरवरी २०१६ के पितृवचनम् में ‘जीवन के विकास के लिये हर एक आवशक्यता पूरी करनेवाले ये ब्रम्हणस्पति हैं’ इस बारे में बताया। ये ब्रह्मणस्पति जो है, हमारे जीवन के विकास के लिये जिस जिस चीज की भी आवश्यकता है, उसे हम तक पहुँचाने वाला, स्रोतों को जो अवरोध होता है उसे काटनेवाला और स्रोत को खुला करनेवाला, हमारा सहायक है, बुद्धिदाता है, विघ्नांतक

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 18 Feb 2016 about ’God can read your mind’

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १८ फरवरी २०१६ के पितृवचनम् में ‘भगवान आपके मन को जानता है’ इस बारे में  बताया। ये जो मूलाधार चक्र हमारे हर एक के शरीर मे है, इसके स्वामी हैं ये (गणेशजी), और ये जो चक्र है, ये मनुष्य के आनंद के लिये है। उसके जीवन का अभ्युदय करने के लिये है। यहां परमानंद की बात नहीं है, यहां परमार्थ की बात नहीं है,

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 18 Feb 2016 about ’The definition Of Success’

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १८ फरवरी २०१६ के पितृवचनम् में ‘यश की व्याख्या’ के बारे में बताया। तो यही हमे जानना चाहिये कि मूल परब्रह्म तो एक ही है, तो इतने सारे रूप उसने क्यों लिये? क्योंकि हम लोग नादान हैं, हम लोग समझ नहीं पाते। हमे समझाने के लिये, उसका जो मूल स्वरुप है, वो आसान करने के लिये जगदंबा ने इस सारे उसके परिवार की निर्मिति

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 14 Jan 2016 about ’Enjoy with the name of God’

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १४ जनवरी २०१६ के पितृवचनम् में ‘भगवान के नाम के साथ आनन्द कीजिए’ इस बारे में बताया। हम लोग जब पिकनिक पे जायें तो हमारे डॅड को और दादी को बोलें कि आओ, तुम भी थोडा मजा करो। उसके लिये कुछ पैसा खर्च करने की आवश्यकता नहीं होती, सिर्फ प्यार से बुलाना। ऐसा करने की आवश्यकता नहीं है कि चार टिकीट हमारे घर के

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 14 Jan 2016 about ’Remembering best moments of life is also a recreation’

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १४ जनवरी २०१६ के पितृवचनम् में ‘जीवन के अच्छे पलों को याद करना यह भी रिक्रिएशन है’ इस बारे में बताया। तो भगवान ने सपनें बनाये रात की नींद में और ये मेडिकल टर्म जान लीजिये कि आप लोग, कुछ लोग बोलते हैं कि मुझे सपना आता ही नहीं, अरे झूठ बोल रहे हैं। ऐसा हो ही नहीं सकता। सभी को सपने आते हैं,

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 16 Mar 2017 about, Panchamukha-Hanumat-kavacham Explanation – 19 (Kraim Beej - Yuddha Beej)

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १६ मार्च २०१७ के पितृवचनम् में ‘पंचमुखहनुमत्कवचम् विवेचन’ में ‘क्रैं बीज – युद्ध बीज’ के बारे में बताया। ‘क्रैं अस्त्राय फट् इति दिग्बंधः’। – क्रैं बीज जो है इसे युद्ध बीज कहते हैं। क्या कहते हैं? युद्ध बीज। क्रैं ये युद्ध बीज है। हमारे मन में जो युद्ध चलता रहता है, खुद के साथ ही, हमारे घर में जो युद्ध चलता है, मिया बीवी

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 16 Mar 2017 about, Panchamukha-Hanumat-kavacham Explanation - 18 (Kraim Astraaya Phat)

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १६ मार्च २०१७ के पितृवचनम् में ‘पंचमुखहनुमत्कवचम् विवेचन’ में ‘क्रैं अस्त्राय फट्’ इस बारे में बताया। हम हमारे जीवन में खुद के जीवन में झाँककर देखेंगे तो हम लोग जान जाएंगे कि हमारे जीवन में हम लोग ने कितनी बार हम गुस्से के कारण कुछ गलत लफ्ज बोल देते हैं, गलत शब्द बोल देते हैं। लोगों के साथ हमारे सालों पुराने संबंध एक पल

पंचमुखहनुमत्कवचम् विवेचन – १७ (फट्  बीज) [Panchamukha-Hanumat-kavacham Explanation – 17 (Phat Beej) - Aniruddha Bapu

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १६ मार्च २०१७ के पितृवचनम् में ‘पंचमुखहनुमत्कवचम् विवेचन’ में ‘फट् बीज’ के बारे में बताया। ‘क्रैं अस्त्राय फट्’ इति दिग्बंधः। – ‘फट्’ जो है, जो किसी भी चीज का तुरंत त्याग करने के लिये, उसका नाश करने के लिये, उसका विनाश करने के लिये, उसको नष्ट करने के लिये हमेशा के लिये, जो आवाहन किया जाता है, उसका बीज है ‘फट्’। बाप रे! ये

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 16 Mar 2017 about, Panchamukha-Hanumat-kavacham Explanation - 16 ( Armor seed is 'Rhim')

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १६ मार्च २०१७ के पितृवचनम् में ‘पंचमुखहनुमत्कवचम् विवेचन – १६ (कवच का बीज ‘र्‍हीं’) ’ के बारे में बताया र्‍हीं बीज याने क्या तो इस कवच का बीज जो है, जिस बीज से ये कवच बढता है, हर एक के अंदर वो र्‍हीं याने माँ का प्रणव। जो देवी अथर्वशीर्ष जानते है, हम लोगों ने ग्रंथ में दिया हुआ है, देवी अथर्वशीर्ष, माँ का