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साईनाथ अपने भक्त को अपने समीप खींच लेते हैं  (Sainath pulls His devotee closer to him)

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २७ मार्च २०१४ के प्रवचन में ‘साईनाथ अपने भक्त को अपने समीप खींच लेते हैं’ इस बारे में बताया। हम मंदिर में जाते हैं, जरुर! ये इच्छा कैसे उत्पन्न हुई? बाबा की इच्छा ना हो, बाबा के मंदिर में या बाबा के पास, कभी नहीं जा सकते, ये पूरा भरोसा रखो। बाबा ने सौ बार बोला है साईचरित्र में कि मेरी इच्छा के बिना कोई

भगवान को एक प्यारी सी स्माईल दो (Give The Lord your warm smile)

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २७ मार्च २०१४ के प्रवचन में ‘भगवान को एक प्यारी सी स्माईल दो’ इस बारे में बताया। सो पहले जान लें कि इस स्थान पर हम लोग बाबा की उपासना करने को आये हैं, इसका मतलब है यहां बाबा हैं। तो पहले स्माईल देना, ये क्या है, हमारा कर्तव्य है। भगवान को सुबह उठने के बाद भी, उसका चित्र हमारे सामने रहेगा, तो पहले give

प्रत्येक जण स्वत:ची लढाई लढत असतो  (Everyone is fighting their own battle)

परमपूज्य सद्गुरू श्री अनिरुद्ध बापूंनी त्यांच्या २२ जानेवारी २०१५ च्या मराठी प्रवचनात ‘प्रत्येक जण स्वत:ची लढाई लढत असतो’ याबाबत सांगितले.   पण आम्हाला एक मात्र नीट कळावं लागतं की प्रयास कुठवर करायचे आणि कुठे थांबवायचे, हे आपल्याला कुठेतरी निर्णय घ्यावाच लागतो. नाहीतर शेवटी लक्षात घ्या, प्रत्येकाचं जीवन शेवटी स्वतंत्र आहे. आपण कुटुंबाच्या नात्याने, मित्रत्वाच्या नात्याने आपण आपल्या धर्माच्या नात्याने, समाजाच्या नात्याने जोडलेले जरुर असू, पण मग बाकीचे हजारो लाखो लोक

अंबज्ञ रहना बहुत आवश्यक है (It is necessary to stay Ambadnya)

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धने १५ मई २०१४ के पितृवचनम् में ‘अंबज्ञ रहना बहुत आवश्यक है’ इस बारे में बताया।   बात देखिये क्या है? कि ये भगवान का तरीका है अपने बच्चों के लिये सबकुछ वो Ready to cook. आजकल आते हैं ना पार्सल्स, ready to cook आते हैं ना, so that is what is His strategy, Ready to cook लेकिन आप लोग सोचिये वो निकाल के मैं ऐसे ही खा

जन्म और मृत्यु ये भी हमारे लिए बडे संदर्भ-बिन्दु हैं

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धने १५ मई २०१४ के पितृवचनम् में ‘जन्म और मृत्यु ये भी हमारे लिए बडे संदर्भ-बिन्दु हैं(The Birth and The Death are also the biggest reference points for us)’ इस बारे में बताया। हमारे जन्म और मृत्यु भी क्या है? They are two biggest reference points. ये संदर्भ-बिन्दु हैं। जन्म मृत्यु क्या होते हैं? संदर्भ-बिन्दु हैं, that is not a frame of reference. ये संदर्भ-बिन्दु हैं। ये कैसे

काल और दिशा ये हमारे लिए संदर्भ-बिन्दु हैं

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धने १५ मई २०१४ के पितृवचनम् में ‘दिशा और काल हमारे लिये ‘काल और दिशा ये हमारे लिए संदर्भ-बिन्दु हैं’ इस बारे में बताया। सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धने १५ मई २०१४ के पितृवचनम् में ‘दिशा और काल हमारे लिये ‘काल और दिशा ये हमारे लिए संदर्भ-बिन्दु हैं’ इस बारे में बताया। दिशा और काल ये क्या है हमारे लिये? Reference point है। यानी संदर्भ नहीं सिर्फ, reference point, it

‘ रामनामतनु ’चा अर्थ (The Meaning of `Ramnamtanu')

परमपूज्य सद्गुरू श्री अनिरुद्ध बापूंनी त्यांच्या १५ मे २०१४च्या मराठी प्रवचनात ‘ रामनामतनु ’च्या अर्थाबाबत सांगितले. त्रिविक्रमाचं काम सांगणारा हा मंत्र आहे, तो कसा आहे? तो रामनामतनु आहे. तो कसा आहे? राम नाम आणि तनु. बघा, तनु म्हणजे काय? तनु म्हणजे शरीर. नाम म्हणजे काय? नाम म्हणजे नाम ना साधं, पण नाम काय आहे? इकडे आपण बघितलं तनु, प्राण आणि काल ह्या दोन गोष्टी आहेत, मग इकडे नाम म्हणजे काय?

ध्येय गाठण्यासाठी शरीर सहाय्यक आहे. (The body helps us to achieve our goals)

सद्गुरू श्री अनिरुद्धांनी त्यांच्या १५ मे २०१४ च्या मराठी प्रवचनात ‘ध्येय गाठण्यासाठी शरीर सहाय्यक आहे’ याबाबत सांगितले. त्याचा जो समय आहे, जीवनकाळ आहे, देहाची अवस्था आहे, त्या अवस्थानुसार प्रत्येक माणसाची development झालीच पाहिजे. पटतेय? आणि हे कशाने होऊ शकतं? बुद्धीचा वापर कशासाठी तर जीवनातला समय नीटपणे वापरण्यासाठी. मग ह्याला मदत कोण करतं? शरीर. मी मनोमय देह म्हणत नाही आहे, प्राणमय देह म्हणत नाही आहे, हे जे दिसतं ना शरीर, ते

इन्द्र-शक्ति (Indra-Shakti) - Aniruddha Bapu

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध ने ६ मार्च २०१४ के पितृवचनम् में ‘ इन्द्र-शक्ति ’ के बारे में बताया। नीचे से गंदा पानी ऊपर लेके जाना, ऊपर रख देना, ऊपर रखते हुए भी नीचे फेंक देना, नीचे दे देना, वो भी without any charge. ये एक ही साथ तीन पैर चलनेवाला, तीन कदम चलनेवाला, ये त्रिविक्रम है और ये जल की शक्ति सारी उसी की है। और उसका जो मंत्र है, ‘त्रातारं इन्द्रं अवितारं

त्रिविक्रम एकसाथ तीन कदम चलते हैं  (Trivikram walks 3 steps at a time) - Aniruddha Bapu

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध ने ६ मार्च २०१४ के पितृवचनम् में ‘त्रिविक्रम एकसाथ तीन कदम चलते हैं’ इस बारे में बताया। जल जो है इस पृथ्वी पर, पृथ्वी के अंतरिक्ष में हो या पृथ्वी पर हो, कुए में हो या नदी में हो या सागर में हो, आपके बदन में हो, कहीं भी हो, ये जल जितना बना पहले, उतना ही है। करोडों करोडों साल पहले जितना जल बना, वही, उतना

भगवान की कृपा

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धने ३० जनवरी २०१४ के पितृवचनम् में ‘उनके जैसे वही सक्षम है’ इस बारे में बताया। हमारे लिये बहुत संकट हैं, अडचन है, हमें भगवान चाहिये, भगवान की कृपा चाहिये, तो पहले ये जान लो कि भगवान की कृपा किसे प्राप्त करनी है? मुझे प्राप्त करनी है। मुझे कोई लाकर देनेवाला नहीं है। मेरे लिये, अगर मुझे कुछ तकलीफ है, तो मेरी माँ दवा लेगी तो चलेगा क्या?

भगवान का प्यार हमें बदल देता है (God's love changes us)

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धने ३० जनवरी २०१४ के पितृवचनम् में ‘भगवान का प्यार हमें बदल देता है’ इस बारे में बताया। अपनापन चाहिये। अपनापन कब टिकता है? जब हम सोचते हैं कि जिससे मैं प्रेम करता हूँ, उसने मेरे लिये क्या किया है और हम गिनती बंद कर देते हैं । यह सोचोगे कि मैंने क्या किया है, तभी ध्यान में आयेगा कि ९९ चीज उसने दी है, एक चीज नहीं

भय यह हमेशा परिस्थिती से उत्पन्न होता है। (Fear is always because of condition)

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धने २३ जनवरी २०१४ के पितृवचनम् में ‘ भय यह हमेशा परिस्थिती से उत्पन्न होता है।’ इस बारे में बताया। भय, जिस चीज से आप डरते हो, वो चीज अपनेआप तुमसे ज्यादा बलशाली हो जाती है, अपनेआप। और भय कैसे उत्पन्न होता है? It is because of condition. Fear is always because of condition. सारे के सारे fears, सारे के सारे भीतियाँ जो हमारे जिंदगी में है, वो

विश्वास की सीढी (The Step of Faith

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धने २३ जनवरी २०१४ के पितृवचनम् में ‘हमें विश्वास की सीढि चढना चाहिए’ इस बारे में बताया।। हम लोग अगर बाबा के टाईम में होते, बाबा ने मुझे देखा कि नहीं, देखा कि नहीं, पूरा टाईम हमारा उसमें ही जाएगा । इधर बाबा ने देखा कि नहीं देखा। अरे, तुम तुम्हारा काम करो, उसे उसका काम करने दो ना! why you become his critics. उसे आपकी सेंसॉरशिप क्यों

लीला की व्याख्या (Definition Of Leela)

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध ने २० फरवरी २०१४ के पितृवचनम् में ‘लीला की व्याख्या’ के बारे में बताया। तो ये भगवान की कृपा जो है, दिखाई नहीं पडती, हेल्थ दिखाई नहीं पडती, हेल्थ के असर हम लोग जानते हैं। Proper आरोग्य क्या है, हम महसूस कर सकते हैं। वैसे ही भगवान की कृपा यह महसूस करने की बात होती है। और ये जो कथाओं को हम पढते हैं, ये कथाओं से