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सब जीवों में रहने वाली निद्रा यह भी माँ चण्डिका का रुप है (Mother Chandika resides in all beings in the form of Sleep) – Aniruddha Bapu

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 14 Jan 2016 that, 'Mother Chandika resides in all beings in the form of Sleep'

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १४ जनवरी २०१६ के पितृवचनम् में  ‘सब जीवों में रहने वाली निद्रा यह भी माँ चण्डिका का रुप है, इस बारे में बताया।  कुछ लोग भूल ही जाते हैं, पूरे दिन, सातों दिन हफ्ते के, महिने के तीस के तीस, इकत्तिस जो दिन हैं, साल के सारे के सारे दिन मुँह खट्टा करके जीते हैं। कभी भी देखो, चेहरा ऐसा ही बना रहता है। कैसे हो? हाँ ठीक है, चल रहा है। मैं बहुत लोगों को पूछता हूँ, कैसे हो भाई, ठीक हूँ। मुझे बहुत गुस्सा आता है, छोटा सा भी कुछ हो जाए ... Read More »

रिक्रिएशनल अॅक्टिव्हिटी (Recreational Activity) – Aniruddha Bapu

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 14 Jan 2016 that, 'Recreational Activity'

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १४ जनवरी २०१६ के पितृवचनम् में  ‘रिक्रिएशनल अॅक्टिव्हिटी’ के बारे में बताया। देखिये, पिंगला नाडी क्या है सौर यानी सूरज की नाडी है और इडा ये क्या है, चंद्र नाडी है। अब दिन भर हम लोग काम करते हैं और रात को सोते हैं, राईट! रात का सोना आवश्यक है। अगर चार रात नही सोयेंगे तो पाचवीं रात हम लोग कुछ नहीं कर सकेंगे। यानी दोनों का अस्तित्व आवश्यक है। सूरज का और चाँद का, रात का और दिन का। काम करने का और सोने का। इसलिये हमें जानना चाहियेो कि इडा जो है, ... Read More »

रिक्रिएशन का वास्तविक अर्थ (The real meaning of Recreation) – Aniruddha Bapu

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 14 Jan 2016 that, 'The real meaning of Recreation'

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १४ जनवरी २०१६ के पितृवचनम् में ‘रिक्रिएशन के वास्तविक अर्थ’ के बारे में बताया। अगर देखो तो आप ये शब्द उसके ट्रांस्लेशन में बहुत बार देख सकोगे, इडा। आप लोगों ने अगर सर्च किया कॉम्प्युटर में, मै देख चुका हूं तो इसका जो मतलब आता है Recreation meaning in Sanskrit, वहा मनोरंजन के साथ साथ इडा शब्द आता है and that is the perfect word. वही सबसे बेहतरीन शब्द है, इडा। हम लोग तो जानते हैं, इडा और पिंगला ये दो क्या हैं? नाडी है। इडा लेफ्टवाली है, पिंगला राईटवाली है। ये चंद्र नाडी ... Read More »

रीक्रीएशन यानी क्या (What is Recreation) – Aniruddha Bapu

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 14 Jan 2016 that, 'What is Recreation'

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १४ जनवरी २०१६ के पितृवचनम् में ‘रीक्रीएशन यानी क्या’, इस बारे में बताया। Recreation center, recreational work, recreational acts, recreational adjustments. Recreation. आप ऑफिस में जाईये, कहीं कार्यालय में जाईये, मॉल में जाईये, होटल में जाईये, कहीं, जो भी है वहां ये recreation या recreational. अगर हम लोग इसका मतलब ढूंढना चाहते हैं डिक्शनरी में तो आसान है, आप सभी लोगों के पास डिक्शनरी है। इसका मिनींग क्या बताया जाता है हम लोगों को, तो मनोरंजन। यानी हम लोग ये भूल जाते हैं कि ये कई जगह इसकी जो डिटेल्ड डिक्शनरीज होती है उसमे ... Read More »

गणपति पीडादायी स्मृतियों को काट देते हैं (The Ganapati chops down the painful memories) – Aniruddha Bapu

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 28 Apr 2016 that, 'The Ganapati chops down the painful memories'.

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २८ एप्रिल २०१६ के पितृवचनम् में ‘ गणपति पीडादायी स्मृतियों को काट देते हैं ‘, इस बारे में बताया। उसने वादा किया है अपनी माँ से कि जब भी कोई भी भक्त, मेरा भक्त, हे माँ, मेरा भक्त, मुझे सच्चे दिल से बुलाएगा, ये जानकर कि मै विघ्नों का नाश करता हूं, ये जानकर कि पहले उसकी कुबुद्धि को सुबुद्धि बनाता हूं, ये जानकर जो मुझे बुलाएगा, मैं अवश्य जाऊंगा। और वे अपना वचन कभी तोडते नहीं। हमें भी हमारा वचन कभी नहीं तोडना चाहिये। इन्सान है, गलती हो सकती है, उन पर वो ... Read More »

‘ॐ लं’ का जाप करते हुए जमीन पर नंगे पाव चलना चाहिए (Walk barefoot on the Earth, Chant Lam) – Aniruddha Bapu

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 28 Apr 2016 that Walk barefoot on the Earth, Chant Lam

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २८ एप्रिल २०१६ के पितृवचनम् में  ‘ॐ लं’ का जाप करते हुए जमीन पर नंगे पाव चलना चाहिए, इस बारे में बताया। जो गलत ions, ions यानी क्या बोलते हैं पोटॅशियम (K+), क्लोराईड (Cl-), ये जो ions हैं, फ़्री ions, हमारी बॉडी में जो रहते हैं, वो बहुत हार्म करते हैं, हमारे शरीर को बहुत तकलीफ पहुँचा सकते हैं। लेकिन जब हम जमीन पर चलते हैं, नंगे पाव, तो अर्दिंग (Earthing) होकर चलते हैं। ये सारे विद्युत् भारित कण हैं ना, वो अपने आप जमीन में चले जाते हैं और हमारा शरीर क्लीन होता ... Read More »

हमें एकदंत की शरण में जाना चाहिए (We must surrender to Ekadanta) – Aniruddha Bapu

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 28 Apr 2016 that We must surrender to Ekadanta

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २८ एप्रिल २०१६ के पितृवचनम् में ‘हमें एकदंत की शरण में जाना चाहिए’, इस बारे में बताया।  हमें ये जानना चाहिये कि भगवान अपने वचन को कभी नहीं तोडता, एक इन्सान अपने वचन को तोडता रहता है, और इसीलिये उसके जीवन में हमेशा ये युद्ध रहता है। जब तक उसने भगवान को जो वचन दिया है, उस वचन के अनुसार वो अपनी जिंदगी में कोशिश करता रहता है, पूरा का पूरा यशस्वी ना हो, हम ऐसा नहीं सोचें कि भगवान हमारे सामने खडे हैं और हम से वचन माँग रहे हैं, लेकिन जो वचन ... Read More »

भगवान कभी भी अपना वादा तोडते नहीं हैं (God never breaks His promises) – Aniruddha Bapu

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 28 Apr 2016 that God never breaks His promises

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २८ एप्रिल २०१६ के पितृवचनम् में ‘भगवान कभी भी अपना वादा तोडते नहीं हैं’, इस बारे में बताया। जब हम संघर्ष को युद्ध मानते हैं, और हमारा संघर्ष सबसे ज्यादा किसके साथ रहता है, भगवान के साथ। संघर्ष है तब तक अच्छा है, भगवान के साथ जब युद्ध करने लगते हैं, तब महिषासुर के सैनिक बन गये। हम बहुत बार सोचते हैं, बापू हम लोग इतनी भक्ति करते हैं, एक है हमारा दोस्त कोई भक्ती नहीं करता, पर उसका सालों से सब अच्छा चल रहा है। और पहले भक्ति करता था, भक्ति छोड दी, ... Read More »

गणपतिजी बुरे विचारों को निकाल देते हैं (Ganapati removes the bad thoughts) – Aniruddha Bapu

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 28 Apr 2016 that Ganapati removes the bad thoughts)

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २८ एप्रिल २०१६ के पितृवचनम् में ‘गणपतिजी बुरे विचारों को निकाल देते हैं’, इस बारे में बताया। ब्रह्मर्षि भारद्वाज कहते हैं, अपने शिष्य से, एक गणपति का रहस्य बताते हुए, कि हाथ में गणपतिजी ने दांत किसलिए रखकर वे मूलाधार में बैठे हुए हैं, इसलिए कि मूल में ही गलत विचार, जब निकलने लगते हैं, तब जो गणपति का सही भक्त है, तो गणपति का दांत उसपर फेंका जाता है, गणपति फेंकते हैं और जीभ जो है, हिलती ही नहीं, गलत शब्द मुँह से निकलेगा ही नहीं। ये कब होगा? भरद्वाज ऋषि क्या कहते ... Read More »

मूलाधार चक्र के स्वामी एकदन्त गणेश हैं (The presiding deity for the Muladhara Chakra is ‘Ekadant’ Ganesha) – Aniruddha Bapu

Aniruddha Bapu told in Pitruvachanam 28 Apr 2016 that The presiding deity for the Muladhara Chakra is ‘Ekadant’ Ganesha

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २८ एप्रिल २०१६ के पितृवचनम् में  ‘मूलाधार चक्र के स्वामी एकदन्त गणेश हैं’, इस बारे में बताया। यह उच्चारण की क्लॅरिटी (clarity) देनेवाला शस्त्र क्या है? दन्त। दिखानेवाला दाँत है। यही क्लॅरिटी का बेसिक है। क्या हम जो मन में होता है, वही उच्चार करते हैं? नहीं, हमारे खाने के दाँत अलग, दिखाने के दाँत अलग। ये कहता है, दिखाने के दाँत भी एक ही होना चाहिये, दो नहीं।  आचार के, विचार के, उच्चार के। उच्चार भी क्या है? एक है आचार यानी आचरण, उसकी क्लॅरिटी देने के लिये।  हमारे मन में जब गुस्सा ... Read More »

लफ्ज ये शस्त्र से ज्यादा दर्द देते हैं (Words hurt more deeply than weapons) – Aniruddha Bapu

Aniruddha Bapu told in Pitruvachanam 28 Apr 2016 that Words hurt more deeply than weapons

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २८ एप्रिल २०१६ के पितृवचनम् में  ‘लफ्ज ये शस्त्र से ज्यादा दर्द देते हैं’, इस बारे में बताया। हमें कुछ philosophies में नही जाना है। हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में जो हम लोग कर रहे हैं, हमारे  जीवनभर हम लोग जो कर रहे हैं, हर चीज, उस में हम लोग कैसे अच्छे बनें और विकसनशील बनें, और बेहत्तर बनें, इसलिये हम ये कोशिश कर रहे हैं। तो दाँत जो है, एक दाँत में कितनी सारी नर्व्हस होती हैं! वह कुछ हलचल नहीं करता, लेकिन फिर भी इतनी सारी नर्व्हस हैं। स्पष्ट उच्चारण करने के ... Read More »

संघर्ष से अर्थपूर्ण संवाद का निर्माण होना चाहिए (The struggle must construct the meaningful dialogue) – Aniruddha Bapu

संघर्ष से अर्थपूर्ण संवाद का निर्माण होना चाहिए

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २८ एप्रिल २०१६ के पितृवचनम् में ‘संघर्ष से अर्थपूर्ण संवाद का निर्माण होना चाहिए’, इस बारे में बताया। हम लोग ये ही नहीं समझते कि सही क्या है, गलत क्या है? और सही और गलत के बीच में हमेशा युद्ध होता रहता है, हमारे मन में। और जो संघर्ष होना चाहिये – संघर्ष याने meaningful dialogue, अर्थपूर्ण संवाद, अर्थपूर्ण चर्चा, अर्थपूर्ण analysis, विश्लेषण, अर्थपूर्ण डीबेट, अर्थपूर्ण चर्चा, ये संघर्ष है। हमारे मन में, कभी मन इस ओर है, तो कभी इस ओर है। इस संघर्षों को हमें मिटाना चाहिये पहले, नहीं, युद्ध को मिटाना ... Read More »

बच्चे का जन्म यह माँ और बच्चे के बीच का युद्ध नहीं है, बल्कि एक स्वाभाविक प्रक्रिया है (The Childbirth is a natural process and not a conflict between Mother and Child) – Aniruddha Bapu

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २८ एप्रिल २०१६ के पितृवचनम् में  ‘बच्चे का जन्म यह माँ और बच्चे के बीच का युद्ध नहीं है, बल्कि एक स्वाभाविक प्रक्रिया है’, इस बारे में बताया। बच्चा जब जनम लेता है, तब भी कितना संघर्ष होता है उसके लिये। युद्ध नहीं वो करता अपनी माँ के साथ, उसकी माँ भी उसके साथ युद्ध नही कर रही। ये सोचिये जो बालक, एक very comfortable atmosphere में, खुश, आरामदायी वातावरण में रह रहा है, उसे अभी उसी घर की दीवारें यानी गर्भाशय की वॉल्स, they are contracting, वो आकुंचन प्रसरण की क्रिया हो रही ... Read More »

स्वयं का स्वयं के साथ होनेवाला संघर्ष यह सब से बडा संघर्ष होता है (Inner Conflict is the hardest form of conflict) – Aniruddha Bapu

स्वयं का स्वयं के साथ होनेवाला संघर्ष यह सब से बडा संघर्ष होता है - Aniruddha Bapu

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २८ एप्रिल २०१६ के पितृवचनम् में ‘स्वयं का स्वयं के साथ होनेवाला संघर्ष यह सब से बडा संघर्ष होता है’, इस बारे में बताया। सबसे बडा संघर्ष होता है या युद्ध होता है, वो हमारे मन में ही, खुद का ही खुद के साथ। मैंने last गुरुवार को बताया आपको कि ये ‘शं’ बीज जो है, ये क्या करता है, मर्यादा में डालता है, हमारे मन के कुतर्कों को। हमारे मन को कुतर्क करने की आदत ही लगी रहती है, फिर उसे मर्यादित करने के लिये ये शं बीज आता है।  ऐसे कुतर्कों के ... Read More »

संघर्ष से विकास होता है (The Struggle brings the Growth) – Aniruddha Bapu

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २८ एप्रिल २०१६ के पितृवचनम् में  ‘संघर्ष से विकास होता है’, इस बारे में बताया। संघर्ष क्या है? संघर्ष। कौन सही या कौन गलत ये decide करने के लिये नहीं होता। संघर्ष होता है, विकास के लिये। संघर्ष किस लिये होना चहिये? विकास के लिये। मेरी भी भलाई हो और सामनेवाले की भी भलाई हो। जैसे, स्कूल में देखो, डिबेट रहती है, वाद विवाद स्पर्धा। दो ग्रुप्स हैं, कोई एक विषय पर डिस्कशन चल रहा ह॥ अगर वो हेल्दी है, एक दूसरे के साथ फाईट भी कर रहा है, फाईट यानी not boxing, argument ... Read More »

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