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अभिवंदन शब्द का अर्थ

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने १५ अप्रैल २०१० के पितृवचनम् में ‘अभिवंदन शब्द का अर्थ’ इस बारे में बताया। तो अभिवंदन करते समय क्या होता है, जो कर्दम ऋषि ने किया वो पूर्ण रूप से अभिवंदन है कि ‘इसके चरणों से अधिक श्रेष्ठ कुछ भी नहीं, कुछ भी नहीं’ ये अभिवंदना है बस्‌! ‘The Best, The Best I got The Best’ right, इस भाव से अपना मस्तक उनके चरणों में रखोगे

Aniruddha Bapu told in Pitruvachanam 28 Apr 2016 that The presiding deity for the Muladhara Chakra is ‘Ekadant’ Ganesha

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २८ एप्रिल २०१६ के पितृवचनम् में  ‘मूलाधार चक्र के स्वामी एकदन्त गणेश हैं’, इस बारे में बताया। यह उच्चारण की क्लॅरिटी (clarity) देनेवाला शस्त्र क्या है? दन्त। दिखानेवाला दाँत है। यही क्लॅरिटी का बेसिक है। क्या हम जो मन में होता है, वही उच्चार करते हैं? नहीं, हमारे खाने के दाँत अलग, दिखाने के दाँत अलग। ये कहता है, दिखाने के दाँत भी एक