Sadguru Aniruddha Bapu

नामस्पर्श

हरि ॐ, श्रीराम, अंबज्ञ, नाथसंविध्‌, नाथसंविध्‌, नाथसंविध्‌. हम यह जो मंत्रगजर करते हैं – ‘रामा रामा आत्मारामा….’, वह कहाँ जाकर पहुँचता हैं? क्या हवा में घूमता रहता है इधर कहाँ? या पूरे ब्रह्मांड में या हवा में जाकर पहुँचता है? कहाँ जाता होगा? There is a definite place, where it goes….where it reaches….where it is absorbed….where it is pulled. Only one place. कौनसी जगह हैं वह? त्रिविक्रमनिलयम श्रीगुरुक्षेत्रम्‌॥ हम लोग

Sadguru Shree Aniruddha’s Pitruvachan (Part 2) – 21 March 2019 - What is Procrastination?

Hari Om | Sriram | Ambadnya Naathsamvidh | Naathsamvidh | Naathsamvidh So…for last many years, the young generation has been telling me, ‘Bapu, you’ve started speaking in Hindi, why don’t you (speak in) English?’ I said, ‘I am Indian, okay? I know only Indian languages. I learned in vernacular medium school. As per [that], I don’t know English, so I will not be (speaking in English)’; but then, people are

Sadguru Shree Aniruddha’s Pitruvachan (Part 1) – 21 March 2019

हरी ॐ. श्रीराम. अंबज्ञ. नाथसंविध्‌. नाथसंविध्‌. नाथसंविध्‌. So, होली खेलकर आये हुए हैं बहुत लोग। खेले कि नहीं खेले? खेले…नहीं खेले…क्यों? [आपके साथ खेलना था] अरे भाई, मैं तो बुढ्ढा हो चुका हूँ, कहाँ होली खेलनी हैं। रंग नहीं खेलते आप लोग? क्यों? जो नहीं खेला होगा, वो हात ऊपर करें। जिन्होंने रंग खेला, वो लोग हाथ ऊपर करें। Very good, ऍब्सोल्युटली, मस्त, क्लास। बाकी लोग क्यों नहीं खेले? हमारी

Sadguru Shree Aniruddha’s Pitruvachan (Part 1) – 07 March 2019

॥ हरि: ॐ ॥ श्रीराम ॥ अंबज्ञ ॥ ॥ नाथसंविध्‌ ॥ नाथसंविध्‌ ॥ नाथसंविध्‌ ॥ हररोज कई बार हमारे मन में एक सवाल उठता है – ‘क्यों?’ यह ‘क्यों’ हुआ? ऐसा ‘क्यों’ हुआ? ऐसा ‘क्यों’ नहीं हुआ? ‘Why?’ ‘Why?’ ‘Why?’ Whole life we are facing this problem – ‘Why’? पूरी ज़िन्दगी हम लोग इस सवाल के साथ जूझते रहते हैं – ‘Why’; and we never get answer. हमें कभी जवाब

जयंती मंगला काली

हरि ॐ २१-०२-२०१९ हरि ॐ. श्रीराम. अंबज्ञ. नाथसंविध् नाथसंविध् नाथसंविध्. ‘रामा रामा आत्मारामा त्रिविक्रमा सद्गुरुसमर्था, सद्गुरुसमर्था त्रिविक्रमा आत्मारामा रामा रामा’ जो कोई भी यह जप करता है, मंत्रगजर करता है, (वह) भक्तिभावचैतन्य में रहने लगता है। कुछ लोगों के मन में प्रश्न उठा है। सही प्रश्न है – ‘बापू, यह मंत्रगजर तो सर्वश्रेष्ठ है, आपने बताया, मान्य है हमें Definitely। लेकिन ‘माँ’ का नाम नहीं है इसमें?’ यह मैंने पहले

सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापु के अग्रलेख ऑनलाईन पढने का स्वर्णिम अवसर

हरि ॐ हम श्रद्धावानों को त्रि-नाथों से जोडने वाले ‘समर्थ-सेतु’ स्वयंभगवान श्री त्रिविक्रम के भक्तिभाव चैतन्य में रहना, यही हर एक श्रद्धावान के लिए राजमार्ग है, यह मार्गदर्शन हमें परमपूज्य सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापु दैनिक प्रत्यक्ष के अग्रलेखों से कर रहे हैं। हम सभी जानते हैं कि सद्गुरु श्रीअनिरुद्धजी विभिन्न मार्गों से अपने श्रद्धावान मित्रों के साथ संवाद करते हैं। हर गुरुवार को श्रीहरिगुरुग्राम में होने वाले पितृवचन (प्रवचन) के

Happy New Year 2019

|| Hari Om || I take this opportunity to wish all Shraddhavans a happy and a prosperous new year. Let the grace of Aai Mahishasurmardini and Param Pujya Aniruddha Bapu fill every Shraddhavan’s life with joy forever. – Samirsinh Dattopadhye 01-Jan-2019

त्रिविक्रम के १८ वचन

हरि ॐ, दिनांक २२ दिसम्बर २०१८ यानी दत्तजयंती से श्रीवर्धमान व्रताधिराज का आरंभ हो रहा है। सद्‍गुरु श्रीअनिरुद्धजी के बतायेनुसार कई श्रद्धावान ‘स्वयंभगवान त्रिविक्रम के १८ वचन’ बतौर ‘व्रतपुष्प’ लेनेवाले हैं। श्रद्धावानों की सुविधा के लिए स्वयंभगवान त्रिविक्रम के १८ वचन मराठी, हिन्दी और अँग्रेज़ी में उपलब्ध कराये जा रहे हैं। ——————————– ——————————————   —————————————— । हरि ॐ । श्रीराम । अंबज्ञ । । नाथसंविध्‌ ।

Bapu’s grace

अगदी लहानपणापासून प्रत्येकाला काही करायचे असते आणि काही बनायचे असते, म्हणजेच काहीतरी बदलायचे असते. हा हवा असणारा बदल ही त्या त्या मानवासाठी त्याच्या अपेक्षित प्रगतीची पाऊलवाट असते. अगदी दहा वर्षाच्या बालकापासून ते सत्तर वर्षाच्या वृद्धावस्थेत येऊन पोहोचलेल्या प्रौढापर्यंत प्रत्येकाला आहे त्या स्थितीत, आपण आणखी काही चांगले करायला हवे होते, मिळवायला हवे होते असे वाटतच राहते. मानवाची ही स्वत:च्या परिस्थितीत अधिक चांगले बदल घडवून आणण्याची इच्छाच त्याच्या विकासाला कारणीभूत ठरते. परंतु

Bapu’s grace

Right from childhood, everyone wants to do something and to become someone, in other words, everyone wants to bring in a certain change. Moreover, this change that he longs for, is for each one, his respective path to the progress he looks forward to. ‘In his given circumstances, he could have done better things or done them in a better way; he could have achieved better things or in a

पिपासा-३ प्रकाशन सोहळा

 आज सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांच्या, दैनिक ‘प्रत्यक्ष’मध्ये प्रकाशित होणाऱ्या ‘स्वयंभगवान श्रीत्रिविक्रमा’बद्दलच्या अग्रलेखांतून आपल्याला ‘भक्तिभाव चैतन्या’विषयी, त्याच्या सर्वोच्च श्रेष्ठतेविषयी आणि मानवजीवनातील त्याच्या आवश्यकतेविषयी माहिती होतच आहे. पण जेव्हा हा ‘भक्तिभाव चैतन्य’ शब्द आपल्याला माहीतही नव्हता, तेव्हादेखील श्रद्धावानाला ‘पिपासा’ संग्रहातील अभंगांनी ‘भक्तिभाव चैतन्यातच’ चिंब भिजवून टाकले होते. थकलेल्या, क्लांत मनाला शांत करून नवी उभारी देण्याची ताकद ह्या ‘पिपासा’मध्ये आहे. “ ‘पिपासा’च्या अभंगांनी आमचा भक्तिविषयक दृष्टिकोन, नव्हे एकंदर जीवनाविषयीचा दृष्टिकोनच आमूलाग्र बदलून गेला व