Pravachans of Bapu

खुद के कंधे पर खुद का सर होना चाहिये (Should be the head of self on own shoulder)

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ९ अक्तुबर २०१४ के प्रवचन में ‘खुद के कंधे पर खुद का सर होना चाहिये’ इस बारे में बताया।   खुद के जिंदगी में इसलिये सिर्फ ये सिखो, कि बाबा जो है वो क्या करता है हमारी अच्छी मूरत बनाना चाहता है। लेकिन हमारा पाषाण जो है, हमारा पत्थर जो है, जब हम लोग सोचेंगे, कि बाबा चाहे तो आप छिन्नी उठाओ, बाबा आप चाहे

हमारी हर एक की अपनी अपनी क्षमता होती है (We All Have Our Own Abilities)

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ९ अक्तूबर २०१४ के प्रवचन में ‘हमारी हर एक की अपनी अपनी क्षमता होती है’ इस बारे में बताया।   पहले inter science था, अभी तो उसके बाद में, बहुत सालों के बाद, १२वीं आयी, inter-science के बाद, मतलब १२वीं के बाद समझो, 12th के बाद, एक तो बच्चे मेडिकल में जायेंगे, engineering में जायेंगे तो सिर्फ कौन से, तो इलेक्ट्रिकल, mechanical, उसके बाद में

खोजिए और आपको मिल जायेगा (Search and you will get)

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ९ अक्तूंबर २०१४ के प्रवचन में ‘खोजिए और आपको मिल जायेगा’ इस बारे में बताया।   उसने हमें क्या नही दिया, सब कुछ दिया है। तो पहले खोजो। खुद को सर्च करो पहले, मेरे पास क्या है? मेरे पास क्या क्षमता है? What are my capacities? उन्हें ढुंडो जरा। बहुत सारे लोग जीवन के अंत तक जान नही सकते कि मेरे पास क्या खास है?

प्रार्थना ही हमारे सामर्थ्य का स्रोत है (The Prayer is the source of our strength)

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २७ मार्च २०१४ के प्रवचन में ‘प्रार्थना ही हमारे सामर्थ्य का स्त्रोत है’ इस बारे में बताया। हमारे लिये जो आवश्यक है जितनी प्रार्थना, उतनी प्रार्थना वो हमे जरूर देगा। दर-दर जाकर भीक माँगने की आवश्यकता नहीं है। मेरा बाप जो है उसने हमें जनम देते समय जो इस्टेट दी है हमें, उसपर पूरा जनम चल रहा है। right? दिन में कितनी बार हार्ट बीट्स

साईनाथ अपने भक्त को अपने समीप खींच लेते हैं  (Sainath pulls His devotee closer to him)

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २७ मार्च २०१४ के प्रवचन में ‘साईनाथ अपने भक्त को अपने समीप खींच लेते हैं’ इस बारे में बताया। हम मंदिर में जाते हैं, जरुर! ये इच्छा कैसे उत्पन्न हुई? बाबा की इच्छा ना हो, बाबा के मंदिर में या बाबा के पास, कभी नहीं जा सकते, ये पूरा भरोसा रखो। बाबा ने सौ बार बोला है साईचरित्र में कि मेरी इच्छा के बिना कोई

भगवान को एक प्यारी सी स्माईल दो (Give The Lord your warm smile)

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २७ मार्च २०१४ के प्रवचन में ‘भगवान को एक प्यारी सी स्माईल दो’ इस बारे में बताया। सो पहले जान लें कि इस स्थान पर हम लोग बाबा की उपासना करने को आये हैं, इसका मतलब है यहां बाबा हैं। तो पहले स्माईल देना, ये क्या है, हमारा कर्तव्य है। भगवान को सुबह उठने के बाद भी, उसका चित्र हमारे सामने रहेगा, तो पहले give

प्रत्येक जण स्वत:ची लढाई लढत असतो  (Everyone is fighting their own battle)

परमपूज्य सद्गुरू श्री अनिरुद्ध बापूंनी त्यांच्या २२ जानेवारी २०१५ च्या मराठी प्रवचनात ‘प्रत्येक जण स्वत:ची लढाई लढत असतो’ याबाबत सांगितले.   पण आम्हाला एक मात्र नीट कळावं लागतं की प्रयास कुठवर करायचे आणि कुठे थांबवायचे, हे आपल्याला कुठेतरी निर्णय घ्यावाच लागतो. नाहीतर शेवटी लक्षात घ्या, प्रत्येकाचं जीवन शेवटी स्वतंत्र आहे. आपण कुटुंबाच्या नात्याने, मित्रत्वाच्या नात्याने आपण आपल्या धर्माच्या नात्याने, समाजाच्या नात्याने जोडलेले जरुर असू, पण मग बाकीचे हजारो लाखो लोक

सारे भय ये मूलत: भ्रम हैं (All the fears are basically delusions)

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १५ मई २०१४ के पितृवचनम् में ‘सारे भय ये मूलत: भ्रम हैं’ इस बारे में बताया।   मैंने ये किया इसलिये भगवान ने ये किया, इस विश्वास पर अगर कभी जाओगे तो आप कहां जाओगे, गलत दिशा में जाओगे। डेव्हिल की दिशा में जाओगे, शैतान की दिशा में जाओगे। फिर वहां कारोबार ऐसे ही चलता है, लेनेदेन का। तुमने ये तंत्र मंत्र किया तो डेव्हिल

अंबज्ञ रहना बहुत आवश्यक है (It is necessary to stay Ambadnya)

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धने १५ मई २०१४ के पितृवचनम् में ‘अंबज्ञ रहना बहुत आवश्यक है’ इस बारे में बताया।   बात देखिये क्या है? कि ये भगवान का तरीका है अपने बच्चों के लिये सबकुछ वो Ready to cook. आजकल आते हैं ना पार्सल्स, ready to cook आते हैं ना, so that is what is His strategy, Ready to cook लेकिन आप लोग सोचिये वो निकाल के मैं ऐसे ही खा

जन्म और मृत्यु ये भी हमारे लिए बडे संदर्भ-बिन्दु हैं

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धने १५ मई २०१४ के पितृवचनम् में ‘जन्म और मृत्यु ये भी हमारे लिए बडे संदर्भ-बिन्दु हैं(The Birth and The Death are also the biggest reference points for us)’ इस बारे में बताया। हमारे जन्म और मृत्यु भी क्या है? They are two biggest reference points. ये संदर्भ-बिन्दु हैं। जन्म मृत्यु क्या होते हैं? संदर्भ-बिन्दु हैं, that is not a frame of reference. ये संदर्भ-बिन्दु हैं। ये कैसे