Pravachans of Bapu

और देवता चित्त न धरई। (Aur devata chitta na dharai)

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ४ फरवरी २०१६ के प्रवचन में ‘और देवता चित्त न धरई’ इस बारे में बताया।   हमें एक करोड़ जप करने के बाद ही भगवान कृपा करेंगे ऐसा नहीं हैं। हमने जन्म में कभी भी नाम नहीं लिया है, पहली बार लिया, फिर भी वह काम करने वाला है, यह जान लो। लेकिन थोड़ी सी सबूरी रखना आवश्यक है ना! भगवान ने कभी ऐसा किया है,

आपके हृदय में भक्ति का होना यह आपके लिए आवश्यक है - भाग २

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ४ फरवरी २०१६ के प्रवचन में ‘आपके हृदय में भक्ति का होना यह आपके लिए आवश्यक है- भाग २’ इस बारे में बताया।   आप टिफीन लेके जा रहे हैं अपनी बॅग में, राईट, उस बॅग में समझो नीचे ऐसी बॅग होती है राईट, तो पीछे ऐसी बॅग है, यहाँ नीचे यहाँ टिफीन रखा हुआ है, ये जो पार्ट है वो अगर समझो टूट गया रास्ते

आपके हृदय में भक्ति का होना यह आपके लिए आवश्यक है

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ४ फरवरी २०१६ के प्रवचन में ‘आपके हृदय में भक्ति का होना यह आपके लिए आवश्यक है’ इस बारे में बताया।   मैं आपको एक चीज़ आज बोलना चाहता हूँ, हम बहोत सारे लोगों के मन में बचपन से बैठा हुआ है ये विचार, हमें बार-बार बोला भी जाता है। आप भक्ति नहीं करोगे तो भगवान कैसे प्रसन्न होगा? गलत। भगवान को आप की भक्ति की

रामभरोसे इस शब्द का अर्थ (The Meaning of the word Ramabharose)

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ४ फरवरी २०१६ के प्रवचन में ‘रामभरोसे इस शब्द के अर्थ’ के बारे में बताया। अभी आप बहोत सारे बच्चे एक्झाम में जाने वाले हैं, अरे बापरे! कौनसा क्वेश्चन (Question) आयेगा मालूम नहीं, क्या होगा मालूम नहीं? डरने की ज़रूरत नहीं। राम का नाम लीजिये, नहीं तो आपका अगर गुरु साईनाथ है, आप साईनाथ को मानते हैं, स्वामीसमर्थ को मानते हैं, उनका नाम लीजिये और बिनधास्त

रामनाम भय की नामोनिशानी मिटा देता है - भाग २

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ४ फरवरी २०१६ के प्रवचन में ‘रामनाम भय की नामोनिशानी मिटा देता है’ इस बारे में बताया। और ये भी जान लीजिये, कोई भी भय जो है, जो शरीर के साथ जुड़ा है, उसका नाश किससे होता है? रामनाम लेने से होता है। मूलाधार चक्र, स्वाधिष्ठान चक्र और मणिपूर चक्र ये तीन चक्र प्रबल होने के कारण, सामर्थ्यवान होने के कारण इस भय का नाश होता

रामनाम भय की नामोनिशानी मिटा देता है

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ४ फरवरी २०१६ के प्रवचन में ‘रामनाम भय की नामोनिशानी मिटा देता है (The Rama Naam erases the fear) ’ इस बारे में बताया। ये जो हनुमानजी हैं, हम लोग जानते है कि महाप्राण हैं। सो, मूलाधार चक्र से लेकर हमारे सहस्रार चक्र तक सभी चक्रों में इनका ही प्रवाह चलता हैं, यह तो हम लोगों ने श्रीश्वासम्‌ की पुस्तिका में लिखा हुआ है। राईट, पढ़ा हुआ

मूलाधार चक्र का लम् बीज और भक्तमाता जानकी - भाग २

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ४ फरवरी २०१६ के प्रवचन में ‘मूलाधार चक्र का ‘लम्’ बीज और भक्तमाता जानकी’ इस बारे में बताया।   जानकी जो है, सीतामैया जो है, ये directly ‘लं’ बीज का आविष्कार है। ये वसुंधरा की कन्या होने के कारण, ये ‘लं’ बीज का मूर्तिमंत आविष्कार क्या है? तो ये ‘जानकी’ है। और उसकी शादी किसके साथ हो रही है? ‘राम’ के साथ – ‘श्रीराम’ के

मूलाधार चक्र का लम् बीज और भक्तमाता जानकी - भाग १

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ४ फरवरी २०१६ के प्रवचन में ‘मूलाधार चक्र का ‘लम्’ बीज और भक्तमाता जानकी (Lam beej of the Mooladhara Chakra and Bhakta-Mata Janaki – Part 1) ’ इस बारे में बताया। ये मूलाधार चक्र की बात हम लोग कर रहे हैं। मूलाधार चक्र में बीज है – ‘ॐ लं’ – ‘लं’ ‘लं’ ये बीज है। ‘लं’ ये पृथ्वीबीज है, ‘लं’ ये इंद्रबीज है ये हम लोगों

स्तोत्र-सूक्ते भक्तीपूर्वक म्हणावीत (Chant the hymns with devotion)

सद्गुरू श्री श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या २८ मे २०१५ च्या मराठी  प्रवचनात ‘स्तोत्र-सूक्ते भक्तीपूर्वक म्हणावीत’ याबाबत सांगितले. तर आपण म्हणतो ना मनाला स्पर्श करणं सगळ्यात महत्वाच असतं आणि हे श्रीसूक्त जे आहे ना, हे मनाला स्पर्श करते मानवांच्या. महालक्ष्मीचं आणि लक्ष्मीचं ह्या माय लेकींचं एकत्रित असणारे सूक्त जे आहे, ते आपल्या मनाला स्पर्श करतो, अगदी अर्थ नाही कळला ना, तरीदेखील करतच. बापू! असं कसं? अर्थ कळलाच पाहिजे. हो! मी अर्थावर बोलतो़च आहे. सगळे अर्थ

नवरात्रीचे महत्त्व  (Significance of Navaratri)

सद्गुरू श्री श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या २८ मे २०१५च्या मराठी प्रवचनात ‘नवरात्रीचे महत्त्व’ याबाबत सांगितले.   आज आत्ता जे श्रीसूक्त योगिंद्रच्या तोंडून मी ऐकत होतो, माझ्या लहानपणीच्या आठवणी जाग्या झाल्या. तेव्हा माझे वयस्कर मंडळी आजोबा, पणजोबा, आज्या, पण ज्या माझ्या नात्यातली मंडळी उपस्थित असायची नवरात्रीमध्ये दोन्ही नवरात्रांमध्ये. अर्ध्या-अर्ध्या वयातल्या स्त्रिया, अर्ध्या काय सगळयाच्या सगळया त्या स्त्रिया वयातल्या ह्या नऊवारीमध्येच असायच्या. सुंदर खोपा घातलेल्या, नाकामध्ये नथ, सगळ्या दागिन्यांनी मढलेल्या आणि बाजूला पगडी घातलेले किंवा कमीतकमी