Hindi Pravachan

राधा सहस्त्रनाम

सहस्र रामनामतुल्य राधा नाम (Sahastra Ramnaam-Tulya Radha Naam) – Aniruddha Bapu‬ परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने ५ फरवरी २००४ के ‘राधासहस्रनाम’ हिंदी प्रवचन में ‘सहस्र-रामनाम-तुल्य राधा नाम’ इस बारे में बताया। जब वेदव्यासजी ने गुरु नारदजी से यह पूछा कि मैं तो बस ‘राम’ नाम रटते ही आ रहा था, क्योंकि आपने ही मुझे बताया था कि एक राम नाम ही सहस्र नामों के बराबर है। तब नारदजी

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २९ जनवरी २०१५ के अपने हिंदी प्रवचन में ‘हर एक के मन का पथ युनिक होता है (Every Individual's path of mind is unique)’, इस बारे में बताया।

मेरा साई मेरी सहायता अवश्य करेगा (My Sai will definitely help me) – Aniruddha Bapu‬ परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २९ जनवरी २०१५ के अपने हिंदी प्रवचन में ‘मेरा साई मेरी सहायता अवश्य करेगा’, इस बारे में बताया। हमारे विचार से हमारे मन का पथ बनता है। साई हमेशा यह ध्यान रखते हैं कि श्रद्धावान के मन का पथ कहीं भटक ना जाए। हमारा मन का पथ हमारी वाणी

Aniruddha Bapu told about Path of Mind in Hindi Discourse at Shree Harigurugram, Bandra.

दूसरे आपके बारे में क्या सोचते हैं इसकी चिन्ता मत करना (Don’t worry about what others think of you) – Aniruddha Bapu परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २९ जनवरी २०१५ के अपने हिंदी प्रवचन में मन के पथ के बारे में जानकारी दी। बापू ने इस संदर्भ में बताते समय, ‘दूसरों के कहने से मानव अपने मन को बनाता रहता है, मानव अपना मन कभी भी स्वयं की बुद्धि

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परमपूज्य सद्‍गुरू श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने २० नवंबर २०१४ के हिंदी प्रवचन के दौरान ‘भगवान से प्यार के साथ ठेंठ बातें करें’ ‘Speak Directly To God With Love’ इस बारे में बताया। भगवान को हासिल करने के लिए किसी दलाल की आवश्यकता नही होती है। ऋगवेद, यजुर्वेद और सामवेद में ठेंठ भगवान से करनेवाली प्रार्थनाएं दी गयी हैं। अथर्ववेद में मन्त्र-तन्त्र आदि का गलत इस्तेमाल करनेवाले जातुधानों का नाश

परमात्मा अपने हर एक भक्त पर फोकस्ड रहता है। (Paramatma is focussed on His every Bhakta) - Aniruddha Bapu‬ Hindi‬ Discourse 08 Jan 2015

परमपूज्य सद्‍गुरू श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने ०८ जनवरी २०१५ के हिंदी प्रवचन में ‘परमात्मा अपने हर एक भक्त पर फोकस्ड रहता है’ (Paramatma is focussed on His every Bhakta) इस बारे में बताया। परमात्मा अपने हर भक्त पर फोकस्‍ड रहता है। परमात्मा इस सृष्टी के सभी जीवों का, भक्तों का भला चाहते हैं। भगवान, सद्‍गुरुतत्त्व अपने भक्तों की मदत करने के लिये जिस रुप की जरुरत है, वह रुप

भगवान सर्वसमर्थ है (God is omnipotent) - Aniruddha Bapu‬

परम पूज्य सद्‍गुरू श्री अनिरुद्ध बापूने उनके ०८ जनवरी २०१५ के हिंदी प्रवचन में डॉ. टेस्ला का उदाहरण देकर ‘भगवान सर्वसमर्थ है (God is omnipotent) ’ इस बारे में समझाया। एक विश्वास असावा पुरता, कर्ता हर्ता साई ऐसा। यह साईनाथ सब कुछ कर सकता है। हमारे मन में आता है- ये कैसे हो सकता है? ये नही हो सकता है। लेकीन हो सकता है। वह जरूर कर सकता है। प्रार्थना

साईबाबा के नौंवे वचन का महत्व (The importance of the nineth Promise of Saibaba) - Aniruddha Bapu‬

साईबाबा के नौंवे वचन का महत्व (The importance of the nineth Promise of Saibaba) – Aniruddha Bapu‬ परमपूज्य सद्‍गुरू श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने ०८ जनवरी २०१५ के हिंदी प्रवचन में ‘साईबाबा के वचन का महत्व’ इस बारे में बताया। साईबाबा बोल रहे हैं कि ‘जान लो यहां है सहायता सभी के लिए, मांगे जो जो मिले वह वह उसे।’ साईबाबा से बताओ संकट आया है उससे मुझे बचाओ। संकट

चरणों में अटूट विश्वास रखना। (keep unshaken faith in the lotus feet of Sai) - Aniruddha Bapu

साई चरणों में अटूट विश्वास रखना। (Keep unshaken faith in the lotus feet of Sai) – Aniruddha Bapu परम पूज्य सद्‍गुरू श्री अनिरुद्ध बापूने उनके ०८ जनवरी २०१५ के हिंदी प्रवचन के दौरान ‘साईचरणों में अटूट विश्वास रखना’, इस बारे में बताया।  मै नादान हूँ, निकम्मा हूँ ऐसे मत सोचो। साई नाथजी का वचन है- ‘शरण में मेरी आया और निकम्मा निकला। बतला दो बतला दो ऐसा कोई॥’ अगर मेरे

भगवान पर भरोसा रखो (Have Faith in God) - Aniruddha Bapu‬

भगवान पर भरोसा रखो (Have Faith in God) – Aniruddha Bapu‬ परम पूज्य सद्‍गुरू श्री अनिरुद्ध बापूने उनके ०८ जनवरी २०१५ के हिंदी प्रवचन के दौरान ‘भगवान हर पल मेरे साथ है और मेरे लिए खुदको बदलता हैं। भगवान पर भरोसा करो’, इस बारे में बताया। हमें जानना चाहिए, भगवान हर पल मेरे साथ है और मेरे लिए खुदको बदलता हैं। हम लोग सोचते हैं की हमें भगवान के लिए

परमात्मा का वादा कभी झूठा नहीं होता (Paramatma always keeps his promises) - Aniruddha Bapu‬

Paramatma always keeps his promises परम पूज्य सद्‍गुरू श्री अनिरुद्ध बापूने उनके ०८ जनवरी २०१५ के हिंदी प्रवचनके दौरान ‘ परमात्मा (Paramatma) का वादा कभी झूठा नही होता, वह अपना वादा निभाता ही है’, इस बारे में बताया। जो इन्सान का जन्म लेता है, वह सिर्फ दो ही प्रान्त या प्रदेश में जी सकता है। पहला आदिमाता और परमात्मा के इच्छा का दुसरा प्रान्त है नियमों का प्रान्त। दुसरे प्रान्त

मॉं दुर्गा ! करुणा का विस्तार करो (Mother Durga! Expand Your Compassion) - Aniruddha Bapu‬ Hindi‬ Discourse 01 Jan 2015

मॉं दुर्गा! करुणा का विस्तार करो (Mother Durga! Expand Your Compassion) ‘दुर्गे दुर्घट भारी तुजवीण संसारी, अनाथनाथे अंबे करुणा विस्तारी’ इस मॉं दुर्गाकी आरती में माता दुर्गा पर सर्वप्रथम विश्वास प्रकट करके फिर दुर्गामाता(मॉं दुर्गा) से प्रार्थना की है कि हे मॉं, मैं जहां भी हूं वहां तक तुम अपनी करुणा का विस्तार करो; मैं अक्षम हूं परंतु तुम अपनी करुणा का विस्तार करने में संपूर्ण समर्थ हो। श्री आदिशंकराचार्यजी

‘मैं हूँ’ यह त्रिविक्रम का मूल नाम है - भाग २ (‘ I Am ’ Is Trivikram's Original Name - Part 2) - Aniruddha Bapu‬ Hindi‬ Discourse 01 Jan 2015

‘मैं हूँ’ यह त्रिविक्रम का मूल नाम है – भाग २ (‘ I Am ’ Is Trivikram’s Original Name – Part 2) मानव को स्वयं के बारे में कभी भी नकारात्मक रूप में नहीं सोचना चाहिए। भगवान से कुछ मांगते समय भी सकात्मक सोच ही होनी चाहिए। ‘भगवान आप मेरे पिता हो और मैं आपका पुत्र हूं। आप ऐश्वर्यसंपन्न हो, ऐश्वर्यदाता हो इसलिए मेरे पास भी ऐश्वर्य है, आप उसे

स्तुति-प्रार्थना (Stuti-Prarthana) - Aniruddha Bapu‬ Hindi‬ Discourse 01 Jan 2015

स्तुति-प्रार्थना (Stuti-Prarthana) मानव जो सोचता है वही तत्त्व उसके पास आता है और जैसा वह सोचता है वैसा वह बनता है। मैं त्रिविक्रम की संतान हूं और इसलिए मेरे पास मेरे पिता के सारे गुण अल्प प्रमाण में ही सही मगर अवश्य ही हैं, इस विश्वास के साथ भगवान से मांगना चाहिए। भगवान सर्वसमर्थ हैं, भगवान सर्वगुणसंपन्न हैं, इस तरह भगवान पर विश्वास जाहिर करके उनसे प्रार्थना करनी चाहिए। इसे

‘मैं हूँ’ यह त्रिविक्रम का मूल नाम है (‘I Am’ Is Trivikram's Original Name) - Aniruddha Bapu‬ Hindi‬ Discourse 01 Jan 2015

‘मैं हूँ’ यह त्रिविक्रम का मूल नाम है (‘I Am’ Is Trivikram’s Original Name) आदिमाता चण्डिका और उनके पुत्र त्रिविक्रम (Trivikram) से कुछ मांगते समय श्रद्धावान को सकारात्मक (पॉझिटिव्ह) रूप से मांगना चाहिए। वेदों के महावाक्य यही बताते हैं कि हर एक मानव में परमेश्वर का अंश है। यदि मानव में परमेश्वर का अंश है तो उसे नकारात्मक रूप से मांगने की आवश्यकता ही नहीं है। ‘मैं हूँ’ यह त्रिविक्रम

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तुम्हारी उपलब्धि नहीं बल्कि तुम्हारा विश्वास निर्णायक साबित होता है (You Are Not Judged By Your Performance, You Are Judged By Your Faith) नववर्ष २०१५ में श्रद्धावानों ने प्रेम के पौधे को बढाने का, तुलना न करने का, न्यूनगंड को जगह न देने का, विकास के लिए हर रोज रात को कम से कम १० मिनट शान्ति से बैठने का संकल्प किया है। तुम कितने बडे बडे काम करते हो