Hindi Pravachan

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam that - The same principle may manifest through various forms ( एक ही तत्त्व के विभिन्न स्तरों पर अलग अलग रूप में प्रकट हो सकता है )

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने १८ फ़रवरी २०१६ के पितृवचनम् में ‘एक ही तत्त्व के विभिन्न स्तरों पर अलग अलग रूप में प्रकट हो सकता है’ इस बारे में बताया। अनिरुद्ध बापू ने पितृवचन के दौरान यह बताया कि ये जो ब्रह्मणस्पति हैं, गणपति हैं, जिन्हें हम मूलार्क गणेश कहते है, यह एक ही principal के, एक ही तत्त्व के विभिन्न स्तरों पर होनेवाले रूप हैं, स्वरुप हैं,

सद्गुरु अनिरुद्ध बापू

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १८ फरवरी २०१६ के पितृवचनम् में परीक्षार्थियों को शुभकामनाएँ दीं। सद्गुरु अनिरुद्ध बापू ने कहा कि सभी परीक्षार्थियों को मेरी शुभकामनाएँ। बिनधास माँ (आदिमाता चण्डिका) का नाम लेकर परीक्षा में पेपर लिखने बैठ जाइए और आराम से लिखिए। शांत चित्त्त से लिखिए। जो भी माँ का नाम लेता है, उसे कभी भी किसी से भी डरने की आवश्यकता नहीं होती है। OK! All the

Aniruddha Bapu told in Pitruvachanam 22 Oct 2015 that Aniruddha Bapu Pitruvachanam 22 Oct 2015

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २२ अक्तूबर २०१५ के पितृवचनम् में ‘जब भी आनंदित होंगे, तब तब ‘ जय जगदंब जय दुर्गे ’ बोलिए’ इस बारे में बताया। अदितिमती याने काश्यपपत्नी। अदिति यानी आदिमाता का मूल स्वरूप, अदिति यानी जो कभी खंडित नहीं होती, खंडित होने देती ही नहीं। सबकुछ अखंडीत रखती है वो अदिति है राइट तो हम किसके भक्त हैं, दिति के या अदिति के? अदिति के

'Kuputro Jaayeta Kvachid-Api Kumaataa Na Bhavati' Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam 22 Oct 2015

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २२ अक्तूबर २०१५ के पितृवचनम् में ‘गलती के लिए सच्चे दिल से क्षमा मांगने पर मां दुर्गा तुरंत क्षमा करती हैं’ इस बारे में बताया। हम याद करते हैं साईसत्‌चरित्र की चौपाई – ‘करणे नित्य नैमित्तिक कर्म। शुद्ध स्वधर्म या नाव॥’ ये शुद्ध स्वधर्म है। सनातन धर्म है। मानव का धर्म है। मानवता का धर्म है। मानव धर्म में जनम लेने के बाद उद्धरेत्

अपनी तुलना दूसरों से मत कीजिए (Don't compare yourself to anyone else) - Aniruddha Bapu Pitruvachanam 22 Oct 2015

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २२ अक्तूबर २०१५ के पितृवचनम् में ‘ अपनी तुलना दूसरों से मत कीजिए ’ इस बारे में बताया। दूसरे के साथ अपनी भक्ति की तुलना कभी मत करना | मैने बार बार कहा है कि एक चम्मच है, पानी से भरा हुआ और एक गिलास है जो पानी से ३/४ भरा हुआ है और एक ड्रम है जो पानी से आधा भरा हुआ है।

Aniruddha Bapu told in his Potruvachanam dated 22 Oct 2015Never compare your Bhakti with others (अपनी भक्ति की तुलना दूसरों से मत कीजिए)

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २२ अक्तूबर २०१५ के पितृवचनम् में ‘ अपनी भक्ति की तुलना दूसरों से मत कीजिए’ इस बारे में बताया। अनिरुद्ध बापू ने बताया कि हमारे पास तो सब कुछ है, हमारे पास पुरूषार्थ ग्रंथ है, मॉ का आख्यान है, मॉ का चरित्र है मातृवात्सल्यविंदानम्‌ के रूप में, मातृवात्सल्य उपनिषद के रुप मे हमारे पास क्या है? खबर है पूरी की पूरी कि मॉ का

'Kuputro Jaayeta Kvachid-Api Kumaataa Na Bhavati' Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam 22 Oct 2015

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २२ अक्तूबर २०१५ के पितृवचनम् में ‘कुपुत्रो जायेत क्वचिदपि कुमाता न भवति’ इस बारे में बताया। दुर्गा , क्षमा, शिवा। क्रम भी हमने देखा हुआ है। क्रम का महत्त्व भी देखा हुआ है। प्रसन्नोत्सव करने वाले थे तभी देखा है। ये दुर्गा है यानी पाने के लिए दुर्गम है ये एक मतलब है। बडे बडे ज्ञानियों को ये हातों में भी नहीं आती है।

Aniruddha Bapu told Shuddha swadharm pillars - Shreeshabdadhyaanyog, Shreeshwasam, Swastikshem Sawadam, Shree Gurukshetram Mantra in Pitruvachanam 22 Oct 2015

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २२ अक्तूबर २०१५ के पितृवचनम् में ‘शुद्ध स्वधर्म स्तंभ’ – ‘श्रीशब्दध्यानयोग, श्रीश्वासम्‌, श्रीस्वस्तिक्षेम संवादम्‌, श्रीगुरुक्षेत्रम्‌ मंत्र’ के बारे में बताया। ‘श्रीशब्दध्यानयोग इस स्तंभ के बारे में बताने के बाद अन्य स्तंभों की जानकारी देत् हुए बापू ने कहा- श्रीश्वासम्‌! हम लोग श्रीश्वासम्‌ सुनते हैं, वहॉ जो अपने आप जो ब्रीदींग होता है, जब तब सुन रहे होते हैं, उस ब्रीदिंग से हम लोग जो

Everyone can easily understand the meaning of Swastivakyam

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २२ अक्तूबर २०१५ के पितृवचनम् में ‘ स्वस्तिवाक्यम्‌ का अर्थ हर एक की समझ में आसानी से आ सकता है ’ इस बारे में बताया।     जो सेंटेन्स है, जो वाक्य है, जो स्वस्तिवाक्यम्‌ है, वह मराठी, हिंदवी, अंग्रेजी और संस्कृत में है। सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि इन शब्दों का अर्थ हम easily, आसानी से जान सकते हैं। ये हमने प्रतिमा

Our Focus must be on chanting Swastivakyam - Aniruddha Bapu

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २२ अक्तूबर २०१५ के पितृवचनम् में ‘हमारा ध्यान स्वस्तिवाक्यम्‌ के जाप में रहना चाहिए’ इस बारे में बताया।  अनिरुद्ध बापू ने कहा- ये जो स्वस्तिवाक्यम्‌ है उसमें हमे ध्यान किस बात पर करना है – उस वाक्य का हमे जप करना है। ओके। जिस समय, समझो कि मूलाधारचक्र का पूजन चल रहा है तो उतने समय तक मूलाधार चक्र की प्रतिमा में रहनेवाले ‘लं’

"नित्य उपासना" और "हरिगुरु गुणसंकीर्तन" का अनन्यसाधारण महत्व - (The importance of "Daily Prayers" & "Hariguru Gunasankirtan") - Aniruddha Bapu Pitruvachanam 31st Dec 2015

नये साल का स्वागत करते समय, ३१ दिसंबर २०१५, गुरुवार के दिन सद्‌गुरु बापू ने अपने पितृवचन में, अगले साल याने २०१६ साल में “नित्य उपासना” (daily prayers) और “हरिगुरु गुणसंकीर्तन” के अनन्यसाधारण महत्व को विशद किया था। इस पितृवचन का महत्वपूर्ण भाग संक्षिप्त रूप में मेरे श्रद्धावान मित्रों के लिए इस पोस्ट के द्वारा मैं दे रहा हूँ। “अभी २०१६ साल चंद घण्टों में शुरु होनेवाला है । हर

ध्यान के प्रकार - चिंतनात्मक और एकाग्रता (Types of Meditation- Contemplative & Concentrative) - Aniruddha Bapu Pitruvachanam 22 Oct 2015

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २२ अक्तूबर २०१५ के पितृवचनम् में ध्यान के दो प्रकारों के बारे में बताया। ध्यान के दो प्रकार होते हैं – एक है चिंतनात्मक और दूसरा है एकाग्रता, ऐसा बापू ने कहा।      ध्यान के चिंतनात्मक (contemplative) और एकाग्रता (concentrative) इन दो प्रकारों की जानकारी देकर बापू ने बताया कि हम यहॉ पर concentrative के मार्ग से नहीं जा रहे हैं। एक सामन्य

Aniruddha Bapu‬ told in his Hindi‬ Discourse dated 05 Feb 2004, The names of Ram, Radha and Sadguru-tattva are the Saviours in Kaliyug.

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने ५ फरवरी २००४ के हिंदी प्रवचन में ‘राम, राधा और सद्गुरु के नाम कलियुग में तारक हैं’ इस बारे में बताया।    बापू ने प्रवचन में कहा, ‘आज से हम जो राधानाम का अध्ययन शुरु करने वाले हैं, इस राधानाम की एक और खासियत है। राधानाम का सुमिरन करना चाहिए। राधानाम का ज्ञान, जितना हम समझ सकते हैं, बस वही हमारे लिए काफी

गुरुवार पितृवचनम् - १० डिसेंबर २०१५

गुरुवार, दि. १० दिसम्बर २०१५ को श्रीहरिगुरुग्राम में परमपूज्य बापू ने एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण विषय पर पितृवचन दिया। श्रद्धावानों के लिए बहुत ही श्रद्धा का स्थान रहनेवाला त्रिविक्रम “श्रीश्वासम” में निश्चित रूप में कैसे कार्य करता है और मानव का अभ्युदय करानेवालीं ‘कार्यक्षमता’, ‘कार्यशक्ति’ और ‘कार्यबल’ इन तीन मूलभूत ज़रूरतों की आपूर्ति कैसे करता है, इस बारे में बापू ने किया हुआ पितृवचन संक्षिप्त रूप में मेरे श्रद्धावान मित्रों

Aniruddha Bapu pitruvacahanam

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १५ अक्तूबर २०१५ के पितृवचनम् में ‘ श्रीशब्दध्यानयोग यह अद्भुत है’ इस बारे में बताया।    श्रीशब्दध्यानयोग में उपस्थित रहना है सिर्फ हमको। ना कोई एन्ट्री फीज्‌ है, ना कोई दक्षिणा मूल्य है, या और कुछ भी नहीं है। हमें उपस्थित रहना है, जितना हो सके। अगर एक गुरुवार आ सके, बात ठीक है, अगर महिने में एक ही बार आ सकते हैं तो भी