Hindi Pravachan

`ॐ लं ’ का जप करे (Chant `Om Lam') - Aniruddha Bapu

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ७ एप्रिल २०१६ के पितृवचनम् में  ‘ॐ लं का जप करें’, इस बारे में बताया।  शमनं, दमनं नहीं, destruction नहीं, दमन नहीं है, suppression भी नहीं, नॉर्मल करना। जो हमारे विकार या वासनाएँ हैं, जो भी हमारे षड्‌रिपु हैं, वे सारे षड्‌रिपु कहां से काम करते हैं? तो मूलाधार चक्र से काम करते हैं। और ये जो ‘शं बीज’ है, ये ‘लं बीज’ के

‘ ॐ लं ’ यह कहना ही काफी है - भाग २ (Chanting Om Lam is sufficient - Part 2) - Aniruddha Bapu

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ७ एप्रिल २०१६ के पितृवचनम् में ‘ ॐ लं यह कहना ही काफी है’ इस बारे में बताया। ये जो ‘शं’ बीज है, ये रुद्र का भी है और भद्र का भी है। हमें हमारी जिंदगी में दोनो चाहिए, लेकिन ये स्वरुप किसके लिये हैं? आवश्यकता क्या है? हम कोशिश करते हैं, मैं किसी को ना फसाऊं और मैं अध्यात्म मार्ग पर रहूं, भगवान

रुद्ररूप अशुभ का नाश करता है   (The Rudra roop destroys the Ashubha) - Aniruddha Bapu

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ७ एप्रिल २०१६ के पितृवचनम् में ‘ रुद्ररूप अशुभ का नाश करता है’ इस बारे में बताया। देखिए, वेदों में जो रुद्र मंत्र आते हैं रुद्र के तो उसमें ‘महाभिषक्’ कहा गया। भिषक् का संस्कृत में अर्थ है निष्णात वैद्य, एक्सपर्ट डॉक्टर। हम इससे जान सकते हैं कि उसका रुद्र स्वरुप हमारी फिजिकल बॉडी में, हमारे स्थूल शरीर मे कितना आवश्यक है, सारी बीमारियों का

Chanting Om Lam is sufficient

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ७ एप्रिल २०१६ के पितृवचनम् में ‘ ॐ लं यह कहना ही काफी है’ इस बारे में बताया। अभी हम लोग यह चक्रों के बीजमंत्र को देख रहे हैं, right? तो यह मूलाधार चक्र हैं । मूलाधार चक्र के ‘ लं ’ बीज को हम देखते हैं। क्या है मूलाधार चक्र? उसके साथ हमें अब देखना हैं, ये जो चार दल हैं इस चक्र

Rudra and Bhadra are the two forms of Lord Shiva

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ७ एप्रिल २०१६ के पितृवचनम् में ‘रुद्र और भद्र ये शिव के दो रूप है’ इस बारे में बताया। ये जो बीज है ‘शं’, पहला वाला ‘शं’ और सं, तो ये ‘शं’ बीज है, तो ये ‘शं’ कैसा है, मैंने बोहोत बार बोला है। ‘शं’ शमने, ‘शं’ शांति, श से शमन होता है। दमन नहीं होता है। शमन होता है। इसका मतलब क्या है?

he Shraddhavan is connected to Chandikakul

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ७ एप्रिल २०१६ के पितृवचनम् में ‘श्रद्धावान यह चण्डिकाकुल से जुडा ही है’ इस बारे में बताया। माँ भगवती और उसका जो बेटा है त्रिविक्रम, वो हमारा मन बदलने के लिये सारी सहायता करता है। हमारी बुद्धी को और ताकद देता है, हमारे मन को और सामर्थ्य देता है, हमारे प्राणों में ऐसे ‘बदलाव’ करते हैं, जिससे हम मन कंट्रोल कर सके। लेकिन मन

स्वस्तिक्षेम संवादम्‌ - दिव्य चण्डिकाकुल के साथ संवाद (Swastikshem Samvadam - The Conversation with the divine Chandikakul) - Aniruddha Bapu

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ७ एप्रिल २०१६ के पितृवचनम् में ‘स्वस्तिक्षेम संवादम्‌ यह दिव्य चण्डिकाकुल के साथ किया जानेवाला संवाद है’ इस बारे में बताया। अनिरुध्द बापू ने कहा कि अभी हम स्वस्तिक्षेम संवादम्‌ करने जा रहे हैं। फिर एक बार मै बताता हूं कि स्वस्तिक्षेम संवादम्‌ क्या है? हर एक व्यक्ति अपने मन में, अपने मन की जो भी बात करना चाहता हो, इस चण्डिकाकुल के किसी

नये युग का स्वीकार बडे प्यार से करो (Accept the new era with love) - Aniruddha Bapu

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने 31 मार्च २०१६ के पितृवचनम् में ‘नये युग का स्वीकार बडे प्यार से करो’ इस बारे में बताया। मृत्यु सिर्फ़ शरीर की ही नहीं बल्की कार्य की भी होती है, मृत्यु मन की भी होती है, भावना की भी होती है। मृत्यु रिश्ते की भी होती है। Husband & Wife जब divoce लेते हैं तो वो उस शादी की मृत्यु ही है। एक मॉ-बाप

सुन्दरकाण्ड पाठ, पूजन एवं अभिषेक (Sunderkand Paath) - Aniruddha Bapu

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने ०३ मार्च २०१६ के पितृवचनम् में श्रीहरिगुरुग्राम में १७ मई २०१६ से २१ मई २०१६ तक होनेवाले सुन्दरकाण्ड पाठ के बारे में जानकारी दी। १७ मई २०१६ से २१ मई २०१६ तक ५ दिन यहां श्री हरिगुरुग्राम में सुबह ९ बजे से शाम को ७ बजे तक पूरे के पूरे वैदिक पध्दति से उपाध्याय गणों के द्वारा यहां सुन्दरकाण्ड का पठण, पूजन और

रं बीज और स्वरूपान्तर की शक्ति (Ram Beej And The Power of Transformation) - Aniruddha Bapu Pitruvachanam 03 Mar 2016

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने ०३ मार्च २०१६ के पितृवचनम् में ‘रं बीज और स्वरूपान्तर की शक्ति’ के बारे में बताया। मैंने बार बार बताया कि राम यह पुरुषार्थ है और जानकी उस पुरुषार्थ का फ़ल है। राम क्या है, तो पुरुषार्थ स्वरूप है, ओज स्वरुप है और जानकी उस पुरुषार्थ का फल है। फल से आगे और बीज होते हैं यानी पुरुषार्थ की शक्ति ही है वो,

शिवगंगागौरीमाता-गदास्तोत्र का महत्त्व (Importance of Shivagangagauri-gadastotram) - Aniruddha Bapu

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने १० मार्च २०१६ के पितृवचनम् में  ‘ शिवगंगागौरीमाता-गदास्तोत्र का महत्त्व ’ इस बारे में बताया। आज हम शिवगंगागौरीमाता-गदास्तोत्र का मतलब संक्षिप्त में देखते हैं। अभीष्टा है, अभीष्ट करनेवाली है, सब कुछ अच्छा करनेवाली है। अरिष्टस्तंभनकारिणी है। अरिष्ट याने जो संकट आनेवाला है उसका स्तंभन करनेवाली उसे वहीं रोक देनेवाली। ये कैसी है, तो वडवानला है। यानी पानी में भी जो अग्नि नहीं बुझती, ऐसी

बम् बीज के बारे में जानकारी  (Information about Bam beej) - Aniruddha Bapu

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने १० मार्च २०१६ के पितृवचनम् में ‘बम् बीज के बारे में जानकारी ’ दी।  अभी ये बम् बम् भोलेनाथ। ये बम् बम् क्या है? ये जो बम् है ये बम् बीज जो है ये ब्रह्मबीज कहलाता है। बल बीज है, ब्रह्मबीज है बृहद्‌ बीज है, याने बढनेवाला ग्रोथ का बीज है। बम् ये ब्रह्म का बीज है। बम् ये बृहत्‌ का याने ग्रोथ

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने १० मार्च २०१६ के पितृवचनम् में ‘त्रिविक्रम के प्यार को प्रतिसाद दो’ इस बारे में बताया।

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने १० मार्च २०१६ के पितृवचनम् में ‘ त्रिविक्रम के प्यार को प्रतिसाद दो’ इस बारे में बताया।  हमें जिंदगी मे यही जानना चाहिए- don’t react, respond तुरंत react करते जाते हैं। नहीं, थोडा तो सोचिए। एक पल भर के लिए सोचिए। सही अर्थ क्या है इसका और एक ध्यान में रखिए की तुम इन्सान हो तो बाकी के सारे भी इन्सान है। हर

सर्वदेवनमस्कार: केशवं प्रति गच्छति (The worship offered to any deity ultimately reaches to the Supreme Being Keshava) - Aniruddha Bapu Pitruvachanam 10 Mar 2016

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने १० मार्च २०१६ के पितृवचनम् में ‘सर्वदेवनमस्कार: केशवं प्रति गच्छति’ इस बारे में बताया।  अनिरुद्ध बापू ने पितृवचन के दौरान यह बताया की, हर किसी के दिमाग में एक सवाल उठता है । कि हम लोग कौनसी प्रार्थना करे, कौनसा जप करे गुरुक्षेत्रम का मंत्र दररोज करना बहुत अच्छी बात है, सुंदर बात है, compulsory नहीं है। वैदिक धर्म की महत्ता है भारतीय

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 18 Feb 2016 that 'Happiness is found along the way (आनन्द यह पथ पर प्रवास करते समय मिलता है )'

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने १८ फ़रवरी २०१६ के पितृवचनम् में ‘आनन्द यह पथ पर प्रवास करते समय मिलता है’ इस बारे में बताया। अनिरुद्ध बापू ने पितृवचन के दौरान यह बताया कि यह जानना बहुत जरुरी है, हर एक बडे इन्सान के लिए भी, जो हर दिन इम्तेहान देता रहता है, किसी ना किसी चीज में और हर बच्चे के लिए भी, जो पढाई में इम्तिहान दे