Hindi Pravachan

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 14 Jan 2016 that, 'What is Recreation'

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १४ जनवरी २०१६ के पितृवचनम् में ‘रीक्रीएशन यानी क्या’, इस बारे में बताया। Recreation center, recreational work, recreational acts, recreational adjustments. Recreation. आप ऑफिस में जाईये, कहीं कार्यालय में जाईये, मॉल में जाईये, होटल में जाईये, कहीं, जो भी है वहां ये recreation या recreational. अगर हम लोग इसका मतलब ढूंढना चाहते हैं डिक्शनरी में तो आसान है, आप सभी लोगों के पास डिक्शनरी

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 28 Apr 2016 that, 'The Ganapati chops down the painful memories'.

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २८ एप्रिल २०१६ के पितृवचनम् में ‘ गणपति पीडादायी स्मृतियों को काट देते हैं ‘, इस बारे में बताया। उसने वादा किया है अपनी माँ से कि जब भी कोई भी भक्त, मेरा भक्त, हे माँ, मेरा भक्त, मुझे सच्चे दिल से बुलाएगा, ये जानकर कि मै विघ्नों का नाश करता हूं, ये जानकर कि पहले उसकी कुबुद्धि को सुबुद्धि बनाता हूं, ये जानकर

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 28 Apr 2016 that Walk barefoot on the Earth, Chant Lam

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २८ एप्रिल २०१६ के पितृवचनम् में  ‘ॐ लं’ का जाप करते हुए जमीन पर नंगे पाव चलना चाहिए, इस बारे में बताया। जो गलत ions, ions यानी क्या बोलते हैं पोटॅशियम (K+), क्लोराईड (Cl-), ये जो ions हैं, फ़्री ions, हमारी बॉडी में जो रहते हैं, वो बहुत हार्म करते हैं, हमारे शरीर को बहुत तकलीफ पहुँचा सकते हैं। लेकिन जब हम जमीन पर

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 28 Apr 2016 that We must surrender to Ekadanta

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २८ एप्रिल २०१६ के पितृवचनम् में ‘हमें एकदंत की शरण में जाना चाहिए’, इस बारे में बताया।  हमें ये जानना चाहिये कि भगवान अपने वचन को कभी नहीं तोडता, एक इन्सान अपने वचन को तोडता रहता है, और इसीलिये उसके जीवन में हमेशा ये युद्ध रहता है। जब तक उसने भगवान को जो वचन दिया है, उस वचन के अनुसार वो अपनी जिंदगी में

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 28 Apr 2016 that God never breaks His promises

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २८ एप्रिल २०१६ के पितृवचनम् में ‘भगवान कभी भी अपना वादा तोडते नहीं हैं’, इस बारे में बताया। जब हम संघर्ष को युद्ध मानते हैं, और हमारा संघर्ष सबसे ज्यादा किसके साथ रहता है, भगवान के साथ। संघर्ष है तब तक अच्छा है, भगवान के साथ जब युद्ध करने लगते हैं, तब महिषासुर के सैनिक बन गये। हम बहुत बार सोचते हैं, बापू हम

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 28 Apr 2016 that Ganapati removes the bad thoughts)

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २८ एप्रिल २०१६ के पितृवचनम् में ‘गणपतिजी बुरे विचारों को निकाल देते हैं’, इस बारे में बताया। ब्रह्मर्षि भारद्वाज कहते हैं, अपने शिष्य से, एक गणपति का रहस्य बताते हुए, कि हाथ में गणपतिजी ने दांत किसलिए रखकर वे मूलाधार में बैठे हुए हैं, इसलिए कि मूल में ही गलत विचार, जब निकलने लगते हैं, तब जो गणपति का सही भक्त है, तो गणपति

Aniruddha Bapu told in Pitruvachanam 28 Apr 2016 that The presiding deity for the Muladhara Chakra is ‘Ekadant’ Ganesha

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २८ एप्रिल २०१६ के पितृवचनम् में  ‘मूलाधार चक्र के स्वामी एकदन्त गणेश हैं’, इस बारे में बताया। यह उच्चारण की क्लॅरिटी (clarity) देनेवाला शस्त्र क्या है? दन्त। दिखानेवाला दाँत है। यही क्लॅरिटी का बेसिक है। क्या हम जो मन में होता है, वही उच्चार करते हैं? नहीं, हमारे खाने के दाँत अलग, दिखाने के दाँत अलग। ये कहता है, दिखाने के दाँत भी एक

Aniruddha Bapu told in Pitruvachanam 28 Apr 2016 that Words hurt more deeply than weapons

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २८ एप्रिल २०१६ के पितृवचनम् में  ‘लफ्ज ये शस्त्र से ज्यादा दर्द देते हैं’, इस बारे में बताया। हमें कुछ philosophies में नही जाना है। हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में जो हम लोग कर रहे हैं, हमारे  जीवनभर हम लोग जो कर रहे हैं, हर चीज, उस में हम लोग कैसे अच्छे बनें और विकसनशील बनें, और बेहत्तर बनें, इसलिये हम ये कोशिश कर

संघर्ष से अर्थपूर्ण संवाद का निर्माण होना चाहिए

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २८ एप्रिल २०१६ के पितृवचनम् में ‘संघर्ष से अर्थपूर्ण संवाद का निर्माण होना चाहिए’, इस बारे में बताया। हम लोग ये ही नहीं समझते कि सही क्या है, गलत क्या है? और सही और गलत के बीच में हमेशा युद्ध होता रहता है, हमारे मन में। और जो संघर्ष होना चाहिये – संघर्ष याने meaningful dialogue, अर्थपूर्ण संवाद, अर्थपूर्ण चर्चा, अर्थपूर्ण analysis, विश्लेषण, अर्थपूर्ण

बच्चे का जन्म यह माँ और बच्चे के बीच का युद्ध नहीं है, बल्कि एक स्वाभाविक प्रक्रिया है (The Childbirth is a natural process and not a conflict between Mother and Child) - Aniruddha Bapu

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २८ एप्रिल २०१६ के पितृवचनम् में  ‘बच्चे का जन्म यह माँ और बच्चे के बीच का युद्ध नहीं है, बल्कि एक स्वाभाविक प्रक्रिया है’, इस बारे में बताया। बच्चा जब जनम लेता है, तब भी कितना संघर्ष होता है उसके लिये। युद्ध नहीं वो करता अपनी माँ के साथ, उसकी माँ भी उसके साथ युद्ध नही कर रही। ये सोचिये जो बालक, एक very

स्वयं का स्वयं के साथ होनेवाला संघर्ष यह सब से बडा संघर्ष होता है - Aniruddha Bapu

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २८ एप्रिल २०१६ के पितृवचनम् में ‘स्वयं का स्वयं के साथ होनेवाला संघर्ष यह सब से बडा संघर्ष होता है’, इस बारे में बताया। सबसे बडा संघर्ष होता है या युद्ध होता है, वो हमारे मन में ही, खुद का ही खुद के साथ। मैंने last गुरुवार को बताया आपको कि ये ‘शं’ बीज जो है, ये क्या करता है, मर्यादा में डालता है,

संघर्ष से विकास होता है (The Struggle brings the Growth) - Aniruddha Bapu

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २८ एप्रिल २०१६ के पितृवचनम् में  ‘संघर्ष से विकास होता है’, इस बारे में बताया। संघर्ष क्या है? संघर्ष। कौन सही या कौन गलत ये decide करने के लिये नहीं होता। संघर्ष होता है, विकास के लिये। संघर्ष किस लिये होना चहिये? विकास के लिये। मेरी भी भलाई हो और सामनेवाले की भी भलाई हो। जैसे, स्कूल में देखो, डिबेट रहती है, वाद विवाद

निसर्ग को कोई भी हरा नहीं सकता (No one can defeat the Nature) - Aniruddha Bapu Pitruvachanam 28 Apr 2016

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २८ एप्रिल २०१६ के पितृवचनम् में ‘निसर्ग को कोई भी हरा नहीं सकता’, इस बारे में बताया। जब हम जमीन पर चलते हैं, वो क्या है? तो संघर्ष है। एक तो हम मानव हैं, प्राणि के जैसे चार पै्रों पर नहीं चलते, means against the gravity। गुरुत्वाकर्षण के फोर्स के विरुद्ध में हम खडे हैं और चलते हैं। यानी हम किसके साथ संघर्ष करते

संघर्ष के बिना जीवन यह बस एक कल्पना है (The Life Without Struggle is Just a Fantasy) - Aniruddha Bapu

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २८ एप्रिल २०१६ के पितृवचनम् में  ‘संघर्ष के बिना जीवन यह बस एक कल्पना है’, इस बारे में बताया। मूलाधार चक्र में लं बीज में ही समाहित है। ये सं बीज है क्या? ध्यान में रखिये कि मूलाधार चक्र के साथ यानी हमारी हर एक की मूल प्रकृति के साथ ये जुडे हुए हैं।   सं संघर्षे। सं बीज ये संघर्ष का बीज है। संघर्ष,

मूलाधार चक्र की चार पंखुडियाँ (The four petals of Mooladhara Chakra) - Aniruddha Bapu

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ७ एप्रिल २०१६ के पितृवचनम् में ‘मूलाधार चक्र की चार पंखुडियाँ’ इस बारे में बताया। स्वाधिष्ठान चक्र को देखते समय ध्यान में रखिये की मूलाधार गणपति जो हैं, मूलाधार गणेश जो हैं, उनका जो ‘ॐ लं’ ये बीज है, इंद्र का भी बीज है, जो वसुंधरा का बीज है, ये जानते हैं कि इस वसुंधरा पर सारे विघ्नों का नाश करनेवाले जो मंगलमूर्ति गणेश