Hindi Pravachan

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 14 Jan 2016 about ’Enjoy with the name of God’

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १४ जनवरी २०१६ के पितृवचनम् में ‘भगवान के नाम के साथ आनन्द कीजिए’ इस बारे में बताया। हम लोग जब पिकनिक पे जायें तो हमारे डॅड को और दादी को बोलें कि आओ, तुम भी थोडा मजा करो। उसके लिये कुछ पैसा खर्च करने की आवश्यकता नहीं होती, सिर्फ प्यार से बुलाना। ऐसा करने की आवश्यकता नहीं है कि चार टिकीट हमारे घर के

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 14 Jan 2016 about ’Remembering best moments of life is also a recreation’

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १४ जनवरी २०१६ के पितृवचनम् में ‘जीवन के अच्छे पलों को याद करना यह भी रिक्रिएशन है’ इस बारे में बताया। तो भगवान ने सपनें बनाये रात की नींद में और ये मेडिकल टर्म जान लीजिये कि आप लोग, कुछ लोग बोलते हैं कि मुझे सपना आता ही नहीं, अरे झूठ बोल रहे हैं। ऐसा हो ही नहीं सकता। सभी को सपने आते हैं,

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 16 Mar 2017 about, Panchamukha-Hanumat-kavacham Explanation – 19 (Kraim Beej - Yuddha Beej)

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १६ मार्च २०१७ के पितृवचनम् में ‘पंचमुखहनुमत्कवचम् विवेचन’ में ‘क्रैं बीज – युद्ध बीज’ के बारे में बताया। ‘क्रैं अस्त्राय फट् इति दिग्बंधः’। – क्रैं बीज जो है इसे युद्ध बीज कहते हैं। क्या कहते हैं? युद्ध बीज। क्रैं ये युद्ध बीज है। हमारे मन में जो युद्ध चलता रहता है, खुद के साथ ही, हमारे घर में जो युद्ध चलता है, मिया बीवी

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 16 Mar 2017 about, Panchamukha-Hanumat-kavacham Explanation - 18 (Kraim Astraaya Phat)

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १६ मार्च २०१७ के पितृवचनम् में ‘पंचमुखहनुमत्कवचम् विवेचन’ में ‘क्रैं अस्त्राय फट्’ इस बारे में बताया। हम हमारे जीवन में खुद के जीवन में झाँककर देखेंगे तो हम लोग जान जाएंगे कि हमारे जीवन में हम लोग ने कितनी बार हम गुस्से के कारण कुछ गलत लफ्ज बोल देते हैं, गलत शब्द बोल देते हैं। लोगों के साथ हमारे सालों पुराने संबंध एक पल

पंचमुखहनुमत्कवचम् विवेचन – १७ (फट्  बीज) [Panchamukha-Hanumat-kavacham Explanation – 17 (Phat Beej) - Aniruddha Bapu

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १६ मार्च २०१७ के पितृवचनम् में ‘पंचमुखहनुमत्कवचम् विवेचन’ में ‘फट् बीज’ के बारे में बताया। ‘क्रैं अस्त्राय फट्’ इति दिग्बंधः। – ‘फट्’ जो है, जो किसी भी चीज का तुरंत त्याग करने के लिये, उसका नाश करने के लिये, उसका विनाश करने के लिये, उसको नष्ट करने के लिये हमेशा के लिये, जो आवाहन किया जाता है, उसका बीज है ‘फट्’। बाप रे! ये

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 16 Mar 2017 about, Panchamukha-Hanumat-kavacham Explanation - 16 ( Armor seed is 'Rhim')

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १६ मार्च २०१७ के पितृवचनम् में ‘पंचमुखहनुमत्कवचम् विवेचन – १६ (कवच का बीज ‘र्‍हीं’) ’ के बारे में बताया र्‍हीं बीज याने क्या तो इस कवच का बीज जो है, जिस बीज से ये कवच बढता है, हर एक के अंदर वो र्‍हीं याने माँ का प्रणव। जो देवी अथर्वशीर्ष जानते है, हम लोगों ने ग्रंथ में दिया हुआ है, देवी अथर्वशीर्ष, माँ का

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 16 Mar 2017 about, Panchamukha-Hanumat-kavacham Explanation - 15 (protective shield)

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १६ मार्च २०१७ के पितृवचनम् में ‘पंचमुखहनुमत्कवचम् विवेचन’ में ‘संरक्षक कवच’ के बारे में बताया। परमात्मा का कौन सा भी अवतार क्यों न हो, माँ चण्डिका का भी कौन सा भी वरदान क्यों न हो, ये हर इन्सान तक पहुँचाने का कार्य कौन करता है? ये महाप्राण हनुमान करते हैं। इसलिये ये विराट हैं। और ऐसे विराट का ये पंचमुखहनुमत्कवच है। कवच यानी हमारा

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 16 Mar 2017 about, Panchamukha-Hanumat-kavacham Explanation - 14 (राम दुआरे तुम रखवारे) Panchamukha-Hanumat-kavacham Explanation - 14 (Ram Dware Tum Rakhware)

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १६ मार्च २०१७ के पितृवचनम् में ‘पंचमुखहनुमत्कवचम् विवेचन’ में ‘ राम दुआरे तुम रखवारे ’ इस बारे में बताया। विराट! मैंने क्या कहा? एक विशेषता क्या है? किस दिशा में, उसको कुछ दिशा का बंधन नहीं है। इस दिशा में बढता जाये या उस दिशा में बढता जाये उसकी, वह स्वेच्छा है, स्व-इच्छा है, इसलिये। ये सबसे क्या है? एकदम सेफ है। क्योंकि अगर

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 16 Mar 2017 about, Panchamukha-Hanumat-kavacham Explanation - 13 (Lord Hanumanji provides sufficient strength)

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १६ मार्च २०१७ के पितृवचनम् में ‘पंचमुखहनुमत्कवचम् विवेचन’ में ‘हनुमानजी उचित सामर्थ्य देते हैं’ इस बारे में बताया। ये हनुमानजी जो हैं, ये जब हनुमान के रूप में प्रगट हुए, तब भी, हाल ही में हम लोगों ने अग्रलेखों में पढा, हनुमानजी तो त्रेतायुग में आए थे, लेकिन सत्ययुग में भी थे। किस नाम से थे? ब्रह्मपुच्छ और वृषाकपि। ब्रह्मपुच्छ वृषाकपि ये नाम होते

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 16 Mar 2017 about, Panchamukha-Hanumat-kavacham Explanation - 11 (Virat Trivikram)

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १६ मार्च २०१७ के पितृवचनम् में पंचमुखहनुमत्कवचम् के विवेचन में ‘विराट त्रिविक्रम’ के बारे में बताया। भगवान विष्णु के, महाविष्णु के, शिवशंकरजी के, परमशिव के कितने भी अवतार यहां क्यों न आयें, वे सिर्फ वसुंधरा पर ही आते हैं। लेकिन उनसे भी, उनके साथ साथ हमें ये ध्यान में रखना चाहिये, जब ये भगवान का स्वरूप परमात्मा का अवतार हो जाता है, तो वो

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 16 Mar 2017 about, Panchamukha-Hanumat-kavacham Explanation - 11 (Kahehu taat as mor pranaama)

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १६ मार्च २०१७ के पितृवचनम् में पंचमुखहनुमत्कवचम् के विवेचन में ‘सुन्दरकाण्ड में हनुमानजी को ‘तात’ कहकर श्रीराम और जानकी ने संबोधित किया है’ इस बारे में बताया।    हम लोग जब सुंदरकांड पढते हैं, अभी तो बहुत लोगों ने छोड़ भी दिया है, मैंने कभी से बोला है ना, २००३ से कि सुंदरकांड पढ़िए, पढ़िए, पढ़िए, पढ़िए। पहले तो दो तीन साल बहुत जोर

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 16 March 2017 about, 'Panchamukha-Hanumat-kavacham Explanation - 10'

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १६ मार्च २०१७ के पितृवचनम् में ‘पंचमुखहनुमत्कवचम्’ के बारे में बताया। हम जब भगवान को बोलते हैं तो actually हम किसको बोल रहे हैं? तो भगवान का जो अंश हममें है, उसे बता रहे हैं। कौन बता रहा है? आपका मन बता रहा है। ये मन जो है, बडा चंचल है। और ये इस मन को, एक बार जो उसने निश्चय किया तो दो

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 16 Mar 2017 about, Panchamukha-Hanumat-kavacham Explanation - 09 (Learn Dasya Bhakti from Hanumanji)

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १६ मार्च २०१७ के पितृवचनम् में ‘पंचमुखहनुमत्कवचम्’ के विवेचन में ‘हनुमानजी से दास्य भक्ति सीखें’ इस बारे में बताया।  दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते। और पहली दो चौपाई में क्या कहते हैं? जय हनुमान ग्यान गुन सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर। ति्हुं लोक उजागर – स्थूल, सूक्ष्म और तरलो, तीनों जो विश्व हैं, तरल विश्व यानी ये विराट स्वरुप

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 14 Jan 2016 about, anchamukha-Hanumat-kavacham Explanation - 06 ’.

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १६ मार्च २०१७ के पितृवचनम् में ‘पंचमुखहनुमत्कवचम्’ के विवेचन में प्राणशक्ति के नियन्त्रक हनुमानजी हैं, इस बारे में बताया। तो आप कहेंगे – बापू यानी विश्व की शक्ति जो है, उस विराट के अंदर नहीं आती। एक बाजू से देखें तो आपका कहना सही है। देखिये जो अभी जो सेकंड ग्रंथ में प्रेमप्रवास में लिखा है वैसे ही कि समझो एक यहा एक पात्र

Aniruddha Bapu Clip no 2 Virat

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १६ मार्च २०१७ के पितृवचनम् में ‘पंचमुखहनुमत्कवचम्’ के विवेचन में ‘विराट’ इस शब्द के बारे में बताया।   और विराट क्या क्या चीज है, हम लोग देखते हैं, अगर वेदों में हम लोग देखें, उपनिषदों में देखें, पुराणों में झाककर देखें, तो विश्व की उत्पत्ति अगर हुई तो उसमें उत्पत्तीकरण दिया गया है, वो बहुत जटिल है। उसमें एक स्टेज है ‘विराट’। हिरण्यगर्भ स्टेज