Hindi Pravachan

भय से झूठा मैं ताकतवर बनता है (Fear makes False Self more stronger) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 21 August 2014

Fear makes False Self more stronger मानव यदि स्वयं अपनी विवेकबुद्धि का उपयोग नहीं करता, तो उसका सही मैं दुर्बल बनता जाता है । दुर्बल मन पर भय आसानी से कब्जा कर लेता है और भय के कारण बार बार गलत विचार आते रहते हैं । गलत विचारों की शृंखला से झूठा मैं ताकतवर होता है, पनपता है । भय से ‘झूठा मैं’ किस तरह बढता है इस बारे में

झूठा मैं कैसे उत्पन्न होता है (How the False Self gets created) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 21 August 2014

How the False Self gets created मानव के मन में विचारचक्र लगातार चलता रहता है । मानव किसी भी बात के बारे में डर की भावना से सोचता है । इस अनुचित विचारशृंखला से उसका सही मैं दबकर झूठा मैं उसपर हावी हो जाता है । ‘झूठे मैं’  की उत्पत्ति के बारे में  परम पूज्य सद्गुरु श्रीअनिरुद्धसिंह ने अपने २१ अगस्त २०१४ के प्रवचन में मार्गदर्शन किया, जो आप इस

झूठे मैं से मुक्ति कैसे पायी जा सकती है (How to get rid of False Self)  - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 21 August 2014

मानव के जीवन में लोग जो उसके बारे में कहते हैं उसके आधार पर वह मानव अपनी एक झूठी प्रतिमा बना लेता है और वही उसका सही मैं है यह वह मान लेता है । इस भ्रम कारण से ही उसके जीवन में रण चलता रहता है । भगवान की शरण में जाकर इस ‘ झूठे मैं ’ के रण से मुक्ति पायी जा सकती है, इस बारे में परम

सही मैं और झूठा मैं के बीच की खींचातानी (Tug of War between True Self & False Self - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 21 August 2014)

सही मैं और झूठा मैं के बीच की खींचातानी अन्य लोगों से मानव अपने बारे में रहने वाली उनकी राय सुनकर ‘अपने मैं’ की धारणा बना लेता है। इससे वह अपने सही मैं को दबाकर झूठे मैं को ताकतवर बनाता है और इन दोनों के बीच की खींचातानी जीवन भर चलती रहती है । सही मैं और झूठा मैं के बीच की खींचातानी के बारे में परम पूज्य सद्गुरु श्रीअनिरुद्धसिंह

सही मैं और झूठा मैं (True Self & False Self)  - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 21 August 2014

सही मैं और झूठा मैं (True Self & False Self) मानव के भीतर के ‘ सही मैं ’ को यानी बिभीषण को महाप्राण हनुमानजी सामर्थ्य प्रदान करते हैं  । वहीं, मानव के भीतर का ‘ झूठा मैं ’ यह कुंभकर्ण की तरह रहता है । मानव को चाहिए कि भगवान की भक्ति करके वह ‘ झूठे मैं ’ का दामन छोडकर ’सही मैं’ को प्रबल बनाये । मानव के भीतर रहने वाले ‘ सही

साईनाथजी की शरण में जाने से जीवन सार्थक बन जाता है | (Take shelter at Sainathji's Feet and Life becomes Fruitful - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 21 August 2014)

साईनाथजी की शरण में जाने से जीवन सार्थक बन जाता है | (Take shelter at Sainathji’s Feet and Life becomes Fruitful) साईनाथजी की शरण में गया और जीवन व्यर्थ हो गया ऐसा इस दुनिया में कोई भी नहीं है ।  यह साईवचन मानव (human beings) के जीवन में सच (thruth) हो सकता है, लेकिन इसके लिए उसका सच में साईनाथजी की शरण में जाना अनिवार्य है । शरण इस शब्द के

एएडिएम सेवा- अनन्त चतुर्दशी २०१४ (AADM Seva- Anant Chaturdashi 2014) - Aniruddha Bapu Marathi Discourse 11 Sep 2014

अनिरुद्धाज अ‍ॅकॅडमी ऑफ डिझॅस्टर मॅनेजमेंट (AADM)  के स्वयंसेवकों के द्वारा अनन्त चतुर्दशी, ८ सितंबर २०१४ को गणपति पुनर्मिलाप (विसर्जन) कार्यक्रम में की गयी सेवा की जानकारी सद्गुरु श्री अनिरुद्धजी ने यानी बापु ने दी l मुंबई में ६१ जगह और मुंबई के बाहर ५ शहरों में यह(AADM)  सेवा की गयी l इस सेवा में ४७४५ स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया, जिनमें ७१ मेडिकल्स स्वयंसेवकों का यानी डॉक्टर्स और पॅरामेडिकल्स का सहभाग

Aniruddha Bapu

भक्तमाता श्रीलक्ष्मी स्वयं ऐश्वर्य स्वरूपा हैं, वहीं भक्तमाता राधाजी ऐश्वर्य की जननी हैं । सागर और सागर का जल, सूर्य और सूर्यप्रकाश ये जिस तरह अलग नहीं हैं, उसी तरह राधाजी और श्रीलक्ष्मीजी अलग नहीं हैं । राधाजी और श्रीलक्ष्मी ये भक्तमाता आह्लादिनी के ही दो स्वरूप हैं, इस बारे में परम पूज्य सद्‌गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने २५ मार्च २००४ के प्रवचन में बताया, जो आप इस व्हिडियो में

भक्तमाता पंकजा श्रीलक्ष्मी (Bhaktamata Pankaja ShreeLakshmi) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 25 March 2004

भक्तमाता पंकजा श्रीलक्ष्मी कमल में विराजमान हैं । कमल यह कीचड में से ऊपर उठकर हमेशा ऊर्ध्व दिशा में आगे बढता रहता है । इसी तरह  कुमार्ग को त्यागकर सन्मार्ग पर आगे बढनेवाले के जीवन में भक्तमाता पंकजा श्रीलक्ष्मी प्रकट होती हैं । भक्तमाता पंकजा श्रीलक्ष्मी  के बारे में परम पूज्य सद्‌गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने २५ मार्च २००४ के प्रवचन में बताया, जो आप इस व्हिडियो में देख

भक्तमाता राधा- श्रीमती (Bhaktamata Radha - Shreemati) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 25 March 2004

भक्तमाता राधाजी का एक नाम श्रीमती है । भक्तमाता राधाजी हर प्रकार का धन भक्त को देती हैं, भौतिक धन देती हैं । इसलिए वे श्रीमती हैं।  साथ ही मन को सुमति देनेवालीं भी भक्तमाता राधाजी ही हैं । भक्तमाता राधाजी के ‘श्रीमती’ इस नाम के बारे में सद्गुरु श्रीअनिरुद्धसिंह ने अपने २५ मार्च २००४ के प्रवचन में बतायी, जो आप इस व्हिडियो में देख सकते हैं l ॥ हरि